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देश

इस बार बमबारी के डर के बिना फसल काट रहा जम्मू-कश्मीर का सीमावर्ती गांव

सीमा पार बम धमाकों ने खेती को जीवन के लिए खतरे वाला काम बना दिया है। क्योंकि पाकिस्तान सीमा नियमों को तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ता।

By: उमर शाह


जम्मू(Jammu) के कृषि क्षेत्रों में किसानों की ओर से एक लोक गीत गाया जा रहा है, जिसमें वह कह रहे हैं, “जदे लोग दे जांदेने इत्थे कुर्बानियां, दुनिया ची रेंदिया ने उंदेया निशानियां।” इसका अर्थ है, जो लोग बलिदान देते हैं वे उनका जीवन समाप्त होने के बाद दुनिया द्वारा याद किए जाते हैं। हालांकि, खेतों में गायन की यह परंपरा सुचेतगढ़ गांव तक ही सीमित है, जो जम्मू के आरएस पोरा सेक्टर में अंतर्राष्ट्रीय सीमा के साथ पाकिस्तान(Pakistan) से चंद कदमों की दूरी पर है। इस गांव में 200 से अधिक घर हैं। यहां सीमा पार बम धमाकों ने खेती को जीवन के लिए खतरे वाला काम बना दिया है।

हालांकि, इस साल चीजें अलग दिख रही हैं। पिछले महीने भारत और पाकिस्तान(Pakistan) ने युद्ध विराम की घोषणा की। यह कई दशकों में पहली बार है कि मार्च से अप्रैल के बीच फसल कटाई के मौसम के दौरान यहां एक युद्धविराम की स्थिति पर सहमति सुनिश्चित हुई है। रमजान के पवित्र महीने 2018 के दौरान, पहले भी युद्ध विराम की घोषणा की गई थी, लेकिन यह अल्पकालिक साबित हुई और लंबे समय तक नहीं टिक पाई। वैसे तो भारत और पाकिस्तान ने नवंबर 2003 में युद्ध विराम संधि पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन यह जमीनी स्तर पर धराशायी हो गई, खासकर 2008 के आतंकी हमलों के बाद संधि का औचित्य ही नहीं रह गया।

इस समझौते के इतिहास को देखते हुए, यह कहना मुश्किल है कि नवीनतम युद्ध विराम कितने समय तक चलेगा, लेकिन स्थानीय लोग इसे नई सुबह के रूप में मान रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों से सुचेतगढ़ में असामान्य रूप से शांति है। यहां अब बंदूकों और मोर्टार के गोलों की आवाज के बजाय पक्षियों के चहचहाने की आवाज आती है। स्थानीय लोग बिना किसी डर के अपनी फसलों को निहारने और अच्छे उत्पादन की उम्मीद में अपने खेतों में जा रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, सुचेतगढ़ में 454 हेक्टेयर भूमि खेती के अधीन है और इसका उपयोग ज्यादातर बासमती चावल और मक्का उगाने के लिए किया जाता है।

जम्मू कश्मीर के किसान ले रहे हैं चैन की साँस।(Pixabay)

स्थानीय निवासी मधु कुमारी ने सकारात्मक भावना के साथ कहा, “हम यह महसूस कर रहे हैं कि कोई भी आपको मारने वाला (सीमा पार से हमला) नहीं है।” उनके परिवार के पास चार एकड़ कृषि भूमि है, जो कि सीमा के सबसे करीब है, जिसे स्थानीय लोग जीरो लाइन कहते हैं। सीमा पर खेती किस तरह की परिस्थिति में की जाती है, उसका वर्णन करते हुए कुमारी के पति भगाराम ने बताया कि सुचेतगढ़ के 20 से अधिक निवासियों ने संघर्ष विराम उल्लंघन में अपनी जान गंवाई है, लेकिन अभी तक खेत पर काम करते समय किसी की भी मौत नहीं हुई है। 61 वर्षीय भगाराम ने कहा, “लेकिन मेरे बचपन से लेकर अभी तक ऐसा एक भी साल नहीं गुजरा है, जब कटाई के दौरान एक डरावना माहौल न रहा हो। हर समय हमारे सिर के ऊपर एक तलवार लटकती रहती थी कि न जाने कब तोप का एक गोला हमें मार सकता है।”

2018 में एक मोर्टार शेल स्थानीय निवासी अविनाश कुमार से कुछ मीटर दूर गिरी थी। गनीमत रही कि वह बच गए। उस साल सीमा पार से हमलों के बाद जो स्थिति बनी थी, वह 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पैदा हुई स्थिति से भी बदतर थी। सीमावर्ती गांवों के निवासियों ने उस विपरीत और खतरनाक परिस्थिति के बारे में भी बातचीत की। हमले में बाल-बाल बचे युवा किसान अविनाश कुमार ने कहा, “मुझे याद है कि वह फरवरी का महीना था। मेरे पिता की तबीयत ठीक नहीं थी। इसलिए मैं खेत में काम करने के लिए गया, क्योंकि फसल का मौसम एक महीना ही दूर था। अचानक मैंने एक जोरदार आवाज सुनी और हवा के तेज झोंके ने मुझे एक कोने में फेंक दिया। मैंने आश्रय लेने के लिए चारों ओर रेंगने की कोशिश की। एक घंटे के भीतर, हम सभी को एक सरकारी बंकर में ले जाया गया और बाद में एक सुरक्षित घर में स्थानांतरित कर दिया गया। हमारी भूमि और फसल सब कुछ नष्ट हो गया था।”

खेती करने में अब नहीं आ रही है समस्या।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

यह एक ड्रिल है, जिसकी सुचेतगढ़ के निवासियों को आदत हो गई है। जब भी सेनाओं के बीच सीमा पार गोलीबारी होने लगती होती है तो उन्हें अपने खेतों और घरों से भागना पड़ता है और सरकारी सुरक्षित घरों में शरण लेनी पड़ती है। जब तनाव कम हो जाता है, तो वे अपने जर्जर घरों और खेतों में लौट आते हैं। किसान तालिब हुसैन ने बताया कि 2018 में सीमा पार गोलीबारी के बाद उनकी कृषि भूमि को भी काफी नुकसान पहुंचा है। हुसैन ने कहा कि उनके अपने खेत उनके लिए मौत का कुआं बन गए हैं। किसान हुसैन ने कहा, “हम फसलों की बुवाई के लिए अनिच्छुक थे और फिर इसके बाद हम फसल काटने में भी संकोच कर रहे थे।” उस वर्ष उन्हें 2 लाख रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि उनकी फसल हिंसा में क्षतिग्रस्त हो गई थी।

यह भी पढ़ें: कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सरकार के प्रयास जारी : अमेरिकी रिपोर्ट

सुचेतगढ़ में खेती के लिए भूमि भी जहरीली होती जा रही है। बमबारी ने खेतों में जहरीले अवशेषों को पीछे छोड़ दिया है, जिससे खेती के लिए योग्य और आदर्श माने जाने वाले अधिकांश स्थानों की उपजाऊ शक्ति भी कमजोर हो गई है। जब आप खेतों का दौरा करते हैं, तो आपको यहां एक खराब गंध का अहसास भी होता है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, पूरे जम्मू-कश्मीर में हर साल गोलाबारी के कारण अनुमानित 17,000 हेक्टेयर भूमि पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है और फसलें नष्ट हो जाती हैं। सुचेतगढ़ निवासी विनय कुमार अपनी फसलों को खोने के दर्द को अच्छी तरह से जानते हैं। वह 2018 में पाकिस्तान की ओर से हुई भारी गोलाबारी के बाद अपनी दो एकड़ भूमि पर कोई भी फसल नहीं उगा पाए थे। यह वो समय था, जब वह अच्छी फसल की उम्मीद कर रहे थे। यही नहीं भूमि को गोलीबारी से इतना नुकसान हुआ कि वह अगे साल भी कोई फसल नहीं हो सके। विनय ने बताया कि उनकी कृषि भूमि एक जले हुए पाउडर केग की तीखी गंध छोड़ रही थी।(आईएएनएस-SHM)

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पूर्वोत्तर सीमा क्षेत्र बहुत संवेदनशील हैं और उनके लिए तोड़फोड़ के ऐसे प्रयासों के बारे में जानना नितांत आवश्यक है। (Unsplash)

भारत चीन सीमा पर बसे हुए गांव चिंता का विषय हैं। हैग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड ने एक बड़ी सूचना देते हुए बड़ा खुलासा किया है कि चीन ने भारत के साथ अपनी सीमा पर 680 'जियाओकांग' (समृद्ध या संपन्न गांव) बनाए हैं। ये गांव भारतीय ग्रामीणों को बेहतरीन चीनी जीवन की और प्रभावित करने के लिए हैं।

कृष्ण वर्मा, ग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड के एक सदस्य ने आईएएनएस को बताया, " ये उनकी ओर से खुफिया मुहिम और सुरक्षा अभियान है। वे लोगों को भारत विरोधी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए हम अपने पुलिस कर्मियों को इन प्रयासों के बारे में अभ्यास दे रहे हैं और उन्हें उनकी हरकतों का मुकाबले का सामना करने के लिए सक्षम बना रहे हैं। चीनी सरकार के द्वारा लगभग 680 संपन्न गांव का निर्माण किया जा चुका है। जो चीन और भूटान की सीमाओं पर हैं। इस गांव में चीन के स्थानीय नागरिक भारतीयों को प्रभावित करते है कि चीनी सरकार बहुत अच्छी है। शुक्रवार को भारत सरकार के पूर्व विशेष सचिव वर्मा गुजरात के गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) में 16 परिवीक्षाधीन उप अधीक्षकों (डीवाईएसपी) के लिए 12 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के अवसर पर एक कार्यक्रम में थे।

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बड़े देशों के एक समूह ने 'नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट' की घोषणा की है।(Canva)

विदेशी कोयला बिजली वित्त को रोकने की चीन की घोषणा के बाद, श्रीलंका, चिली, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, मोंटेनेग्रो और यूके जैसे देशों के एक समूह ने 'नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट' की घोषणा की है। इसका उद्देश्य अन्य सभी देशों को नए कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों के निर्माण को रोकने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य तक पहुंचा जा सके। पहली बार, विकसित और विकासशील देशों का एक विविध समूह नए कोयले से चलने वाले बिजली उत्पादन को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों को गति देने के लिए एक साथ आया है। उनकी नई पहल के लिए हस्ताक्षरकर्ताओं को वर्ष के अंत तक कोयले से चलने वाली बिजली उत्पादन परियोजनाओं के नए निर्माण की अनुमति तुरंत बंद करने और समाप्त करने की आवश्यकता है।

ये देश अन्य सभी सरकारों से इन कदमों को उठाने और संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन सीओपी26 से पहले समझौते में शामिल होने का आह्वान कर रहे हैं ताकि शिखर सम्मेलन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को "इतिहास को कोयले की शक्ति सौंपने" में मदद मिल सके। नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के आह्वान का जवाब देता है कि इस साल नए कोयले से चलने वाली बिजली का निर्माण समाप्त करने के लिए, 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य को पहुंच के भीतर रखने और जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों से बचने के लिए पहला कदम है। साथ ही सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए सतत विकास लक्ष्य 7 को प्राप्त करना है।

एनर्जी कॉम्पैक्ट्स जीवित दस्तावेज हैं और अन्य देशों को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। समूह का लक्ष्य जल्द से जल्द नए हस्ताक्षरकर्ताओं की सबसे बड़ी संख्या को इकट्ठा करना है। ऊर्जा पर संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय वार्ता 40 वर्षो में पहली बार ऊर्जा पर चर्चा करने वाला एक महासचिव के नेतृत्व वाला शिखर सम्मेलन है। यह जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ कोविड रिकवरी प्रक्रियाओं सहित विकास प्राथमिकताओं को पहचानता है। श्रीलंका और चिली ने हाल ही में नई कोयला परियोजनाओं को रद्द करने और राजनीतिक बयान देने में नेतृत्व दिखाया है कि वे अब नई कोयला शक्ति का पीछा नहीं करेंगे। डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, मोंटेनेग्रो और यूके ने अपनी पिछली कोयला परियोजनाओं को पहले ही रद्द कर दिया है और अब वे अपने शेष कोयला बिजली उत्पादन की सेवानिवृत्ति में तेजी लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

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भारत के प्रधानमंत्रियों नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के स्कॉट मॉरिसन और जापान के योशीहिदे सुगा और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन।(VOA)

क्वाड देशों के नेताओं- अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत ने आतंकवादी परदे के पीछे के इस्तेमाल की निंदा की है और सहयोग के खासकर प्रौद्योगिकी नए क्षेत्रों की शुरूआत करते हुए में आतंकवाद के समर्थन को समाप्त करने की मांग की है। भारत के प्रधानमंत्रियों नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के स्कॉट मॉरिसन और जापान के योशीहिदे सुगा और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा शुक्रवार को उनके शिखर सम्मेलन के बाद अपनाए गए एक संयुक्त बयान में कहा गया है, "हम आतंकवादी प्रॉक्सी के उपयोग की निंदा करते हैं और किसी भी लॉजिस्टिकल से इनकार करने के महत्व पर जोर देते हैं। आतंकवादी समूहों को वित्तीय या सैन्य सहायता, जिसका उपयोग सीमा पार हमलों सहित आतंकवादी हमलों को शुरू करने या योजना बनाने के लिए किया जा सकता है।"

बयान का वह खंड पाकिस्तान पर लागू होता है, भले ही उसका नाम नहीं लिया गया और दूसरा, चीन का उल्लेख किए बिना, इस क्षेत्र में हिमालय से लेकर प्रशांत महासागर तक अपने कार्यों पर ध्यान दिया। नेताओं ने कहा, "एक साथ, हम स्वतंत्र, खुले, नियम-आधारित आदेश को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय कानून में निहित है और जबरदस्ती के बिना, हिंद-प्रशांत और उसके बाहर सुरक्षा और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए है। हम कानून के शासन, नेविगेशन की स्वतंत्रता के लिए और ओवरफ्लाइट, विवादों का शांतिपूर्ण समाधान, लोकतांत्रिक मूल्य और राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता के लिए खड़े हैं।"

हालांकि, उनके संयुक्त बयान में कोई विशिष्ट संयुक्त रक्षा या सुरक्षा उपाय सामने नहीं आए। इसके बजाय इसने कहा, "हम यह भी मानते हैं कि हमारा साझा भविष्य हिंद-प्रशांत में लिखा जाएगा और हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयासों को दोगुना करेंगे कि क्वाड क्षेत्रीय शांति, स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि के लिए एक ताकत है।" एक अनौपचारिक समूह के रूप में स्थायीता लाने के लिए, चारों वरिष्ठ अधिकारियों के नियमित सत्रों के अलावा वार्षिक शिखर सम्मेलन और विदेश मंत्रियों की बैठकें आयोजित करने पर सहमत हुए। नेताओं ने कहा कि वे अफगानिस्तान के प्रति राजनयिक, आर्थिक और मानवाधिकार नीतियों का समन्वय करेंगे और आतंकवाद और मानवीय सहयोग को गहरा करेंगे।

क्वाड नेताओं द्वारा प्रस्तावित अधिकांश परिभाषित कार्य क्षेत्र में सहयोग और खुद को और दूसरों की मदद करने के बारे में हैं। महामारी की वर्तमान चुनौती को सबसे आगे लेते हुए, घोषणा में कहा गया है, "कोविड -19 प्रतिक्रिया और राहत पर हमारी साझेदारी क्वाड के लिए एक ऐतिहासिक नया फोकस है।" उन्होंने नई दिल्ली द्वारा वैक्सीन निर्यात को फिर से शुरू करने और 2022 के अंत तक कम से कम एक अरब सुरक्षित और प्रभावी कोविड खुराक का उत्पादन करने वाली भारतीय कंपनी बायोलॉजिकल ई का स्वागत किया, जिसे क्वाड निवेश के माध्यम से वित्तपोषित किया गया था। भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा कि वैक्सीन जॉनसन एंड जॉनसन टाइप की होगी, जिसके लिए केवल एक शॉट की आवश्यकता होती है।

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