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दुनिया

भारत में हाई टेक्नोलॉजी की आरटी-पीआर किट बनाई जा सकती है : जीनस्टोर फ्रांस

देश में कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण लॉकडाउन कर दिया गया था, तब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह दावा किया था कि कोरोना को फैलने से रोकने का एकमात्र उपाय केवल लोगों के ज्यादा से ज्यादा टेस्ट करना है।

बीते साल मार्च में पूरे जब देश में कोरोना महामारी (Coronavirus) के प्रकोप के कारण लॉकडाउन कर दिया गया था, तब विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने यह दावा किया था कि कोरोना को फैलने से रोकने का एकमात्र उपाय केवल लोगों के ज्यादा से ज्यादा टेस्ट करना है। इसी मोड़ पर भारतीय (Indian) संस्थापक अनुभव अनुषा (Anhbhav Anusha) के नेतृत्व में और उनके द्वारा स्थापित फ्रेंच मल्टी नेशनल कंपनी-जीनस्टोर फ्रांस (Jinstore France) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) के टेस्ट के लिए सबसे किफायती कोरोना वायरस टेस्टिंग किट (Testing Kit) केवल 199 रुपये में लॉन्च की थी। सबसे खास बात यह है कि इस टेस्टिंग किट को फ्रांस (France) सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर (ICMR) से हरी झंडी मिल चुकी है।


जीनस्टोर फ्रांस (Jinstore France) के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने किफायती टेस्टिंग किट बनाने का फैसला इसलिए किया क्योंकि ज्यादा से ज्यादा लोग कोरोना का अपना टेस्ट करा सकें और इस बीमारी के और फैलने से पहले इस पर कंट्रोल किया जा सके। इससे पहले की कोरोना टेस्टिंग किट काफी महंगी थी, जो आम लोगों की पहुंच से बाहर थी। इससे आम जनता के सभी वर्ग के लोग टेस्ट नहीं करवा सकते थे।

भारत (India) में कोरोना वायरस की टेस्टिंग के लिए जीनस्टोर फ्रांस (Jinstore France) की ‘डिटेक्टशन एक्सपर्ट आरटी-पीसीआर किट’ की लॉन्चिंग से पहले दुनिया भर में डायग्नोटिक्स इंडस्ट्री (Dignostic Industry) पर प्रमुख रूप से उत्तरी अमेरिका (North America) और यूरोप (Europe) की बड़ी कंपनियों का नियंत्रण था। इसके अलावा कोरोना महामारी फैलने के शुरूआती दिनों में भारत में आरटी-पीसीआर किट की रिटेल मार्केट में बिक्री 500 रुपये से 1000 रुपये तक की कीमत में की गई थी।

कोरोना को फैलने से रोकने का एकमात्र उपाय केवल लोगों के ज्यादा से ज्यादा टेस्ट करना है। (सांकेतिक चित्र , Unsplash) 

एक कंपनी के रूप में जीनस्टोर फ्रांस (Jinstore France) को एक प्रमुख चुनौती का सामना करना पड़ा। कंपनी को भारत (India) में बेहतरीन गुणवत्ता की टेस्टिंग किट सप्लाई करने वाली प्रमुख लैब्स के सामने अपनी टेस्टिंग किट का प्रदर्शन करना पड़ा और उन्हें यह बताना पड़ा कि बेहतरीन क्वॉलिटी की टेस्टिंग किट की आपूर्ति जीन स्टोर की किफायती दाम में मिल रही आरटी-पीसीआर किट से ही संभव है।

कंपनी की टेस्टिंग किट ने हालांकि इन लैब्स की कड़े गुणवत्ता मानकों का टेस्ट आसानी से पूरा कर लिया, जिसमें से बहुत सी लैब को सीएपी (कॉलेज ऑफ अमेरिकन पैथोलॉजी) से मान्यता मिली थी। जीन स्टोर के पास यूरोप (Europe) और भारत (India) में सभी कच्चे माल के लिए एक पूरा मैन्युफैक्च रिंग सेटअप था। इसी के चलते कंपनी को किफायती दाम की टेस्टिंग किट बनाने का पूरा फायदा उपभोक्ताओं को देने की इजाजत मिली।

भारत की सबसे बड़ी डायग्नोस्टिक टेस्टिंग कंपनी (dignostic Testing Company) के लिए मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (Moleculer Biology) और एचएलए के हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. वाई.पी. सिंह ने कहा, “मेरी लैब ने लॉन्चिंग के बाद कोरोना वायरस की टेस्टिंग के लिए जेनस्टोर की आरटी-पीसीआर किट का इस्तेमाल किया । मैं इस टेस्टिंग किट की बेहतरीन क्वॉलिटी और परफॉर्मेस से बेहद खुश हूं।”

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जीनस्टोर के आत्मनिर्भर (Atmanirbhar) और मेक इन इंडिया (Make In India) की पहल के बाद इस क्षेत्र में हुई व्यापक उन्नति से कंपनी को भारत में कोरोना टेस्टिंग किट के 40 फीसदी मार्केट पर 60 दिनों की अवधि में कब्जा करने में सफलता मिली। इसके अलावा जीनस्टोर को आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया (Make In India) के परिपेक्ष्य में एक महत्वपूर्ण तथ्य को साबित करने में सफलता मिली कि यूरोपीय गुणवत्ता मानकों के साथ भारत में किफायती दाम पर हाई टेक्नोलॉजी की आरटी-पीआर किट बनाई जा सकती है, जिसे भारत में काफी कम दाम पर लोग खरीदकर उसका प्रयोग कर सकते हैं। (आईएएनएस-SM)
 

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आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में भारत की दिया कुमारी ने रखा भारत का पक्ष।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

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इस दौरान सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि जहां सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) अवसरों के नए रास्ते खोलती है, वहीं वे बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार सहित चुनौतियों, खतरों और हिंसा के नए रूपों को भी जन्म देती हैं। भारत में ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से निपटने के लिए कड़े उपाय हैं।

सांसद दीया ने कहा कि भारत ने वर्ष 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बनाया था और समय-समय पर इसमें संशोधन किया है। यह अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित करने और प्रसारित करने पर रोक लगाता है और अधिनियम के विभिन्न वर्गों में उल्लंघन के लिए दंडात्मक प्रावधान भी निर्धारित करता है। उन्होंने आईटी इंटरमीडियरीज गाइडलाइंस रूल्स, 2011 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट पर भी विचार व्यक्त किये। भारतीय दल ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान और उनका सख्ती से क्रियान्वयन ही काफी नहीं है, ऑनलाइन यौन शोषण से बच्चों को बचाने के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता है।

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली में भारत का दल।(IANS)

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भारत ने रूस और चीन से कहा कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।(IANS)

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हालांकि, मानवीय पहल में रुकावट आ गई थी, क्योंकि बुधवार तक पाकिस्तान इस खेप को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं था। जयशंकर ने आज कहा, "RIC देशों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट और राजनीतिकरण के अफगान लोगों तक पहुंचे। एक निकट पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साथी के रूप में, भारत उस देश में हाल के घटनाक्रमों, विशेष रूप से अफगान लोगों की पीड़ा के बारे में चिंतित है।"

तीनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आरआईसी देशों के बीच सहयोग न केवल उनके अपने विकास में बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा, स्थिरता में भी योगदान देगा। जयशंकर ने अपने संबोधन में, आरआईसी तंत्र के तहत यूरेशियन क्षेत्र के तीन सबसे बड़े देशों के बीच घनिष्ठ संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और राजनीति आदि क्षेत्रों में हमारा सहयोग वैश्विक विकास, शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।"

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दक्षिण अफ्रीका(South Africa) में इस वैरिएंट के अब 100 मामले सामने आए हैं और अब यह धीरे-धीरे तेज़ी से फैलता जा रहा है।

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