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देश

तिब्बत की शासन प्रणाली को लेकर भारतीयों का भ्रम

तिब्बत में शासन प्रणाली (System of governance) को लेकर भारतीयों में काफी भ्रम है। यह बात तिब्बत पर किए गए आईएएनएस सी-वोटर सर्वेक्षण में सामने आई है। सर्वेक्षण में शामिल कुल 32.5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें इस बात का कोई ज्ञान नहीं है कि तिब्बती लोग किस तरह की व्यवस्था के तहत रहते

तिब्बत में शासन प्रणाली (System of governance) को लेकर भारतीयों में काफी भ्रम है। यह बात तिब्बत पर किए गए आईएएनएस सी-वोटर सर्वेक्षण में सामने आई है। सर्वेक्षण में शामिल कुल 32.5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें इस बात का कोई ज्ञान नहीं है कि तिब्बती लोग किस तरह की व्यवस्था के तहत रहते हैं। सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि 24 प्रतिशत लोगों का मानना है कि तिब्बती चीनी सेना के नियंत्रण में रहते हैं।

इस सर्वेक्षण के नतीजे पूरे देश के 3000 लोगों से बातचीत के आधार पर निकाले गए हैं। सर्वेक्षण में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया, जिसमें पता चला कि 18.4 प्रतिशत लोग समझते हैं कि तिब्बत एक राजनीतिक और आध्यात्मिक नेता द्वारा शासित है। इसके अलावा, 22.2 प्रतिशत लोग मानते हैं कि तिब्बत में लोकतांत्रिक व्यवस्था है।


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1950 में चीन ने किया कब्ज़ा

तिब्बत एक स्वतंत्र इकाई है, जिसे 1950 में चीन ने अपने कब्जे में ले लिया था। चीन ने 1950 में इस क्षेत्र पर अपने दावे को लागू करने के लिए हजारों सैनिकों को भेजा था। इसके बाद कुछ क्षेत्र तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र बन गए और अन्य कुछ क्षेत्रों को पड़ोसी चीनी प्रांतों में शामिल कर लिया गया।

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चल रहे गतिरोध के बीच भारत को चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ संघर्ष के सौहार्दपूर्ण समाधान की उम्मीद है। (Wikimedia Commons)

वर्तमान में भारत और चीन के बीच पिछले नौ महीनों से पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सीमा विवाद को लेकर गतिरोध बना हुआ है। भारतीय सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हर प्रकार की स्थिति का मुकाबला करने के लिए तैयार है।

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चीन अपनी विस्तारवादी नीति पर चलते हुए एलएसी से लगते ऐसे कई स्थानों पर यथास्थिति बदलने के लिए प्रयासरत है, जो कि भारतीय क्षेत्र हैं। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले दिनों वह एलएसी के पास भारतीय क्षेत्र में घुस आया था, जिस पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी और वह चीन के साथ सभी स्तरों पर इस मामले को गंभीरता से उठा रहा है। (आईएएनएस)

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श्रेया घोषाल, गायिका [Wikimedia Commons]

श्रेया (Shreya Ghoshal) ने अपने और नए ट्विटर सीईओ पराग अग्रवाल के बीच पुरानी चैट को खोदने वाले प्रशंसकों पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। गायिका ने एक ट्वीट में उन्हें 'बचपन का दोस्त' कहा है। घोषाल ने अपनी स्कूली शिक्षा आठवीं कक्षा तक रावतभाटा के एटोमिक एनर्जी सेंट्रल स्कूल नंबर 4 में की, जहां वह ट्विटर के वर्तमान सीईओ पराग अग्रवाल की सहपाठी थीं।

अग्रवाल की ट्विटर के नए सीईओ के रूप में नियुक्ति के बाद 37 वर्षीय गायिका सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी थीं।

सोशल मीडिया यूजर्स को दोनों के बीच पुराना आदान-प्रदान मिला।

दूसरा अग्रवाल का एक ट्वीट है, जिसमें लिखा है, "अच्छी डीपी, क्या हाल चाल हैं। (नाइस डीपी। हाउ इज इट गोइंग)।

'चिकनी चमेली' हिटमेकर (Shreya Ghoshal) ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "अरे यार तुम लोग कितना बचपन का ट्वीट निकला रहे हो। ट्विटर अभी लॉन्च हुआ है। 10 साल पहले! हम बच्चे थे! दोस्त एक दसरे को ट्वीट नहीं करते क्या? क्या टाइम पास चल रहा है ये?"

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इंद्रेश कुमार, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुख्य संरक्षक और वरिष्ठ संघ नेता । [Wikimedia Commons]

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुख्य संरक्षक और वरिष्ठ संघ नेता इंद्रेश कुमार (Indresh Kumar) ने देश के उलेमाओं से कहा कि मदरसे में सिर्फ दीनी और मजहबी तालीम न दें, बल्कि स्किल डेवलपमेंट, कंप्यूटर शिक्षा और दूसरी सभी तालीम भी दें। उन्होंने सीएए और एनआरसी की हिमायत की और विश्वास दिलाया कि दूसरे देशों के सताए अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता दी जाएगी। साथ ही साथ उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को अपनी सीमा में रहने की नसीहत दी।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण की निंदा करने पर इमरान खान की कड़ी आलोचना करते हुए वरिष्ठ संघ नेता ने कहा कि दुनिया के मुसलमानों के लिए क्या अयोध्या राम मंदिर समस्या है?

इंद्रेश कुमार (Indresh Kumar) ने कहा कि मदरसे अपनी जमीन को सिर्फ पढ़ाई तक ही सीमित रखें। मदरसों में गैर-कानूनी कामों को बढ़ावा देकर चंद लोग पूरे इस्लाम का नाम खराब करने की कोशिश करते हैं। ऐसे लोगों पर सख्ती की जरूरत है, ताकि ये दहशतगर्द इस्लाम, मुसलमान, मुल्क व मिल्लत का नाम न खराब कर सकें।

वरिष्ठ आरएसएस नेता ने शिक्षा पर जोर देते हुए कहा, "माता-पिता एवं अभिभावकों को चाहिए कि वे भले ही आधे पेट खाएं, लेकिन अपने नौनिहालों को बेहतरीन शिक्षा दें। उन्हें देशभक्ति और वतन के शहीदों की कहानियां भी बचपन से सुनाएं, ताकि अगली पीढ़ी हमारी गुजरी हुई पीढ़ी और गुजरे हुए कल की इज्जत करते हुए अपना भविष्य रोशन बनाए।"

इमरान खान ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण की निंदा की थी। संघ नेता ने इसका जवाब देते हुए कहा कि दुनिया के मुसलमानों के लिए क्या अयोध्या राम मंदिर समस्या है? आप भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने में इतनी दिलचस्पी क्यों रखते हैं? हिंदू दुनिया में जहां कहीं भी रहते हैं, उस देश के कानूनों के मुताबिक रहते हैं।

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कोविड -19 संक्रमण वायरस सांकेतिक इमेज (pixabay)

एक अध्ययन में पाया गया है कि जो लोग गंभीर कोविड -19(COVID-19) संक्रमण से बचे हैं, उनकी तुलना में हल्के और मध्यम लक्षण वाले लोगों में अगले वर्ष में मौत का खतरा दोगुने से अधिक हो सकता है।

अमेरिका में फ्लोरिडा विश्वविद्यालय(University of Florida) के शोधकतार्ओं ने पाया कि 65 वर्ष से कम आयु के गंभीर कोविड -19(Covid-19) रोगियों में असंक्रमित की तुलना में मरने की संभावना 233 प्रतिशत बढ़ी है। जर्नल फ्रंटियर्स इन मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि 65 वर्ष से कम उम्र के रोगियों के लिए मृत्यु का जोखिम अधिक है।

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