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दुनिया

पक्षियों के दिमाग से पता चल सकता है कि वे अन्य डायनासोरों से ज्यादा क्यों जीवित रहे

अमेरिका के ऑस्टिन में टेक्सास विश्वविद्यालय की एक टीम ने जीवाश्म की खोज की है, जो लगभग 70 मिलियन वर्ष पुराना है। इसकी लगभग पूरी खोपड़ी है जो जीवाश्म रिकॉर्ड में एक दुर्लभ घटना है

डायनासोरों का कंकाल सांकेतिक( wikimedia commons)

अमेरिकी शोधकतार्ओं ने एक नए पक्षी जीवाश्म की खोज की है, जिससे पता चलता है कि एक अद्वितीय मस्तिष्क आकार का कारण हो सकता है कि जीवित पक्षियों के पूर्वज 6.6 करोड़ साल पहले अन्य सभी ज्ञात डायनासोरों का दावा करने वाले बड़े पैमाने पर विलुप्त होने से बच गए। अमेरिका के ऑस्टिन में टेक्सास विश्वविद्यालय की एक टीम ने जीवाश्म की खोज की है, जो लगभग 70 मिलियन वर्ष पुराना है। इसकी लगभग पूरी खोपड़ी है जो जीवाश्म रिकॉर्ड में एक दुर्लभ घटना है जिसने वैज्ञानिकों को प्राचीन पक्षी की तुलना पक्षियों से करने की अनुमति दी जो आज जी रहे हैं। टीम ने साइंस एडवांसेज जर्नल में निष्कर्ष प्रकाशित किए।

जीवाश्म इचिथोर्निस नामक एक पक्षी का एक नया नमूना है, जो अन्य गैर-एवियन डायनासोर के समान ही विलुप्त हो गया था और देर से क्रेतेसियस काल के दौरान अब कान्सास में रहता था। इचिथोर्निस में एवियन और गैर-एवियन डायनासोर जैसी विशेषताओं का मिश्रण है, जिसमें दांतों से भरा जबड़ा होता हैं और एक चोंच भी होती है। बरकरार खोपड़ी ने टोरेस और उनके सहयोगियों को मस्तिष्क को करीब से देखने दिया।


यूटी कॉलेज ऑफ नेचुरल साइंसेज में शोध करने वाले प्रमुख अन्वेषक क्रिस्टोफर टोरेस ने कहा, “जीवित पक्षियों में स्तनधारियों को छोड़कर किसी भी ज्ञात जानवरों की तुलना में ज्यादा जटिल दिमाग होता है।”

टोरेस ने कहा, “यह नया जीवाश्म आखिरकार हमें इस विचार का परीक्षण करने देता है कि उन दिमागों ने उनके अस्तित्व में एक प्रमुख भूमिका निभाई है, जो अब यूटी जैक्सन स्कूल ऑफ जियोसाइंसेज में एक शोध सहयोगी है।”

पक्षी की खोपड़ी उनके दिमाग के चारों ओर कसकर लपेटती है। सीटी-इमेजिंग डेटा के साथ, शोधकतार्ओं ने इचथ्योर्निस की खोपड़ी को एक सांचे की तरह इस्तेमाल किया जिससे उसके मस्तिष्क की एक 3डी प्रतिकृति बनाई जा सके जिसे एंडोकास्ट कहा जाता है। उन्होंने उस एंडोकास्ट की तुलना जीवित पक्षियों और ज्यादा दूर के डायनासोरियन रिश्तेदारों के लिए बनाए गए लोगों से की।

शोधकतार्ओं ने पाया कि इचिथोर्निस का मस्तिष्क जीवित पक्षियों की तुलना में गैर-एवियन डायनासोर के साथ अधिक समान था। विशेष रूप से, सेरेब्रल गोलार्ध – जहां मनुष्यों में भाषण, विचार और भावना जैसे उच्च संज्ञानात्मक कार्य होते हैं – इचिथोर्निस की तुलना में जीवित पक्षियों में बहुत बड़े होते हैं। उस पैटर्न से पता चलता है कि इन कार्यों को बड़े पैमाने पर विलुप्त होने से बचाने के लिए जोड़ा जा सकता है।

टोरेस ने कहा, “अगर मस्तिष्क की एक विशेषता उत्तरजीविता को प्रभावित करती है, तो हम उम्मीद करेंगे कि यह जीवित बचे लोगों में मौजूद होगा लेकिन इचथ्योर्निस जैसे हताहतों में अनुपस्थित होगा। ठीक यही हम यहां देखते हैं।”

यह भी पढ़े : ‘जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में भारत की उल्लेखनीय प्रगति’ .

यूटी जैक्सन स्कूल ऑफ जियोसाइंसेज की प्रोफेसर और अध्ययन की सह-लेखक जूलिया क्लार्क ने कहा, ‘इचिथोर्निस उस रहस्य को उजागर करने की कुंजी है।’ यह जीवाश्म हमें जीवित पक्षियों और डायनासोर के बीच उनके जीवित रहने से संबंधित कुछ लगातार सवालों के जवाब देने के करीब लाने में मदद करता है। (आईएएनएस-PS)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
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