Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
संस्कृति

जटोली शिव मंदिर: जहां के पथरों को थपथपाने से आती है “डमरू की आवाज।”

आज हम ऐसे ही एक मंदिर की बात करेंगे जिसे रहस्यमयी या चमत्कारी कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा। तो आइए जानते हैं वह रहस्यमयी मंदिर आखिर कौन सा है?

स्थानीय लोग मानते हैं कि एक बार भगवान शिव अपनी यात्रा के दौरान इस स्थान पर रुके थे। यहीं पर उन्होंने विश्राम किया था। (Wikimedia Commons)

भारत में अनेकों प्राचीन मंदिर हैं और इन मंदिरों से जुड़े कई रहस्यमयी तथ्य भी मौजूद हैं। देश – विदेश में करोड़ों ऐसे मंदिर हैं, जिन्हें लोग चमत्कारी और रहस्यमयी मानते हैं। उन मंदिरों से जुड़ा इतिहास और कहानियां लोगों को अत्यधिक प्रभावित करती हैं। आज हम ऐसे ही एक मंदिर की बात करेंगे जिसे रहस्यमयी या चमत्कारी कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा। तो आइए जानते हैं वह रहस्यमयी मंदिर आखिर कौन सा है?

भारत, हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) जिसे देव भूमि के नाम से भी जाना जाता है, यहां के सोलन में भगवान शिव को समर्पित जटोली शिव मंदिर (Jatoli Shiv Temple) स्थित है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर में मौजूद पथरों को थपथपाने से भगवान शिव के डमरू की आवाज आती है। मान्यता है कि पौराणिक काल में भगवान शिव इस स्थान पर आए थे। स्थानीय लोग मानते हैं कि एक बार भगवान शिव अपनी यात्रा के दौरान इस स्थान पर रुके थे। यहीं पर उन्होंने विश्राम किया था।


कहा जाता है कि कई बरस पहले सोलन के लोगों को पानी की कमी की समस्या से जूझना पड़ रहा था। पानी की भीषण कमी को देखते हुए और लोगों को इस संकट से उबारने के लिए एक बार स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने भगवान शिव की घोर तपस्या की और अपने त्रिशूल से प्रहार कर जमीन से पानी बाहर निकाला। और तब से लेकर आज तक जटोली के लोगों को पानी की कमी का सामना कभी नहीं करना पड़ा।

भगवान शिव को समर्पित जटोली शिव मंदिर का मुख्य द्वार | (Wikimeda Commons)

सन 1950 के दशक में स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने इस मंदिर के निर्माण की आधार शिला रखी थी। हालांकि 1983 में स्वामी कृष्णानंद ने समाधि प्राप्त की, लेकिन उनके बाद भी मंदिर का निर्माण कार्य कभी नहीं रुका। 1974 में ही मंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो गया था। आपको बता दें कि इस मंदिर को पूरी तरह तैयार होने में करीब 39 साल का समय लगा था। इस मंदिर की एक और सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर के निर्माण में देश – विदेश के कई श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य के अनूठे मंदिर के लिए अपना सहयोग दिया और उन्हीं दान के पैसों से ही मंदिर का निर्माण हुआ। इसी वजह से मंदिर के निर्माण में तीन दशक से ज्यादा का समय लगा।

यह भी पढ़ें :- मुरुदेश्वर मंदिर: यहां भगवान शिव को समर्पित दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति विराजमान है।

जटोली शिव मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती सहित हर तरह के देवी – देवताओं की मूर्तियां स्थापित है। मंदिर के गर्भ गृह में स्फटिक मणि से निर्मित शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के कोने में स्वामी कृष्णानंद परमहंस की एक गुफा भी है। इस गुफा में भी एक शिवलिंग स्थापित है। दक्षिण द्रविड़ शैली में बने इस मंदिर की उचाईं 111 फुट है। लेकिन हाल ही में मंदिर ने 11 फीट का एक स्वर्ण कलश चढ़ाया गया है जिसके चलते मंदिर की कुल ऊंचाई 122 फुट हो गई है।

अत्यंत प्राचीन मंदिर होने के बावजूद इस मंदिर का अस्तित्व और उसका पौराणिक महत्व अब भी बना हुआ है। भारत के मंदिर ही उसकी धरोहर हैं और उससे जुड़ी सभी कहानियां, रहस्म्यी तथ्य सभी यथार्थ हैं।

Popular

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, एक श्रेष्ठ वीरांगना को यह देश कोटी – कोटी नमन करता है। (Wikimedia Commons)

भारतीय मध्ययुगीन इतिहास जहां अनेक वीर पुरुषों के वीरतापूर्ण कार्यों से भरा पड़ा है। वहीं स्त्री जाति के वीरतापूर्ण कार्यकलापों से यह अक्सर अछूता रहा है। सर्वत्र नारी को दयनीय, लाचार और मानसिक रूप से दास प्रवृति को ही दिखाया गया है। उस काल में यह गौरव से कम नहीं की रानी लक्ष्मीबाई ने भारतीय नारियों की इस दासतापूर्ण मानसिकता को ध्वस्त कर दिखाया था। इसलिए आज भी रानी लक्ष्मीबाई का नाम गर्व से लिया जाता है। एक ऐसी महिला स्वतंत्रता सेनानी जिन्होंने अंग्रजों से लोहा लिया था| आज उनके द्वारा किए गए संघर्ष सभी भारतीयों के हृदय में एक नवीन उत्साह का संचार कर देता है।

आइए आज उनके द्वारा देश की आन-बान-शान को बचाने के लिए किए गए संघर्ष को याद करें। उस युद्ध की बात करें जब उनकी तलवार ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे और अंग्रजों के रक्त से अपने अस्तित्व को पूरा किया था।

Keep Reading Show less

चंदा बंद सत्याग्रह जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। (File Photo)

सत्याग्रह का सामन्य अर्थ होता है "सत्य का आग्रह।" सर्वप्रथम इसका प्रयोग महात्मा गांधी द्वारा किया गया था। उन्होंने भारत में कई आंदोलन चलाए, जिनमें चंपारण, बारदोली, खेड़ा सत्याग्रह आदि प्रमुख। हैं। सत्याग्रह स्वराज प्राप्त करने और सामाजिक संघर्षों को मिटाने का एक नैतिक और राजनीतिक अस्त्र है। आज हम ऐसे ही एक सत्याग्रह की बात करेंगे जिसे गांधी जी से प्रेणा लेकर शुरू किया गया था।

"चंदा बंद सत्याग्रह" जिसे No List No Donation के नाम से भी जाना जाता है। यह आम आदमी पार्टी के विरुद्ध एक अमरीकी डॉक्टर वह NRI सेल के सह-संयोजक डॉ. मुनीश रायजादा द्वारा साल 2016 में शुरू किया गया था। डॉ. मुनीश जब आम आदमी पार्टी से जुड़े थे, तब उन्हें पार्टी के NRI सेल का सह-संयोजक नियुक्त किया गया था।

Keep Reading Show less

आपको बता दें कि मालाबार (केरल में स्थित है) हिन्दू नरसंहार को इतिहास से पूरी तरह मिटा दिया गया।

मोपला हिंदु नरसंहार या मालाबार विद्रोह 100 साल पहले 20 अगस्त 1921 को शुरू हुई एक ऐसी घटना थी, जिसमें निर्दयतापूर्वक सैकड़ों हिन्दू महिला, पुरुष और बच्चों की हत्या कर दी गई थी। महिलाओं का बलात्कार किया गया था। बड़े पैमाने पर हिन्दुओं को जबरन इस्लाम धर्म में परिवर्तित करा दिया गया था।

आपको बता दें कि मालाबार (केरल में स्थित है) हिन्दू नरसंहार को इतिहास से पूरी तरह मिटा दिया गया। आज हम मोपला हिन्दू नरसंहार, 1921 में हिन्दुओं के साथ हुई उसी दर्दनाक घटना की बात करेंगे। आपको बताएंगे की कैसे मोपला हिन्दू नरसंहार (Mopla Hindu Genocide) के खलनायकों को अंग्रेजों से लोहा लेने वाले नायकों के रूप में चिन्हित कर दिया गया।

Keep reading... Show less