Life on Moon: वैज्ञानिकों ने चाँद की मिट्टी पर उगाया पौधा

Life on Moon: वैज्ञानिकों ने चाँद की मिट्टी पर उगाया पौधा
Life on Moon: वैज्ञानिकों ने चाँद की मिट्टी पर उगाया पौधा [Wikimedia Commons]

न्यूज़ग्राम हिन्दी: मनुष्य ने आग की खोज से लेकर आज चाँद (Moon) तक जाने तक की यात्रा में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इन्हीं उपलब्धियों के बीच अब वैज्ञानिकों को एक नई उपलब्धि प्राप्त हुई है। चंद्रमा और मंगल पर जीवन (Life on Moon is possible) संभव होने के रहस्य के वो और करीब पहुँच गए हैं। इसी क्रम में वैज्ञानिकों ने इतिहास में पहली बार चाँद से लाई मिट्टी में पौधे उगाए हैं। बता दें कि ये मिट्टी अपोलो अभियान के दौरान अंतरिक्षयात्रियों ने लाया था, जिसे अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा (University of Florida) के शोधकर्ताओं ने अपने एक अनुसंधान में उपयोग करके दिखाया कि चंद्रमा के मिट्टी में भी सफलतापूर्वक पौधे उगाए जा सकते हैं।

'कम्यूनिकेशन्स बायोलॉजी' (Communication Biology Journal) जर्नल में प्रकाशित किये गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने इसी बात पर अनुसंधान किया कि हमारे पौधे चंद्रमा कि मिट्टी के प्रति किस तरह का प्रतिक्रिया दिखाते हैं। चंद्रमा कि मिट्टी को वैज्ञानिक लूनर रिगोलिथ के नाम से बुलाते हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के फूड एण्ड ऐग्रिकल्चर साइंसेस इंस्टिट्यूट के प्रोफेसर रॉब फर्ल ने बताया कि नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम को अंतरिक्ष में पौधे उगाने के लिए इस शोध को अच्छे तरीके से समझना होगा। आर्टेमिस प्रोग्राम वही कार्यक्रम है जिसके तहत नासा (NASA) इंसानों को चंद्रमा पर भेजने की तैयारी में है।

यह खोज Life on Moon के लिए महत्वपूर्ण

उन्होंने इस अनुसंधान को खास बताते हुए बताया कि भविष्य में चंद्रमा को केंद्र कि तरह प्रयोग करते हुए कई अंतरिक्ष अभियानों को अंजाम दिया जा सकता है। ऐसे में चंद्रमा पर हम वहीं की ही मिट्टी प्रयोग में लाएंगे पौधे उगाने के लिए। रॉब आगे कहते हैं कि शोधार्थियों ने मात्र 12 ग्राम मिट्टी में एक साधारण प्रयोग किया। उसमें बीज रोप कर उसे धूप, पानी तथा अन्य पोषक तत्व दिए और परिणाम रिकॉर्ड किये।

शोधकर्ताओं ने इस मिट्टी को 11 साल में, नासा को तीन बार आवेदन करने के बाद, उधार पर प्राप्त किया था। यह मिट्टी नासा के अपोलो 11, अपोलो 12 और अपोलो 17 कार्यक्रमों के दौरान इकट्ठी कि गई थी। यह खोज अंतरिक्ष के क्षेत्र में सबसे क्रान्तिकारी अनुसंधान है।

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