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दुनिया

International Yoga Day: योग केवल व्यायाम नहीं भक्ति और ध्यान का माध्यम है|

योग शब्द का सबसे पहले प्रयोग प्राचीन ग्रंथ "ऋग्वेद" में किया गया है। योग की उत्पत्ति भले ही प्राचीन भारत में हुई हो लेकिन आज इसे अन्य देशों द्वारा भी अपनाया गया है।

योग शब्द का सबसे पहले प्रयोग प्राचीन ग्रंथ “ऋग्वेद” में किया गया है। (Pixabay)

प्रत्येक वर्ष 21 जून को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day 2021) मनाया जाता है। बड़ी संख्या में इस दिन देश – विदेश में लोग योग करते हैं, मुख्य रूप से सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) करते हैं, ध्यान लगाते हैं। भारत, नई दिल्ली में राजपथ पर बड़ी संख्या में लोग एक जुट हो एक साथ योग करते हैं। जिसे पहली बार 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) द्वारा प्रस्तावित किया गया था। 

हम सभी जानते हैं, योग एक प्राचीन अभ्यास है। पहले लोग मस्तिष्क और श्वास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए योग किया करते थे। योग की इस प्रथा की उत्पत्ति 5000 वर्ष पूर्व उत्तर भारत में हुई थी। योग शब्द का सबसे पहले प्रयोग प्राचीन ग्रंथ “ऋग्वेद” में किया गया है। योग की उत्पत्ति भले ही प्राचीन भारत में हुई हो लेकिन आज इसे अन्य देशों द्वारा भी अपनाया गया है। लेकिन यह अन्य पश्चिमी देशों तक पहुंचा कैसे? 


क्योंकि योग की उत्पत्ति ही भारत में हुई थी तो अधिकांश पश्चिमी देश इससे अनसुने थे। कई लोगों ने बहुत बाद में जाकर योग के महत्व को समझा उसे अपनाया। संयुक्त राज्य अमेरिका में राल्फ वाल्डो इमर्सन और हेनरी डेविड जैसे दार्शनिक थे जिन्होंने पहली बार 1830 में योग के दर्शन के साथ काम किया था। 

लेकिन पश्चिमी देशों में सनातन धर्म के साथ – साथ योग की महत्ता को भी समझाने का श्रेय वेदांत के विख्यात एवं प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद को जाता है। उन्होंने 1893 में अमेरिका स्थित शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। और इसी सम्मेलन के दौरान उनके द्वारा दिए गए संदेश ने उन्हें प्रसिद्धि दिलाई थी। जिसके बाद से उन्होंने कई वर्षों तक अमेरिका देश का भ्रमण किया। बड़ी संख्या में लोगों को योग सिखाया उसके महत्व से परिचित कराया। 

स्वामी विवेकानंद ने एक प्राचीन भारतीय ऋषि “पतंजलि” की परंपरा को पुनर्जिवित किया था। (Wikimedia Commons)

स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) ने अमेरिकी दर्शकों के लिए जो योग प्रस्तुत किया था, वह उन संस्करणों से भी भिन्न था, जिनसे आज अधिकांश लोग परिचित हैं। विवेकानंद ने बड़े पैमाने पर योग के बारे में दर्शन, मनोविज्ञान और आत्मसुधार के विषय पर बात की लोगों को अवगत कराया। हालांकि आज भी योग को रहस्मय, प्राचीन परंपरा के रूप में देखा जाता है लेकिन अब इसका स्वरूप बदल गया है। योग के अभ्यास का मुख्य उद्देश्य बदल गया है। बदलते समय के साथ योग के अभ्यास में गहन बदलाव देखने को मिले हैं। आइए जानते हैं उन बदलावों के बारे में। 

स्वामी विवेकानंद ने एक प्राचीन भारतीय ऋषि “पतंजलि” की परंपरा को पुनर्जिवित किया था। जिसे लगभग सभी ने भुला सा दिया था। महर्षि “पतंजलि” संभवतः पहली शताब्दी ईसा पूर्व के बीच भारत में रहा करते थे। महर्षि पतंजलि (Maharishi Patanjali) के अनुसार ‘दुखों को दूर करने के लिए मनुष्यों को सुख, सुविधाओं का त्याग करने की आवश्यकता थी।’ 

एक पत्रकार “मिशेल गोल्डबर्ग” The Goddess Pose के लेखक कहते हैं कि पतंजलि का योग “आत्म साक्षात्कार” के बजाय “आत्म विस्मरण” का एक उपकरण है। लेकिन आज योग को अपने अस्तित्व को त्यागने के तरीके के रूप में देखा ही नहीं जाता है। अधिकांश लोग दैनिक जीवन में सुख, स्वास्थ्य और करुणा पाने के लिए योग की ओर आकर्षित होते हैं। 

अधिकांश लोग आज योग को शारीरिक व्यायाम (Exercise) और आसन के साथ जोड़ते हैं। लेकिन योग केवल व्यायाम करने का माध्यम नहीं है। योग में भक्ति चिंतन और ध्यान मुख्य रूप से शामिल है। महर्षि पतंजलि और स्वामी विवेकानंद ने भी योग के माध्यम से मानसिक व्यायाम को प्राथमिकता दी थी। लेकिन आज यह केवल शारीरिक होता जा रहा है।

महर्षि पतंजलि ने शरीर को कारागार बताया है और उसका तिरस्कार करने पर जोर दिया है। (Wikimedia Commons)

महर्षि पतंजलि ने शरीर को कारागार बताया है और उसका तिरस्कार करने पर जोर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि हमारे शरीर से हमारा कोई भी लगाव योग के लिए बाधा है। विवेकानंद ने भी इन्हीं के विचारों को प्रतिध्वनित करते हुए कहा है कि, हमें आसनों का तिरस्कार करना चाहिए। विवेकानंद ने तर्क दिया है कि शरीर पर एक जुनूनी ध्यान योग के सच्चे अभ्यास से विचलित कर देता है और योग का तो अलसी अभ्यास ही “ध्यान” है।

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साथ ही योग का एक केंद्रीय अभ्यास जिसे संस्कृति में “स्वाध्याय” के रूप में जाना जाता है। और महर्षि पतंजलि के शब्दों में उसका अर्थ होता है “पवित्र शास्त्रों का पठन” लेकिन आज स्वाध्याय का अर्थ बदलकर ‘स्वयं का अध्यन्न’ हो गया है। लोग अक्सर खुश रहने के लिए, कम तनावग्रस्त जीवन जीने के लिए योग का अभ्यास करते हैं। स्वाध्याय तो एक स्वस्थ योग अभ्यास के केंद्र में है। यह योगियों को दूसरों और आसपास की दुनिया को समझने में मदद करते हैं। लेकिन आज ‘परस्पर निर्भरता’ योग का केंद्र बन गए हैं। 

योग, प्राचीन काल में गुरू की नैतिकता को भी बढ़ावा देते थे। प्राचीन प्रथा में योगी अपने गुरु के घर उनके पास रहकर वर्षों तक प्रशिक्षण लेते थे। लेकिन आज योगी स्टूडियो, पार्क, या घर पर ही योग का अभ्यास करते हैं। 

हमनें जाना की पारंपरिक योग और समकालीन योग की प्रथाएं अब बिल्कुल समान नहीं हैं। आज भले ही योग रोजमर्रा की जिंदगी में पुख्ता हो गई है। लेकिन हमें योग के अतीत और उनके असली महत्व पर विचार करना जरूरी है। योग प्राचीन जरूर है लेकिन कालातीत नहीं। 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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ओला इलेक्ट्रिक के स्कूटर।(IANS)

ओला इलेक्ट्रिक ने घोषणा की है कि कंपनी ने 600 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ओला एस1 स्कूटर बेचे हैं। ओला इलेक्ट्रिक का दावा है कि उसने पहले 24 घंटों में हर सेकेंड में 4 स्कूटर बेचने में कामयाबी हासिल की है। बेचे गए स्कूटरों का मूल्य पूरे 2डब्ल्यू उद्योग द्वारा एक दिन में बेचे जाने वाले मूल्य से अधिक होने का दावा किया जाता है।

कंपनी ने जुलाई में घोषणा की थी कि उसके इलेक्ट्रिक स्कूटर को पहले 24 घंटों के भीतर 100,000 बुकिंग प्राप्त हुए हैं, जो कि एक बहुत बड़ी सफलता है। 24 घंटे में इतनी ज्यादा बुकिंग मिलना चमत्कार से कम नहीं है। इसकी डिलीवरी अक्टूबर 2021 से शुरू होगी और खरीदारों को खरीद के 72 घंटों के भीतर अनुमानित डिलीवरी की तारीखों के बारे में सूचित किया जाएगा।

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अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत करते हुए, भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश (IANS)

केबीसी यानि कोन बनेगा करोड़पति भारतीय टेलिविज़न का एक लोकप्रिय धारावाहिक है । यहा पर अक्सर ही कई सेलिब्रिटीज आते रहते है । इसी बीच केबीसी के मंच पर भारत की हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश पहुंचे । केबीसी 13' पर मेजबान अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत करते हुए, भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश 41 साल बाद हॉकी में ओलंपिक पदक जीतने को लेकर बात की। श्रीजेश ने साझा किया कि "हम इस पदक के लिए 41 साल से इंतजार कर रहे थे। साथ उन्होंने ये भी कहा की वो व्यक्तिगत रूप से, मैं 21 साल से हॉकी खेल रहे है। आगे श्रीजेश बोले मैंने साल 2000 में हॉकी खेलना शुरू किया था और तब से, मैं यह सुनकर बड़ा हुआ हूं कि हॉकी में बड़ा मुकाम हासिल किया, हॉकी में 8 गोल्ड मेडल मिले। इसलिए, हमने खेल के पीछे के इतिहास के कारण खेलना शुरू किया था। उसके बाद हॉकी एस्ट्रो टर्फ पर खेली गई, खेल बदल दिया गया और फिर हमारा पतन शुरू हो गया।"

जब अभिनेता अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ के बारे में अधिक पूछा, तो उन्होंने खुल के बताया।"इस पर अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ पर खेलते समय कठिनाई के स्तर को समझने की कोशिश की। इसे समझाते हुए श्रीजेश कहते हैं कि "हां, बहुत कुछ, क्योंकि एस्ट्रो टर्फ एक कृत्रिम घास है जिसमें हम पानी डालते हैं और खेलते हैं। प्राकृतिक घास पर खेलना खेल शैली से बिल्कुल अलग है। "

इस घास के बारे में आगे कहते हुए श्रीजेश ने यह भी कहा कि "पहले सभी खिलाड़ी केवल घास के मैदान पर खेलते थे, उस पर प्रशिक्षण लेते थे और यहां तक कि घास के मैदान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेलते थे। आजकल यह हो गया है कि बच्चे घास के मैदान पर खेलना शुरू करते हैं और बाद में एस्ट्रो टर्फ पर हॉकी खेलनी पड़ती है। जिसके कारण बहुत समय लगता है। यहा पर एस्ट्रो टर्फ पर खेलने के लिए एक अलग तरह का प्रशिक्षण होता है, साथ ही इस्तेमाल की जाने वाली हॉकी स्टिक भी अलग होती है।" सब कुछ बदल जाता है ।

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