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देश

White House: बाइडन महकमे में भारतीय कुनबा मजबूत

जो बाइडन अब अमरिका के 46 वें राष्ट्रपति चुने जा चुके हैं। इसी बीच जो बाइडन ने 20 अमरीकी-भारतियों को अपने प्रबंधन में अहम पदभार सौंपा है। जिनमे से 17 White House का हिस्सा होंगे। सबसे पहला अहम पद ही उप-राष्ट्रपति का कमला हैरिस को सौंपा गया है, जिन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में जी-जान लगा दी

जो बाइडन अब अमरिका के 46 वें राष्ट्रपति चुने जा चुके हैं। इसी बीच जो बाइडन ने 20 अमरीकी-भारतियों को अपने प्रबंधन में अहम पदभार सौंपा है। जिनमे से 17 White House का हिस्सा होंगे। सबसे पहला अहम पद ही उप-राष्ट्रपति का कमला हैरिस को सौंपा गया है, जिन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में जी-जान लगा दी थी।

भारतीय मूल के नीरा टंडन को White House ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट के निदेशक के रूप में नामित किया गया है और डॉ विवेक मूर्ति को अमरिकी सर्जन जनरल के रूप में नामित किया गया है। वहीं वनिता गुप्ता को एसोसिएट अटॉर्नी जनरल डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस के रूप में नामित किया गया है, और पूर्व विदेश सेवा के अधिकारी कश्मीरी मूल की उज़रा ज़ेया को नागरिक सुरक्षा, लोकतंत्र और मानवाधिकार के लिए अनुसचिव नामित किया है।


माला अडिगा को भविष्य की प्रथम महिला डॉ. जिल बाइडन के लिए नीति निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है और गरिमा वर्मा प्रथम महिला कार्यालय की डिजिटल निदेशक होंगी, जबकि सबरीना सिंह को उनके उप प्रेस सचिव के रूप में नामित किया गया है।

साथ ही भारतीय मूल के भारत राममूर्ति को व्हाइट हाउस नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल में डिप्टी डायरेक्टर के रूप में नामित किया गया है और गौतम राघवन, जिन्होंने पहले ओबामा प्रशासन में White House में काम किया था, राष्ट्रपति कार्यालय के कार्मिक कार्यालय में उप निदेशक के रूप में White House में पुनः योगदान देंगे। और बाइडन खेमे के अहम सदस्य विनय रेड्डी को भाषण लेखन प्रबंधन का निदेशक चुना गया है।

अमेरिका की आगामी उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस। (VOA)

युवा श्रेणी में वेदांत पटेल राष्ट्रपति के सहायक प्रेस सचिव के रूप में पदभार संभालेंगे, वह राष्ट्रपति के प्रेस विभाग का हिस्सा बनने वाले तीसरे भारतीय हैं। साथ ही, तीन भारतीय मूल के अमरिकियों ने White House में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के लिए अपना रास्ता बना लिया है। जिनमे तरुण छाबड़ा हैं जो कि वरिष्ठ प्रौद्योगिकी निदेशक और राष्ट्रीय सुरक्षा का पद संभालेंगे; सुमोना गुहा दक्षिण एशिया की वरिष्ठ निदेशक और शांति कलथिल को कि लोकतंत्र और मानवाधिकार के समन्वयक के रूप में पदभार संभालेंगे।

सोनिया अग्रवाल को व्हाइट हाउस में घरेलू जलवायु नीति के कार्यालय में जलवायु नीति और नवाचार के लिए वरिष्ठ सलाहकार नामित किया गया है और विदुर शर्मा को White House COVID-19 रिस्पांस टीम के लिए परीक्षण के लिए नीति सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया है।

यह भी पढ़ें: जो बाइडन ने विदुर शर्मा को बनाया कोविड-19 परीक्षण सलाहकार

जो बाइडन ने 15 अगस्त 2020 को भारतीय समुदाय के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह में हिस्सा लेते हुए कहा था कि “राष्ट्रपति के रूप में, मैं भारतीय-अमेरिकी प्रवासी पर भी भरोसा करना जारी रखूंगा, जो हमारे दो राष्ट्रों को एक साथ रखता है, जैसा कि मैंने अपने पूरे करियर के दौरान किया है।”

अब देखना यह है कि क्या इससे भारत अमेरिका के रिश्ते में मजबूती आएगी या बाइडन द्वारा इस्लामिक कट्टरता फ़ैलाने वाले देशों पर से प्रतिबन्ध हटाने से खटपट होगी। यह तो समय बताएगा किन्तु अमरीका में फिर एक बार भारतीय नया इतिहास रचने जा रहे हैं।

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(NewsGram Hindi)

अगले वर्ष भारत एक बार फिर सबसे बड़े राजनीतिक धमाचौकड़ी का साक्षी बनने जा रहा है। जिसकी तैयारी में अभी से राजनीतिक दल अपना खून पसीना एक कर रहे हैं। यह चुनावी बिगुल फूंका गया है राजनीति का गढ़ कहे जाने वाले राज्य उत्तर प्रदेश में, जहाँ जातीय समीकरण, विकास और धर्म पर खूब हो-हल्ला मचा हुआ है। उत्तर प्रदेश चुनाव में जहाँ एक तरफ भाजपा हिन्दुओं को अपने पाले करने में जुटी वहीं विपक्ष ब्राह्मणों को अपनी तरफ करने के प्रयास में एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। आने वाला उत्तर प्रदेश चुनाव क्या मोड़ लेगा इसका उत्तर तो समय बताएगा, किन्तु ब्राह्मणों को अपने पाले में खींचने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

आपको बता दें कि वर्ष 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में सभी पार्टियों ने खूब खून-पसीना बहाया था, किन्तु सफलता का परचम भारतीय जनता पार्टी ने 312 सीटों को जीत कर लहराया था। वहीं अन्य पार्टियाँ 50 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई। भाजपा की इस जादुई जीत का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के धुआँधार रैली और मुख्यमंत्री चेहरे को जाहिर न करने को गया। किन्तु उत्तर-प्रदेश 2022 का आगामी चुनाव सत्ता पक्ष के चुनौतियों से भरा हो सकता है। वह इसलिए क्योंकि सभी राजनीतिक पार्टी अब धर्म एवं जाति की राजनीति के अखाड़े में कूद गए हैं। इसमें सबसे आगे हैं यूपी में राजनीतिक बसेरा ढूंढ रहे एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन औवेसी! जो खुलकर रैलियों में और टीवी पर यह कहते हुए सुनाई दे जाते हैं कि वह प्रदेश के मुसलमानों को अपनी ओर खींचने के लिए उत्तर प्रदेश आए हैं।

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(NewsGram Hindi, Shantanoo Mishra)

हिन्दू या हिंदुत्व, एक धर्म है या विचार इसका फैसला आज के समय में ग्रंथ, पुराण या धर्माधिकारी नहीं करते, अपितु इसका फैसला करता है कंप्यूटर के सामने बैठा वह तथाकथित बुद्धिजीवि जिसे न तो धर्म का ज्ञान है और न ही सनातन संस्कृति की समझ। इन्हें हम आम भाषा में लिब्रलधारी या लिब्रान्डू भी कहते हैं। यही तबका आज देश में ‘हिन्दू बांटों आंदोलन‘ का मुखिया बन गया है। समय-समय पर इस तबके ने देश में हिन्दुओं को हिंदुत्व के प्रति ही भड़काने का काम किया है। महिलाऐं यदि हिन्दू परंपरा अनुसार वस्त्र पहनती हैं तो वह इस तबके के लिए अभिव्यक्ति की आजादी पर चोट है और साथ ही यह पुराने जमाने का है, किन्तु इसी तबके के लिए हिजाब सशक्तिकरण की मूरत है। जब लव-जिहाद या धर्मांतरण के विरुद्ध आवाज उठाई गई थी तब भी इस तबके ने इसे प्रेम पर चोट या अभिव्यक्ति की आजादी जैसा बेतुका रोना रोया था। दिवाली पर जानवरों के प्रति झूठा प्रेम दिखाकर पटाखे न जलाने की नसीहत देते हैं और बकरी-ईद के दिन मौन बैठकर, सोशल मीडिया पर मिया दोस्त द्वारा कोरमा खिलाए जाने का इंतजार करते हैं।

सवाल करना एक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है, किन्तु स्वयं को लिब्रलधारी बताने के लिए श्री राम और सनातन धर्म की परम्पराओं पर प्रश्न-चिन्ह उठाना कहाँ की समझदारी है? इसी तबके ने भारत में मुगलिया शासन को स्वर्णिम युग बताया था, साथ ही हिन्दुओं को मारने वाले टीपू सुल्तान जैसे क्रूर शासक को करोड़ों का मसीहा भी बताया था। लेकिन आज जब भारत का जागरुक युवा ‘छत्रपति सम्राट शिवाजी महाराज’ का नाम गर्व से लेता है तो यह तबका उसे भी संघी या बजरंग दल का बताने में देर नहीं करता। इस तबके के लिए हिंदुत्व धर्म नहीं एक पार्टी की विचारधारा और यह इसी मानसिकता को विश्व में अन्य लोगों तक पहुंचाकर हिन्दुओं को बदनाम करने का कार्य कर रहे हैं।

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(NewsGram Hindi, साभार: Wikimedia Commons)

आज शहीद स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे(Mangal Pandey) की 194वीं जयंती है। मंगल पांडे(Mangal Pandey) पराधीन भारत की आजादी के वह जननायक थे जिनके एक नारे ने स्वतंत्रता के संग्राम को नई ऊर्जा दिया था। मंगल पांडे(Mangal Pandey) को स्वतंत्रता का जनक भी कहा जाता है जिनके नक्शे-कदम पर चलकर शहीद भगत सिंह, आजाद जैसे वीरों ने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। मंगल पांडे(Mangal Pandey) उन वीरों में से थे जिनके लिए धर्म एवं स्वाभिमान भी बड़ा था और राष्ट्र की स्वतंत्रता भी।

मंगल पांडे!

शहीद मंगल पांडे 19 जुलाई, 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में जन्में थे। मंगल पांडे(Mangal Pandey) क्रांतिकारी के रूप में उभरने से पूर्व कलकत्ता (कोलकाता) के पास बैरकपुर की सैनिक छावनी में “34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री” के सिपाही थे। अंग्रेजों ने भारतीय सिपाहियों को भी बहुत प्रताड़ित किया था। मंगल पांडे के साथ-साथ अन्य सैनिकों ने भी इन प्रताड़नाओं को सहा, किन्तु पानी सर से तब ऊपर चला गया जब भारतीय सैनिकों को सूअर और गाय की चर्भी लगे बारूद वाली बंदूक दी गईं। मंगल ब्राह्मण थे जिस वजह से उन्होंने अपने साथी सिपाहियों के साथ इसकी शिकायत बड़े अधिकारीयों से की। किन्तु इस मामले पर सुनवाई न होता देख उनमें प्रतिशोध की भावना उमड़ पड़ी।

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