अब किसी पीएम को नहीं कहना पड़ेगा कि जनता तक बस 15 पैसा पहुँचता है : Modi

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the gathering at the Indian Community Reception Event, at Singapore Expo, Singapore on November 24, 2015.
The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the gathering at the Indian Community Reception Event, at Singapore Expo, Singapore on November 24, 2015.

यूरोप (Europe) के तीन दिवसीय दौरे पर गए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) जर्मनी (Germany) के एक कार्यक्रम में भारतीय समुदाय को संबोधित कर रहे थे। संबोधन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) द्वरा कांग्रेस पर तंज कसते हुए नरेन्द्र मोदी ने कहा कि अब किसी प्रधानमंत्री को ये नहीं कहना पड़ेगा कि वो 1 रूपया भेजता है तो जनता तक बस 15 पैसा पहुँचता है। जाने वो कौन सा पंजा था जो 85 पैसा झपट लेता था।

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में प्रधानमंत्री अपने सरकर की उपलब्धियों को गिनाते हुए अन्य प्रयासों की तारीफ कर रहे थे। उन्होंने पिछले 7-8 सालों में हुए बदलावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत में जल्दी ही 5G पहुँचने वाला है। इसी क्रम में सभी गावों को ऑप्टिकल फाइबर (Optical Fiber) से जोड़ने का कार्य प्रगति पर है। गांवों में भी मोबाइल द्वारा पेमेंट आसन हो गया है। भारत जितना सस्ता डाटा कहीं भी नहीं है। रियल टाइम डिजिटल पेमेंट (Real Time Digital Payment) में लगभग 40 फीसदी भागीदारी भारत ने दिखाई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधन में बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों की लगभग 10 हजार सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। 2014 के बाद भारत ने लगभग 22 लाख करोड़ रूपए से ज़्यादा रूपए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रान्सफर (Direct Benefit Transfer) के द्वारा भेजे हैं।

डीएनए हिंदी में छपे खबर के अनुसार, इन बदलावों और नए आयामों की बात करते हुए पीएम मोदी ने बताया की यह वही देश हैं जिसे आप छोड़कर यहाँ आये थे। दफ्तर, ब्यूरोक्रेसी, टेबल फाइल, आदि सब कुछ वही है पर अब नतीजे सुधर गए हैं। पीएम ने कहा, 'मैं किसी की आलोचना नहीं कर रहा। 2014 से पहले आपसे बात करने पर शिकायत मिलती थी। हर जगह वर्क इन प्रोग्रेस लिखा मिलता था।'

आगे और बताते हुए मोदीजी ने बताया कि अब सभी विभाग अपने हिस्से का काम एडवांस में प्लान करके कर रह हैं। इसके कारण पहले के जैसी परेशानी देशवासियों को नहीं देखनी पड़ रही। अब छोटे-छोटे शहर आपस में नए रूट से जोड़े जा रहे हैं।

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