

बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार ने संप्रभुता उल्लंघन का आरोप लगाते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के खिलाफ गिरफ्तारी की चेतावनी दी है।
इस विवाद के बीच पाकिस्तान की सत्ता पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई है, जहाँ राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी का नाम लंबे समय से चर्चा में रहा है।
बलूचिस्तान का दावा है कि वह अब पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है और वहाँ प्रवेश के लिए किसी भी पाकिस्तानी नागरिक को पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
हर किसी को अपने किए गए अपराध की सज़ा मिलती है—चाहे वह देश का आम नागरिक हो या देश का प्रधानमंत्री। यदि आपको लग रहा है कि यहाँ बात भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हो रही है, तो आप गलत हैं। यहाँ चर्चा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की हो रही है।
हाल ही में बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार (Balochistan Government-in-Exile) की ओर से 8 जनवरी 2026 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट (Arrest Warrant) जारी करने का दावा किया गया है। इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है और देश की पहले से कमजोर स्थिति को और अधिक अस्थिर कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
पाकिस्तान की हालत पहले ही राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के सामने एक और बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है। बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार का आरोप है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा बलूचिस्तान में अवैध रूप से प्रवेश करने की बात कही गई, जिसे वे बलूचिस्तान की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन मानते हैं। निर्वासित बलूच नेतृत्व का कहना है कि इस तरह के बयान न केवल उनकी भूमि पर पाकिस्तान के अधिकार को जबरन थोपने की कोशिश हैं, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के भी खिलाफ है।
पाकिस्तान की सत्ता और भ्रष्टाचार का मुद्दा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान की शीर्ष सत्ता से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोप भी फिर से चर्चा में आ गए हैं। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी (Asif Ali Zardari) पर लंबे समय से भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। उन्हें “मिस्टर टेन परसेंट” तक कहा जा चुका है और उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी खातों और सरकारी धन के दुरुपयोग जैसे मामलों में जांच होती रही है।
आलोचकों का मानना है कि जब देश का राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों ही विवादों और आरोपों से घिरे हों, तो शासन की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। बलूचिस्तान का मुद्दा भी इसी राजनीतिक और नैतिक संकट का हिस्सा बनता जा रहा है, जहाँ सत्ता में बैठे लोग खुद पर लगे आरोपों से ध्यान हटाने के लिए कड़े राष्ट्रवादी रुख अपनाते नजर आते हैं।
बलूचिस्तान सरकार द्वारा लिया गया कदम
बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर यह दावा किया गया कि शहबाज़ शरीफ़ के बयानों और गतिविधियों से बलूचिस्तान की संप्रभुता को नुकसान पहुँचा है। इसी आधार पर यह कहा गया कि यदि शहबाज़ शरीफ़ कभी बलूचिस्तान के किसी भी हवाई अड्डे या क्षेत्र में दिखाई देते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। हालाँकि यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि यह कार्रवाई पाकिस्तान की आधिकारिक संघीय सरकार द्वारा नहीं, बल्कि निर्वासित बलूच सरकार द्वारा घोषित की गई है, जिसे पाकिस्तान मान्यता नहीं देता।
बलूचिस्तान का दावा
बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार का कहना है कि बलूचिस्तान अब पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। उनके अनुसार, पाकिस्तान के किसी भी नागरिक को—चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हो। बलूचिस्तान में प्रवेश करने के लिए विधिवत अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति प्रवेश को वे अवैध मानते हैं और इसी आधार पर गिरफ्तारी की चेतावनी दी गई है।
एक ओर पाकिस्तान की सत्ता भ्रष्टाचार और राजनीतिक अविश्वास से घिरी हुई है, वहीं दूसरी ओर बलूचिस्तान का यह दावा देश की एकता और अखंडता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की यह घोषणा भले ही प्रतीकात्मक हो, लेकिन यह पाकिस्तान के भीतर गहराते राजनीतिक और क्षेत्रीय संकट को उजागर करती है।
(PO)