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ओपिनियन

Jamsetji Tata Death Anniversary 2021: “भारतीय उद्योग के जनक”

जमशेदजी टाटा जिनका पूरा नाम जमशेदजी नसरवानजी टाटा, एक भारतीय उद्योगपति थे, जिन्होंने भारत की सबसे बड़ी कंपनी टाटा समूह की स्थापना की थी।

आज पूरा भारत जमशेदजी टाटा की भारत के महान सपूतों में से एक मानता है। (Wikimedia Commons)

जमशेदजी टाटा (Jamsetji Tata) जिनका पूरा नाम जमशेदजी नसरवानजी टाटा, एक भारतीय उद्योगपति थे, जिन्होंने भारत की सबसे बड़ी कंपनी टाटा (TATA) समूह की स्थापना की थी। जमशेदजी टाटा को भारतीय उद्योग का जनक भी कहा जाता है। जमशेदजी मात्र एक उद्यमी नहीं थे, वह एक ऐसे देशभक्त थे, जिनके आदर्शों और दूरदर्शिता ने साधारण व्यापारिक समूह को एक बहुत बड़ा आकार दिया था। जमशेदजी ने औद्योगिक देशों की लीग में भारत को अपनी एक अलग पहचान दिलाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और अपने औद्योगिक और परोपकारी गतिविधियों के माध्यम से भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इन महापुरुष का आज ही के दिन यानी 19 मई 1904 को निधन हो गया था। 

जमशेदजी टाटा शुरुआत से ही एक साहसी और महत्वाकांक्षी युवक थे। देशभक्ति की भावना इनमें कूट – कूट कर भरी थी। उनका जन्म 3 मार्च 1839 में गुजरात (Gujrat) के नवसारी शहर में हुआ था। एक पारसी परिवार में जन्मे जमशेदजी, नसरवानजी टाटा के पहले संतान थे। 1858 में बॉम्बे से स्नातक डिग्री प्राप्त करने के बाद, वह अपने पिता के साथ निर्यात – व्यापारिक फर्म में शामिल हो गए थे और 1868 में उन्होंने अपनी एक व्यापारिक कंपनी की स्थापना की, जिसे आज पूरा विश्व टाटा समूह के नाम से जानता है। 


जमशेदजी टाटा की चार प्रमुख उपलब्धियां!

1.स्टील उत्पादक इकाइयों की स्थापना।

2.जल विद्युत ( हाइड्रो इलेक्ट्रिक) ऊर्जा का उत्पादन

3.भारतीय विज्ञान संस्थान, जिसकी स्थापना उनकी मृत्यु के बाद 1909 में हुई थी।

4.मुंबई का ताज होटल

ताजमहल पैलेस को तो आज पूरी दुनिया जानती है। इसकी स्थापना जमशेदजी ने 1903 में की थी। (Wikimedia Commons)

1901 में जमशेदजी ने भारत के पहले और बड़े स्तर पर लोहे के कारखानों को शुरू किया था और कुछ सालों के बाद ही इसे टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (Tata Iron and Steel Company) के रूप में शामिल किया गया। आज यह कंपनी भारत में सबसे बड़ी और निजी स्वामित्व वाली स्टील निर्माता कंपनी और कंपनियों के समूह का केंद्र बन गई है। इसके अतिरिक्त ताजमहल (Taj Hotel) पैलेस को तो आज पूरी दुनिया जानती है। इसकी स्थापना जमशेदजी ने 1903 में की थी। जमशेदजी के अन्य व्यापारिक उपक्रमों में ताजमहल पैलेस भी शामिल है, जो आज भारत का सबसे जाना – माना होटल है। 

शिक्षा के क्षेत्र में भी जमशेदजी का काफी योगदान रहा था। जमशेदजी उद्योगपति जरूर थे, लेकिन शिक्षा को लेकर वह हमेशा उत्साहित रहते थे। उनका मानना था कि, देश में उच्च शिक्षा को भी आगे बढ़ाना चाहिए। उनका कहना था कि, अगर भारत को विश्व शक्ति बनना है तो, उसे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कारगर कदम उठाने होंगे।

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रूसी लाला अपनी क़िताब ‘दी लाइफ एंड टाइम्स ऑफ़ जमशेदजी टाटा’ में इस बाबत लिखते हैं “जमशेदजी ने ब्रिटिश सरकार को इस बात के लिए राजी करने का प्रयास किया था कि”, सिविल सर्विसेज की परीक्षा भारत में भी होनी चाहिए। शायद उन्हीं के प्रयासों के तहत आज भारत में बड़े स्तर पर सिविल सर्विसेज (UPSC) की परीक्षा होती है और करोड़ों विद्यार्थी इसमें भाग लेते हैं। उस समय और आज भी टाटा समूह के नाम से बच्चों को छात्रवृत्ति भी दी जाती है। 

आज पूरा भारत जमशेदजी टाटा की भारत के महान सपूतों में से एक मानता है। उन्हीं के प्रयासों के तहत आज टाटा संस का साम्राज्य नमक (TATA Salt) से लेकर चाय (TATA Tea) तक, स्टील से लेकर कंस्ट्राको तक हर जगह नजर आता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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ओला इलेक्ट्रिक के स्कूटर।(IANS)

ओला इलेक्ट्रिक ने घोषणा की है कि कंपनी ने 600 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ओला एस1 स्कूटर बेचे हैं। ओला इलेक्ट्रिक का दावा है कि उसने पहले 24 घंटों में हर सेकेंड में 4 स्कूटर बेचने में कामयाबी हासिल की है। बेचे गए स्कूटरों का मूल्य पूरे 2डब्ल्यू उद्योग द्वारा एक दिन में बेचे जाने वाले मूल्य से अधिक होने का दावा किया जाता है।

कंपनी ने जुलाई में घोषणा की थी कि उसके इलेक्ट्रिक स्कूटर को पहले 24 घंटों के भीतर 100,000 बुकिंग प्राप्त हुए हैं, जो कि एक बहुत बड़ी सफलता है। 24 घंटे में इतनी ज्यादा बुकिंग मिलना चमत्कार से कम नहीं है। इसकी डिलीवरी अक्टूबर 2021 से शुरू होगी और खरीदारों को खरीद के 72 घंटों के भीतर अनुमानित डिलीवरी की तारीखों के बारे में सूचित किया जाएगा।

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अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत करते हुए, भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश (IANS)

केबीसी यानि कोन बनेगा करोड़पति भारतीय टेलिविज़न का एक लोकप्रिय धारावाहिक है । यहा पर अक्सर ही कई सेलिब्रिटीज आते रहते है । इसी बीच केबीसी के मंच पर भारत की हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश पहुंचे । केबीसी 13' पर मेजबान अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत करते हुए, भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश 41 साल बाद हॉकी में ओलंपिक पदक जीतने को लेकर बात की। श्रीजेश ने साझा किया कि "हम इस पदक के लिए 41 साल से इंतजार कर रहे थे। साथ उन्होंने ये भी कहा की वो व्यक्तिगत रूप से, मैं 21 साल से हॉकी खेल रहे है। आगे श्रीजेश बोले मैंने साल 2000 में हॉकी खेलना शुरू किया था और तब से, मैं यह सुनकर बड़ा हुआ हूं कि हॉकी में बड़ा मुकाम हासिल किया, हॉकी में 8 गोल्ड मेडल मिले। इसलिए, हमने खेल के पीछे के इतिहास के कारण खेलना शुरू किया था। उसके बाद हॉकी एस्ट्रो टर्फ पर खेली गई, खेल बदल दिया गया और फिर हमारा पतन शुरू हो गया।"

जब अभिनेता अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ के बारे में अधिक पूछा, तो उन्होंने खुल के बताया।"इस पर अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ पर खेलते समय कठिनाई के स्तर को समझने की कोशिश की। इसे समझाते हुए श्रीजेश कहते हैं कि "हां, बहुत कुछ, क्योंकि एस्ट्रो टर्फ एक कृत्रिम घास है जिसमें हम पानी डालते हैं और खेलते हैं। प्राकृतिक घास पर खेलना खेल शैली से बिल्कुल अलग है। "

इस घास के बारे में आगे कहते हुए श्रीजेश ने यह भी कहा कि "पहले सभी खिलाड़ी केवल घास के मैदान पर खेलते थे, उस पर प्रशिक्षण लेते थे और यहां तक कि घास के मैदान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेलते थे। आजकल यह हो गया है कि बच्चे घास के मैदान पर खेलना शुरू करते हैं और बाद में एस्ट्रो टर्फ पर हॉकी खेलनी पड़ती है। जिसके कारण बहुत समय लगता है। यहा पर एस्ट्रो टर्फ पर खेलने के लिए एक अलग तरह का प्रशिक्षण होता है, साथ ही इस्तेमाल की जाने वाली हॉकी स्टिक भी अलग होती है।" सब कुछ बदल जाता है ।

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