Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
देश

लौहपुरुष सरदार पटेल का राजनीतिक मनोभाव

आज देश भर में सरदार वल्लभ भाई पटेल की 145वीं जयंती मनाई जा रही है। इसी दिन को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद शहर में हुआ था। (Wikimedia Commons)

हम हर साल सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाते हैं। भारत को अखंड भारत की ओर ले जाने में उनकी भूमिका अतुलनीय रही है।

हालाँकि, पटेल की गिनती क्रांतिकारियों में नहीं होती मगर वह आज सम्पूर्ण भारतवर्ष के लिए एकता का प्रतीक हैं।


उनका मानना था कि कांग्रेस का लक्ष्य ब्रिटिश राष्ट्रमंडल के भीतर अपनी आन को कायम करने की ज़िद होनी चाहिए ना की पूर्ण स्वतंत्रता। महात्मा गाँधी की ही तरह, पटेल ने भी ब्रिटिश राष्ट्रमंडल में आज़ाद भारत की भागीदारी में लाभ देखा, बशर्ते कि भारत को समान दर्जा मिले।

समाजवादी विचारों के समर्थक पटेल, स्वतंत्रता के लिए हिंदू-मुस्लिम एकता की शर्त के खिलाफ थे, इसी कारण से गाँधी के कहने पर 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रपति पद के लिए जवाहरलाल नेहरू को चुना गया। और आगे चल कर गाँधी के ही दबाव ने उन्हें इस पद से हमेशा वंचित रखा। अगर 1945-46 में गाँधी का दबाव ना होता तो, पटेल भारत के पहले प्रधानमंत्री होते।

पटेल, जवाहरलाल नेहरू की देश में आर्थिक और सामाजिक बदलाव लाने की हठ से असहमत थे। उन्होंने सदा ही पारंपरिक हिंदू मूल्यों में निहित एक रूढ़िवादी सोच को अपना समर्थन दिया था।

यह भी पढ़ें – भगत सिंह के बसंती चोले की वेदना को समझने की कोशिश

सरदार पटेल और महात्मा गांधी। (Wikimedia Commons)

स्वतंत्रता के पहले तीन वर्षों के दौरान, पटेल ने उपप्रधान मंत्री, गृहमंत्री, सूचना मंत्री और राज्यमंत्री के रूप में देश की सेवा की। वह भारत को आत्मनिर्भर देखना चाहते थे।

कहते हैं कि उनके परिवार वालों का मानना था कि पटेल आगे चल कर कोई आम नौकरी ही करते नज़र आएंगे। मगर 1917 में महात्मा गाँधी से हुई उनकी मुलाक़ात ने पटेल को स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा कर दिया।

1917 से 1950 तक सरदार पटेल भारतीय राजनीतिक पट्टी पर हावी रहे। पटेल ने भारतीय संविधान की नींव रचने में अपना महत्वपूर्ण योदान दिया।

Popular

आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में भारत की दिया कुमारी ने रखा भारत का पक्ष।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दे पर भारतीय महिला संसदों के दल ने हिस्सा लिया। स्पेन के मैड्रिड में आईपीयू की 143वीं असेंबली के दौरान आयोजित महिला सांसद पूनम बेन मादाम और दीयाकुमारी के फोरम के 32वें सत्र को संबोधित किया।

इस दौरान सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि जहां सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) अवसरों के नए रास्ते खोलती है, वहीं वे बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार सहित चुनौतियों, खतरों और हिंसा के नए रूपों को भी जन्म देती हैं। भारत में ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से निपटने के लिए कड़े उपाय हैं।

सांसद दीया ने कहा कि भारत ने वर्ष 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बनाया था और समय-समय पर इसमें संशोधन किया है। यह अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित करने और प्रसारित करने पर रोक लगाता है और अधिनियम के विभिन्न वर्गों में उल्लंघन के लिए दंडात्मक प्रावधान भी निर्धारित करता है। उन्होंने आईटी इंटरमीडियरीज गाइडलाइंस रूल्स, 2011 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट पर भी विचार व्यक्त किये। भारतीय दल ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान और उनका सख्ती से क्रियान्वयन ही काफी नहीं है, ऑनलाइन यौन शोषण से बच्चों को बचाने के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता है।

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली में भारत का दल।(IANS)

Keep Reading Show less

भारत ने रूस और चीन से कहा कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।(IANS)

भारत ने रूस और चीन से कहा कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों द्वारा अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। RIC Meeting त्रिपक्षीय ढांचे की 18 वीं बैठक की अध्यक्षता के दौरान रखा, जो शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग पर हुई, जिसमें रूस और चीन के विदेश मंत्रियों सेर्गेई लावरोव और वांग यी ने भी भाग लिया।

जयशंकर ने अफगानिस्तान में समावेशी और प्रतिनिधि सरकार होने पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा, "RIC देशों के लिए आतंकवाद, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी आदि के खतरों पर संबंधित दृष्टिकोणों का समन्वय करना आवश्यक है।" मंत्री ने मास्को और बीजिंग के अपने दो समकक्षों को बताया कि, अफगान लोगों की भलाई के लिए भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप, नई दिल्ली ने देश में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति की पेशकश की थी।

हालांकि, मानवीय पहल में रुकावट आ गई थी, क्योंकि बुधवार तक पाकिस्तान इस खेप को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं था। जयशंकर ने आज कहा, "RIC देशों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट और राजनीतिकरण के अफगान लोगों तक पहुंचे। एक निकट पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साथी के रूप में, भारत उस देश में हाल के घटनाक्रमों, विशेष रूप से अफगान लोगों की पीड़ा के बारे में चिंतित है।"

तीनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आरआईसी देशों के बीच सहयोग न केवल उनके अपने विकास में बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा, स्थिरता में भी योगदान देगा। जयशंकर ने अपने संबोधन में, आरआईसी तंत्र के तहत यूरेशियन क्षेत्र के तीन सबसे बड़े देशों के बीच घनिष्ठ संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और राजनीति आदि क्षेत्रों में हमारा सहयोग वैश्विक विकास, शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।"

kashmir, makhan lal bindroo, terrorist attack, article 370

Keep Reading Show less

वैज्ञानिको के अनुसार कोरोना का यह नया वैरिएंट डेल्टा वैरिएंट से भी ज़्यादा खतरनाक है। (Wikimedia Commons)

कोरोना(Corona) के कारण लगभग 18 से 20 महीने झूझने और घरों में बंद रहने के बाद दुनिया में अब ज़िन्दगी पटरी पर लौट रही है लेकिन अब दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए वैरिएंट ने अब दुनिया के कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नए वैरिएंट का नाम बी.1.1.1.529 है। इस वैरिएंट के आने से वैज्ञानिको के बीच चिंता बढ़ गई है क्योंकि उनकी माने तो यह वैरिएंट डेल्टा प्लस वैरिएंट(Delta Plus Variant) से भी ज़्यादा खतरनाक है।

दक्षिण अफ्रीका(South Africa) में इस वैरिएंट के अब 100 मामले सामने आए हैं और अब यह धीरे-धीरे तेज़ी से फैलता जा रहा है।

Keep reading... Show less