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देश

देश में खुले 40.35 करोड़ जनधन खाते, पीएम मोदी ने योजना को बताया गेम चेंजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "प्रधानमंत्री जन धन योजना की बदौलत कई परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो पाया है।"

लाल किले के प्राचीर से देश को सम्बोधित करते प्रधानमंत्री मोदी। (PIB)

 प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरूआत को छह साल पूरे हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना को गेम चेंजर करार दिया है। उन्होंने शुक्रवार को छठी वर्षगांठ पर इस योजना की उपलब्धियों से जुड़े आंकड़े भी जारी किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज, छह साल पहले, प्रधानमंत्री जनधन योजना को बैंकिंग के महत्वाकांक्षी उद्देश्य के साथ शुरू किया गया था। यह पहल एक गेम चेंजर रही है, जो कई गरीबी उन्मूलन पहलों के लिए आधार के रूप में काम करती है, जिससे करोड़ों लोगों को लाभ होता है।”

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उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री जन धन योजना की बदौलत कई परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो गया है। लाभार्थियों का एक उच्च अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों से है, जिसमें महिलाएं हैं। मैं उन सभी लोगों की सराहना करता हूं, जिन्होंने प्रधानमंत्री जनधन योजना को सफल बनाने के लिए अथक परिश्रम किया है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना महामारी पर चर्चा करते हुए। (Wikimedia Commons)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना की उपलब्धियां बताने के लिए ट्वीट कर योजना से जुड़े आंकड़ों का चार्ट भी जारी किया है। जिसके मुताबिक, अगस्त 2020 तक देश में कुल 40.35 करोड़ खाते खुल चुके हैं, जबकि पिछले साल अगस्त 2019 तक यह आंकड़ा 36.79 करोड़ था। 63 प्रतिशत बैंक खाते गांवों में खुले हैं। सर्वाधिक 55.2 प्रतिशत खाते महिलाओं के हैं। इस योजना के तहत दो लाख रुपये की निशुल्क दुर्घटना बीमा के साथ डेबिट कार्ड भी जारी किए गए हैं।(आईएएनएस)

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बांके बिहारी मंदिर में होली

कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को सुकून चाहिए होता है तो उसे वृंदावन या मथुरा की गलियों में जाना चाहिए, क्योंकि इन्ही गलियों में खेलते हुए कृष्ण जी का बचपन बीता हैं। वृंदावन हो या मथुरा यहां हर दूसरा व्यक्ति कृष्ण भक्ति में लीन नज़र आता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तानी है या कहीं और से आया है। हर कोई कृष्ण की महिमा में डूबा हुआ होता है। वैसे तो वृंदावन में कई मंदिर है जहां हर रोज हज़ारों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी हाजिरी लगवाते हैं, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की बात अलग है। यहां भी भक्तों का मेला लगा रहता है, पर हर किसी को कुछ बातें मालूम नहीं है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

1) बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी श्री हरिदास जी ने की थी। वह श्री कृष्ण के भक्त थे और महान गायक तानसेन के गुरु थे। वह अपने गीत से श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि श्री हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न हो श्री कृष्ण ने दर्शन दिए थे।

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(instagram , virat kohali)

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और अनुष्का

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और उनके फाउंडेशन ने यहां मड, मलाड में आवारा पशुओं के लिए एक ट्रॉमा और रिहेब सेंटर का उद्घाटन किया है। इसके पहले इस साल की शुरूआत में, भारतीय कप्तान कोहली ने कहा था कि वह मुंबई में दो पशु देखभाल सुविधाएं स्थापित कर रहे हैं।
कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को शहर में आवारा जानवरों के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखने का श्रेय दिया।

अभिनेत्री अनुष्का ने कई मौकों पर जानवरों के कल्याण और उनके अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दिया है। अनुष्का के जानवरों के प्रति दीवानगी से प्रेरित होकर कोहली अपने फाउंडेशन के जरिए आवारा जानवरों की मदद करने के मौके तलाश रहे हैं।

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भीड़ में चलते लोग।

मौजूदा समय में विश्व की जनसंख्या 7 अरब से भी ज्यादा है। इस जनसंख्या को यहां तक पहुंचने में कई सदियां लग गई है। समस्त विश्व को 1 अरब से 2 अरब तक की आबादी होने में 100 सालों का समय लगा था। लेकिन 2 अरब से 3 अरब होने में मात्र 30 साल लगे, वहीं 3 से 4 अरब होने में 15 साल लगे थे। उसके बाद से यह अंतर और कम हो गया। औद्योगिक क्रांति के बाद अठारहवीं शताब्दी में विश्व जनसंख्या में विस्फोट हुआ था। तकनिकी प्रगति की वजह से मृत्यु दर में गिरावट आई जो कि जनसंख्या विस्फोट का एक बहुत बड़ा कारण बना। भारत में भी जनसंख्या विस्फोट देखा गया था।

1951 में भारत की जनसंख्या मात्र 36.1 करोड़ थी जो 2011 की जनगणना में 121.02 करोड़ हो गई। और अब यह लगभग 135 करोड़ के ऊपर है। अगर किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती है तो उसका मतलब है कि वहाँ का मृत्यु दर कम है और जन्म दर ज्यादा। यह दर्शाता है कि उस जगह पर चिकित्सकीय सुविधाएं अच्छी है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या देश के लिए मुसीबत का सबब भी बन सकती है, क्योंकि जनसंख्या में वृद्धि हुई है किन्तु साधनों में नहीं। भारत के साथ भी यही समस्या है। लगातार जनसंख्या बढ़ने से कई जगहों पर साधनों की कमी महसूस होने लगी है।

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