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दुनिया

जो बिडेन ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2020 के लिए नामांकन स्वीकार कर लिया है

जो बाइडेन ने अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव के लिए डेमोकेट्रिक पार्टी की तरफ से नामांकन को स्वीकार कर लिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2020 (Pixabay)

अमेरिका के पूर्व उप राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 3 नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव के लिए डेमोकेट्रिक पार्टी की तरफ से नामांकन को स्वीकार कर लिया है। एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार रात को चार-दिवसीय डेमोक्रेटिक नेशनल कंवेन्शन के अंतिम दिन उन्होंने अपना स्वीकृति भाषण प्रस्तुत किया।

अपने होमटाउन डेलावेयर के विलमिंगटन में आयोजित इस समारोह में 77 वर्षीय बाइडेन ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन को स्वीकार करना एक बहुत बड़े सम्मान और विनम्रता की बात है।”


अमेरिका के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार, जो बाइडेन । ( Wikimedia Commons)

उन्होंने आगे कहा, “यह अब हम सभी के साथआने व कोई भी गलती न करने का वक्त है। साथ में मिलकर हम अमेरिका में छाए इस मुसीबत की घड़ी से विजय प्राप्त करेंगे। हम डर पर उम्मीद, कल्पनाओं पर तथ्यों और सुविधा पर सटीकता का चुनाव करेंगे।”

यह भी पढ़ें- उप-राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार के रूप में नामित होकर, कमला हैरिस ने रचा इतिहास

अपनी बात को जारी रखते हुए वह आगे कहते हैं, “मैं एक स्वाभिमानी डेमोक्रेट हूं और आम चुनाव में अपने पार्टी के बैनर को आगे ले जाना मेरे लिए गर्व की बात है, लेकिन भले ही मैं एक डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हूं, बनूंगा मैं अमेरिकी राष्ट्रपति ही। जो मेरे लिए मतदान करेंगे, मैं उनके लिए कड़ी मेहनत करूंगा और साथ ही उनके लिए भी ऐसा करना जारी रखूंगा जिन्होंने मुझे अपना समर्थन नहीं दिया है। यही एक राष्ट्रपति का काम है, जो अपनी पार्टी व अपने लोगों तक सीमित न रहकर सभी का प्रतिनिधित्व करे।”

बाइडेन ने कहा, “यह पल सिर्फ मेरे लिए खास नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण अमेरिका के लिए है।”

उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप ने अमेरिका को काफी लंबे समय तक अंधेरे में रखा है और काफी ज्यादा नफरत, डर और विभाजन फैलाया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप। (Wikimedia Commons)

अगर ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति चुने जाते हैं, इस पर बाइडेन कहते हैं, “कोरोनावायरस के मामले और मौतों का इजाफा जारी रहेगा। कई घरेलू, स्वतंत्र व्यवसाय बंद कर दिए जाएंगे। कामकाजी लोगों को संघर्ष का सामना करना पड़ेगा और जो समर्थ हैं उन्हें काफी ज्यादा टैक्स का भुगतान करना पड़ेगा। सस्ती देखभाल अधिनियम पर तब तक हमले होते रहेंगे जब तक कि यह पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता।”

पूर्व उप राष्ट्रपति ने यह भी कहा, “वायरस से अमेरीकियों की रक्षा करने के लिए ट्रंप अपनी बुनियादी जिम्मेदारियों को भी पूरा कर पाने में विफल रहे हैं।”(IANS)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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