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मनोरंजन

“कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया..” के सदाबहार गायक जसपाल सिंह की कहानी

1969 में आई फिल्म, बंदिश का गाना “देखो लोगों ये कैसा ज़माना” गा कर उन्होने आधिकारिक तौर पर बॉलीवुड मे एंट्री ले ली

Jaspal Singh, Singer(Picture Source: RajyaSabha TV)

“कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया” इस गाने को किसने नहीं सुना होगा। अगर आप 80’ के दशक से हैं तो ये गाना गुनगुनाते हुए आपने अनगिनत शाम बिताए होंगे। और अगर आप नयी पीढ़ी के हैं, तो इसमे कोई दो राय नहीं है की आपने अपने माता पिता को इसे सैकड़ों बार गुनगुनाते हुए सुना होगा।

इस गाने को स्वर देने वाली मधुर आवाज़ जिस इंसान की है उसका नाम है जसपाल सिंह। अमृतसर की गलियों से उठ कर बॉलीवुड में नाम बनाने वाले उस व्यक्ति के गाने आज 35-40 साल बाद भी लोगों के ज़ुबान से नहीं उतरते हैं। उस जसपाल सिंह के शून्य से शिखर तक की कहानी आज हम आपके सामने ले कर आए हैं।


अमृतसर से अपने जीवन की शुरुवात करने वाले जसपाल सिंह को बचपन से ही गाने का शौक हुआ करता था, और इस शौक को वो अपना पेशा बनाना चाहते थे। वो दौर ऐसा था जब गायन के क्षेत्र में मौका मिलना बहुत ही मुश्किल था, लेकिन बड़े सपने देखने वाले जसपाल सिंह ने बचपन से ही फिल्मों में गाना गाने को अपना लक्ष्य बना लिया था।

मोहम्मद रफ़ी के गानों के दीवाने रहे जसपाल सिंह 1968 मे अपनी बहन के पास मुंबई चले गए थे। राज्यसभा टीवी को दिये गए एक इंटरव्यू मे जसपाल सिंह अपनी बहन के बारे मे बताते हैं की शादी के बाद मुंबई मे रह रही उनकी बहन, हमेशा से उनके दिल की बात समझती थी। इसी कारण जब वो मुंबई पहुंचे तो बिन बताए उनकी बहन,उनके मुंबई आने के मकसद को समझ गयी थी।

जसपल सिंह बताते हैं की उनके बहन के कहने पर उनके जीजाजी ने उन्हे संगीत निर्देशक उषा खन्ना से मिलवाया। उषा खन्ना को उनकी मधुर आवाज़ बहुत रास आई, जिसकी वजह से उन्हे अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन का मौका मिल गया। 1969 में आई फिल्म, बंदिश का गाना “देखो लोगों ये कैसा ज़माना” गा कर उन्होने आधिकारिक तौर पर बॉलीवुड मे एंट्री ले ली। इस मौके के बाद आत्मविश्वास से भरे हुए जसपाल सिंह को उषा खन्ना के ज़रिया और कई लोगों से मिलने का मौका मिलता रहा।

हालांकि फिल्म ‘बंदिश’ फ़्लॉप हो जाने के कारण, गाना ज़्यादा चल नहीं पाया, क्यूंकी ये अक्सर देखा जाता रहा है, की फिल्म फ़्लॉप हो तो गाने ज़्यादा चल नहीं पाते और फिल्म हिट हो तो गाने भी ज़्यादा सुने जाते हैं। लेकिन एक नाकामयाबी से ज़िंदगी खत्म नहीं होती। सिलसिला चलता रहता है। 
इसी दौर मे उन्हे गायक महेंद्र कपूर से मिलने का मौका मिला। बक़ौल जसपाल सिंह, महेंद्र कपूर से भी उन्हे लगातार मदद मिलती रही। 

जसपाल सिंह अपने जीवन के एक दौर को याद करते हुए बताते हैं की, गायकी के शौक और उनकी ज़िद को देखते हुए उनके पिता को चिंता होने लगी थी, जिस वजह से उन्होने एक ख़त लिख कर जसपाल सिंह को अमृतसर बुला लिया था। वो आगे बताते हैं की उस ख़त के ज़रिया उन्हे, उनके पिता ने अमृतसर लौट कर अपने होटल के कारोबार को संभालने की ज़िम्मेदारी दे दी थी। जसपाल सिंह उस ख़त को पढ़ते ही रो पड़े थे। 

उस वक़्त भी महेंद्र कपूर ने उन्हे स्मभला और हौसला दिया था। हार न मानने की सलाह देते हुए महेंद्र कपूर ने कहा था की वो एक दिन ज़रूर बड़ा बनेगा। राज्यसभा टीवी को दिये इंटरव्यू मे जसपाल सिंह कहते हैं ना जाने महेंद्र कपूर को उनमें ऐसा क्या दिख गया था, जिसकी वजह से उन्हे उनकी प्रतिभा पर इतना भरोसा था। 

हालांकि, जसपाल सिंह ने पिता के होटल कारोबार को संभालने के प्रस्ताव को नकार दिया। जसपाल सिंह कई दिनों तक मुंबई मे अपनी बहन के घर ही रहते थे। उनके पिता को ये बात रास नहीं आई तो उन्होने मुंबई में एक फ्लैट ख़रीद कर अपने बेटे को को दे दिया।

गाज़ियाबाद से वकालत की पढ़ाई करने वाले जसपाल सिंह ने, मुंबई के उस फ्लैट मे रहते हुए, अपनी वकालत की प्रैक्टिस भी शुरू कर दी। लेकिन ऐसा नहीं था का उन्होनें अपने गायकी के लक्ष्य को भुला दिया था। वकालत की प्रैक्टिस के साथ साथ वो अक्सर गायन के क्षेत्र में भी अवसर की तलाश मे लगे रहते थे। और इसी दौरान उनको राजश्री प्रोडक्शन के ज़रिये एक बड़ा मौका मिला। 

उस वक़्त की आने वाली फिल्म ‘गीत गाता चल’ के संगीत निर्देशक रविंदर जैन ने जसपाल सिंह के हुनर को देखते हुए फिल्म का एक गाना, “धरती मेरी माता” गाने का मौका दिया। इस गाने को सुन, रवींद्र जैन ने फिल्म का टाइटल सॉन्ग ‘गीत गाता चल’ भी जसपाल सिंह को ही सौंप दिया था। 

आपको बता दें की जसपल सिंह को इस गाने के लिए चुनने से पहले रवींद्र जैन को बहुत सोच विचार करनी पड़ी थी। फिल्म का टाइटल सॉन्ग होने की वजह से “गीत गाता चल” गाने का महत्व बहुत ज़्यादा था, लेकिन जसपाल सिंह की आवाज़ में इस गाने को सुनने के बाद रवींद्र जैन इतने खुश हुए थे की उन्होने फिल्म के अधिकतम गाने को जसपाल सिंह के ही हवाले कर दिया था। फिल्म रिलीज हुई, और हिट साबित हुई। 1975 मे आई फिल्म का गाना ‘गीत गाता चल’ लोगों की ज़ुबान पर अटक गया। और इस तरह जसपाल सिंह को वो नाम मिला जिसके वो हक़दार थे।

‘गीत गाता चल’ के अलावा जसपाल सिंह ने, “कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया”, “धरती मेरी माता”, “राम सिया राम”, जैसे कई हिट गाने दिये, जिन्हे दुनिया आज भी सुनती है।

राज्यसभा टीवी को दिये इंटरव्यू मे जसपाल सिंह बताते हैं की उन्होने बचपन से लेकर आज तक हर याद को संजोह कर रखा है। चाहे वो स्कूल-कॉलेज के दिनों की तस्वीर हो, गायन के क्षेत्र मे उनके काम पर मीडिया की रिपोर्ट हो, या कोई पेपर की कटिंग हो, 700-800 पन्नो की एक किताब, उनके पूरे इतिहास के गवाह के रूप मे सुरक्षित है। 

Story Source: RajyaSabha Tv

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