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देश

जम्मू-कश्मीर में जीसी मुर्मू ने नए सीएजी के रूप में शपथ ली

जम्मू-कश्मीर के नए नियंत्रक और महालेखा परीक्षक बने जीसी मुर्मू। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में एक शपथ ग्रहण समारोह में, श्री गिरीश चंद्र मुर्मू को भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) के पद की शपथ दिलाते हुए।(Image : PIB)

जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने शनिवार को भारत के नए नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) के रूप में शपथ ली। यहां सुबह 10.30 बजे राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के समक्ष उन्होंने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। मुर्मू का कार्यकाल 20 नवंबर 2024 तक रहेगा।

गुजरात कैडर के 1985 बैच के आईएएस अधिकारी मुर्मू राजीव महर्षि का स्थान लेंगे।


राजस्थान कैडर के 1978 बैच के आईएएस अधिकारी महर्षि ने सितंबर 2017 में यह पद ग्रहण किया था।

मुर्मू ने 5 अगस्त को जम्मू एवं कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश के उपराज्यपाल के पद से इस्तीफा दिया था। 5 अगस्त को ही जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने की वर्षगांठ थी।

शपथ लेते हुए पूर्व उपराज्यपाल जीसी मुर्मू (Image: Wikipedia Commons)

मुर्मू बाद में सीएजी कार्यालय गए, जहां भारतीय लेखागार और अकाउंट विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

जम्मू एवं कश्मीर जाने से पहले मुर्मू व्यय विभाग में संयुक्त सचिव, वित्तीय सेवा विभाग और राजस्व विभाग में अतिरिक्त सचिव, और फिर व्यय विभाग में पूर्ण सचिव के रूप में सेवा देने से पहले विशेष सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दी थी।

यह भी पढ़ें- आर्टिकल 370 निरस्त होने की पहली वर्षगांठ पर कश्मीर में 2 दिन के लिए लगाया गया कर्फ्यू।

मुर्मू ने इससे पहले गुजरात में भी महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। उनके पास प्रशासन, आर्थिक और आधारभूत क्षेत्रों का लंबा अनुभव है।

उत्कल विश्वविद्यालय से राजनीतिक शास्त्र से परास्नातक मुर्मू ने यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिघम से एमबीए की डिग्री हासिल की है।

मुर्मू का जन्म ओडिशा के मयूरभंज में 21 नवंबर 1959 को हुआ था। उन्होंने डॉ. समिता मुर्मू से शादी की है और उनकी एक बेटी रूचिका मुर्मू व बेटा रूहान मुर्मू है। (IANS)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

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