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थोड़ा हट के

महिलाओं का गहना अब कमजोरी नहीं, हथियार बनेगा

अगर कोई महिला मुसीबत में होती है, ज्वेलरी में लगे बटन को दबाने से उसकी लोकेशन पुलिस और घरवालों के नम्बर पर चली जाएगी। जिससे सामने वाली की रक्षा हो पाए।

वाराणसी के युवा वैज्ञानिक ने बनाया एक ऐसा आभूषण जिससे महिलाओं की सुरक्षा होगी। (सांकेतिक चित्र, Pixabay)

By: विवेक त्रिपाठी

महिलाओं का गहना अब केवल उनकी खूबसूरती में चार चांद ही नहीं लगाएगा, बल्कि उनकी सुरक्षा का बड़ा हथियार साबित होगा। गहनों की सुरक्षा से जुड़ा डर भी खत्म हो जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में महिला सुरक्षा को लेकर खास तरह की डिवाइस तैयार की गयी है। जो महिलाओं के आभूषणों में लगाई जाएगी और यह डिवाइस उनके गहने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा करेगी। महिलाओं के साथ हो रही छेड़खानी और अन्य घटनाओं को रोकने के लिए वाराणसी के श्याम चौरसिया ने दिल्ली की रचना राजेंद्रन के साथ मिलकर वुमेन्स सेफ्टी ज्वेलरी तैयार की है।


रचना राजेंद्रन ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि, “देश में बढ़ती महिलाओं संग छेड़खानी व दुष्कर्म जैसी घटनाओं को रोकने के लिए इसे खासतौर पर तैयार किया गया है। इस डिवाइस को ज्वेलरी में लगाकर ब्लूटूथ से अटैच किया जाएगा। अगर कोई महिला मुसीबत में होती है, ज्वेलरी में लगे बटन को दबाने से उसकी लोकेशन पुलिस और घरवालों के नम्बर पर चली जाएगी। जिससे सामने वाली की रक्षा हो पाए।”

उन्होंने बताया कि इसकी एक खसियत और भी है कि, “मोबाइल की स्क्रीन लॉक और बटुए के अंदर होने पर भी यह अच्छे से काम करता है। यदि कोई आपके गहने छीनता है, तुरंत ये लोकेशन बता देगा। यह बहुत आसान गैजेट है, इसे प्रयोग करने में बहुत आसनी होगी।”

रचना राजेंद्रन (सोशल मीडिया)

युवा वैज्ञानिक श्याम चौरसिया ने बताया कि, “अक्सर देर रात्रि में काम करने वाली महिलाएं जब कभी मुसीबत में फंस जाती हैं, तो छेड़खानी करने वाले उनका मोबाइल और बटुआ छीन लेते हैं। लेकिन ज्वेलरी में लगी डिवाइस को दबाने से यह ब्लूटूथ काम करने लगेगा। इसकी रेंज 3 से 5 मीटर के अन्तर्गत काम करती है। यह महिला की रक्षा के साथ उनके आभूषणों की भी रक्षा करेगा। स्पेस ब्रेक होंने पर भी यह अच्छे से काम करता है। इसमें ब्लूटूथ मॉडयूल और चार्जेबल बैटरी है। जो 10 घंटे तक चलता है। इस ज्वेलरी का नाम विमेंस सेफ्टी एंटी टीजिंग ज्वेलरी रखा गया है। इसे बनाने में 2-3 माह का समय लगा है और करीब 900 रूपये का खर्च आया है। यह पूर्णतया मेड इन इंडिया है।”

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वीरबहादुर सिंह नक्षत्रशाला, गोरखपुर वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय ने बताया कि, “यह अच्छा गैजेट है। महिला सुरक्षा के लिए कारगर साबित हो सकता है। इस तकनीक को सरकार द्वारा भी ट्रायल किया जाना चाहिए।”

बीएचयू के प्रोफेसर और इनोवेशन सेंटर के कोऑर्डिनेटर मनीष अरोरा ने कहा कि, “यह प्रयास अच्छा है। इसे सफलता जब मिलेगी, जब आप किसी इंडस्ट्री के साथ मिलकर इस पर काम करें। इस समय बड़े-बड़े कॉरपोरेट ज्वेलर्स हैं, उनसे संपर्क करने पर फायदा मिल सकता है। इनोवेशन है, ज्वेलरी में ब्लूटूथ डिवाइस लगा हुआ है। कहीं मुसीबत होंने पर बटन दबाने पर उनके संबंधियों के पास अलर्ट पहुंच जाता है। इसके पीछे अच्छी सोच है। लेकिन इसे बजार तक पहुंचाना बहुत जरूरी है।”(आईएएनएस)

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रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है। (Pixabay)

एप्पल (Apple) कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस, एक आईफोन, एयरपोड्स और वॉच को पावर दे सकता है।

मैकरियूमर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 'पावर ऑन' न्यूजलेटर के लेटेस्ट एडीशन में मार्क गुरमन ने कंपनी की भविष्य की वायरलेस चाजिर्ंग तकनीक के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारी का खुलासा किया।

उन्होंने लिखा, "मेरा यह भी मानना है कि एप्पल (Apple) छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है और यह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां एप्पल के सभी प्रमुख उपकरण एक-दूसरे को चार्ज कर सकते हैं। कल्पना कीजिए कि एक आईपैड एक आईफोन चार्ज कर रहा है और फिर वह आईफोन एयरपोड्स या एक एप्पल घड़ी चार्ज कर रहा है।"

apple , wireless charger, Iphone, iPod Chargers एप्पल कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस को पावर दे सकता है। [Wikimedia Commons]

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टाटा स्टील (Tata Steel) के आयरन ओर एंड क्वेरीज डिविजन के महाप्रबंधक ए. के. भटनागर ने पत्रकारों को बताया कि नोआमुंडी स्थित कंपनी की आयरन ओर माइन्स में सभी शिफ्टों के लिए 30 सदस्यों वाली महिलाओं की टीम की तैनाती की जा रही है। खदान को स्वतंत्र रूप से महिलाओं के हाथों संचालित करने का यह टास्क कंपनी ने महिला सशक्तीकरण की परियोजना तेजस्विनी-2.0 के तहत लिया था और अब इसे सफलतापूर्वक लागू करने की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।

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