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देश

पाकिस्तान में इस्लामवादियों का उदय

पाकिस्तान एक मुस्लिम बहुल राज्य है, जहां देश लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक सेटअप में धार्मिक समूह और संगठन अहम भूमिका निभाते हैं।

इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान एक मुस्लिम बहुल राज्य है| (IANS)

अपने नागरिकों के लिए धार्मिक अधिकारों की आजादी के आधार पर गठित देश इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान एक मुस्लिम बहुल राज्य है, जहां देश लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक सेटअप में धार्मिक समूह और संगठन अहम भूमिका निभाते हैं।

पाकिस्तान (Pakistan) में राजनीतिक दलों के लिए राजनीतिक ताकत हासिल करने के लिए विभिन्न रूढ़िवादी और कट्टरपंथी धार्मिक समूहों से निष्ठा की तलाश करना आम बात है, जो उन्हें देश पर शासन करने के लिए विजय सिंहासन तक ले जा सकता है।


कई राजनीतिक दलों द्वारा राजनीतिक लाभ की आड़ में कट्टरपंथी (Fundamentalist) धार्मिक समूहों को समर्थन दिया गया है, उन्हें सुविधा प्रदान की गई है और उनकी रक्षा की गई है, जिससे उन्हें धर्म के अपने आख्यान को जनता के बीच अभ्यास और प्रसारित करने का लाभ मिलता है।

हालांकि, जहां ऐसे कई धार्मिक समूहों ने प्रगति की है और पिछले दिनों देश के लोकतंत्र को चुनौती दी है, वहीं हाल ही में तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) की लोकप्रियता और तीव्रता में उछाल ने निश्चित रूप से गंभीर सवाल उठाए हैं कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सरकार कैसे काम करती है।

टीएलपी का मुख्य एजेंडा किसी भी निंदा कार्रवाई या इरादे के खिलाफ विरोध करना रहा है। (सांकेतिक चित्र, Wikimedia Commons)

पिछले आम चुनावों के दौरान राजनीतिक दौड़ का हिस्सा रहे एक कट्टरपंथी धार्मिक संगठन टीएलपी को इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा निषिद्ध घोषित किया गया था, जिसके बाद पूर्व में सुरक्षा अधिकारियों को हिरासत में लिया गया था और देश में तबाही फैलाया गया था।

टीएलपी की लोकप्रिय पहचान इस्लाम (Islam) और उसके पैगंबर मुहम्मद को निशाना बनाने वाले किसी भी व्यक्ति या देश द्वारा किसी भी गतिविधि या कार्रवाई के प्रति उसकी आक्रामक प्रतिक्रिया है।

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टीएलपी का मुख्य एजेंडा किसी भी निंदा कार्रवाई या इरादे के खिलाफ विरोध करना रहा है। इसने देश के सभी कोनों से समर्थन हासिल किया है।

टीएलपी के विरोध प्रदर्शनों में हिंसा, रुकावटें, हत्याएं और बर्बरता देखी गई हैं। टीएलपी ने निश्चित रूप से यह दर्शाया है कि धर्म से संबंधित मुद्दों पर उसकी सार्वजनिक उपस्थिति और हिंसक प्रतिक्रिया ने फिर से मौजूदा सरकार और अधिकारियों को अपने घुटनों पर ला दिया है। (आईएएनएस-SM)

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। (wikimedia commons)

हिंदू संगठनों की ओर से आलोचना झेल रही कर्नाटक की भाजपा सरकार नें कर्नाटक में मंदिर विध्वंस के मुद्दे पर फिलहाल राज्य विधानसभा में एक कानून पारित कर पुरे कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दोनों के बीच मंगलवार को तीखी बहस के बीच प्रस्तावित कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया।

यह प्रस्तावित अधिनियम जिसका नाम 'कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक-2021' है, इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में धार्मिक संरचनाओं के विध्वंस को रोकना है।

यह अधिनियम में कहा गया है कि 'कर्नाटक धार्मिक संरचना संरक्षण अधिनियम -2021' के लागू होने की तारीख से, कानूनों के कानूनी प्रावधान और अदालतों, न्यायशास्त्र और अधिकारियों के आदेशों या दिशानिदेशरें के बावजूद, सरकार धार्मिक केंद्रों की रक्षा करेगी।

सार्वजनिक संपत्तियों पर बने धार्मिक केंद्रों को खाली करने, स्थानांतरित करने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने और विधान परिषद में पारित होने के बाद से ही ।

इसी बीच विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदू जागरण वेदिक और हिंदू महासभा की आलोचना का सामना करने के बाद भाजपा यह कानून लाई है। मैसूर में मंदिर तोड़े जाने के बाद बीजेपी पुनर्निर्माण के लिए नया कानून ला रही है, यह भी आरोप लगायें हैं उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ । इसके बाद कांग्रेस के एक और विधायक और पूर्व मंत्री औरयू.टी. खादर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने जा रहे हैं कि भाजपा ने भारत में आक्रमणकारियों की तरह मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।

\u0915\u0930\u094d\u0928\u093e\u091f\u0915 \u0930\u093e\u091c\u094d\u092f कर्नाटक राज्य का नक्शा सांकेतिक इमेज (wikimedia commons)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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