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1969 में भारत की प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने काबुल में स्थित बाबर के मकबरे पर दी थी श्रद्धांजलि।(Image Source: Wikimedia Commons)

ये बात तब की है जब इन्दिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री हुआ करती थी। वर्ष 1969 में इन्दिरा गांधी काबुल, अफ़ग़ानिस्तान के दौरे पर गयी थी। ये इन्दिरा गांधी का निजी दौरा नहीं बल्कि भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर राजनयिक दौरा था, तो स्वाभाविक है की उनके साथ उनका एक प्रतिनिधि मण्डल भी साथ गया था। उसी प्रतिनिधि मण्डल में मौजूद शक्स नटवर सिंह की लिखी हुई किताब ‘वन लाइफ इज़ नॉट इनफ़’ के हवाले से हम ये कहानी आपको बता रहे हैं।

नटवर सिंह उस वक़्त एक बड़े आईएफ़एस(इंडियन फ़ॉरेन सर्विस) अधिकारी थे। 1969 में इन्दिरा गांधी सरकार के प्रधानमंत्री सचिवालय में उनकी अहम भूमिका थी। हालांकि 1984 में उन्होंने आईएफ़एस के पद से इस्तीफा दे कर काँग्रेस पार्टी जॉइन कर लिया था। सालों बाद 2004 में वे विदेश मंत्री भी बने। नटवर सिंग उन चुनिन्दा लोगों में से एक हैं जिन्हे उस दौर के नेहरू-गांधी परिवार का बेहद करीबी माना जाता था।


अपनी किताब ‘वन लाइफ इज़ नॉट इनफ़’ में नटवर सिंह 1969 के काबुल दौरे को याद करते हुए लिखते हैं की एक दोपहर प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी अपने खाली वक़्त में कहीं सैर पर जाना चाहती थी। उस सैर पर नटवर सिंह भी उनके साथ मौजूद थे। काबुल से कुछ दूर निकलते ही प्रधानमंत्री इन्दिरा को चंद पेड़ो से घिरी हुई एक टूटी-फूटी इमारत नज़र आई, जिसे देख कर उन्होने साथ चल रहे अफगान के सुरक्षा अधिकारी से पूछ दिया की, ये कौन सी इमारत है। सुरक्षा अधिकारी ने जवाब में बताया की वो ‘बाग-ए-बाबर’ है अर्थात बाबर का मकबरा।

नटवर सिंह लिखते हैं की प्रोटोकॉल को तोड़ कर इन्दिरा गांधी ने बाबर के मकबरे पर जाने का फैसला ले लिया। हालांकि प्रधानमंत्री के इस निर्णय से सुरक्षा अधिकारियों को आपत्ति थी लेकिन उस वक़्त अफ़ग़ानिस्तान में मेहमान, भारत की प्रधानमंत्री को मना करना शायद उन्हे उचित नहीं लगा होगा। तो गाड़ी बाग-ए बाबर की ओर मोड़ ली गयी।

नटवर सिंह आगे लिखते हैं की बाबर के मकबरे के सामने इन्दिरा गांधी अपना सर झुकाए खड़ी रही, और उनके बगल मे ही वो खुद भी खड़े रहे। नटवर सिंह ने इन्दिरा गांधी से कहा की ये उनके लिए बहुत ही सम्मान की बात है की उन्हे भारत की महारानी(इन्दिरा गांधी) के साथ बाबर को श्रद्धांजलि देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

नटवर सिंह की किताब ‘वन लाइफ इज़ नॉट इनफ़’ का 143वां पन्ना।

इतिहास गवाह है की बाबर एक क्रूर मुग़ल आक्रमणकारी था जिसने भारत पर कब्जा करने के बाद हिंदुओं पर निरंतर अत्याचार किया। बाबर के शासन में हिंदुओं के अनगिनत मंदिरों को तोड़ा गया, हिन्दू महिलाओं का बलात्कार किया गया, उनके धर्म परिवर्तन कराए गए।
लेकिन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी, अफ़ग़ानिस्तान में सारे प्रोटोकॉल तोड़ कर भी मुग़ल आक्रमणकारी बाबर को श्रद्धांजलि अर्पित करने जाती है, आखिर क्यूँ?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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