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दुनिया

बढ़ती हिंसा को लेकर ट्रंप-बाइडन का एक-दूसरे पर चल रहा भारी आरोप-प्रत्यारोप

बाइडन नेशनल पोल के साथ-साथ उन राज्यों में ट्रंप से आगे चल रहे हैं, जहां किसी भी पार्टी के पास कोई निर्णायक बढ़त नहीं है लेकिन बाइडन की बढ़त पर पकड़ धीरे-धीरे छूट रही है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, (Pixabay)

By: अरुल लुईस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी के उनके प्रतिद्वंदी जो बाइडन देश में बढ़ती हिंसा और अपराध के लिए एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं और 3 नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर चुनाव प्रचार के बीच दोनों नेताओं का एक-दूसरे पर निशाना साधना जोरों पर है।


चुनाव में अब 63 दिन रह गए हैं, ऐसे में ट्रंप और बाइडन ने सोमवार को अपने-अपने अंदाज में हिंसा के मुद्दे पर बोला, जो नस्लवाद और श्वेत पुलिसकर्मियों द्वारा अफ्रीकी-अमेरिकियों की हत्या के खिलाफ देशव्यापी ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन का परिणाम है।

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बाइडन नेशनल पोल के साथ-साथ उन राज्यों में ट्रंप से आगे चल रहे हैं, जहां किसी भी पार्टी के पास कोई निर्णायक बढ़त नहीं है।

लेकिन बाइडन की बढ़त पर पकड़ धीरे-धीरे छूट रही है, और व्यवस्था के मुद्दे से निपटने के लिए डेमोक्रेट के लिए थोड़ा महत्वपूर्ण हो गया है, जहां ट्रंप और रिपब्लिकन मजबूत स्थिति में दिखाई देते हैं।

राजनीतिक साइट ‘रियलक्लीयरपॉलिटिक्स’ के नेशनल पोल के डेटा एकत्रीकरण में, बाइडन को लोगों का समर्थन 24 अगस्त के 7.8 प्रतिशत के मुकाबले घटकर सोमवार को 6.2 प्रतिशत रह गया, जो 1.8 प्रतिशत की गिरावट है।

जीत में अहम भूमिका निभाने वाले छह राज्यों में बाइडन के वोट बैंक पर खासा असर पड़ा है और 22 अगस्त के 3.9 प्रतिशत के मुकाबले 26 अगस्त को घटकर 2.7 प्रतिशत रह गया, जो 1.2 प्रतिशत का नुकसान दर्शाता है।

मार्च में कोरोनोवायरस के प्रकोप के बाद से बाइडन का एक बड़ी रैली में बाग लेना बाकी है। पीट्सबर्ग में एक कन्वर्टेड स्टील प्लांट में जनता की गैर-मौजूदगी में सिर्फ प्रसारण और समाचार रिपोटरें के लिए एक बैठक में बाइडन ने ट्रंप पर निशाना साधा।

डेमोक्रेटिक पार्टी से उम्मीदवार जो बाइडन। (Wikimedia Commons)

उन्होंने कहा, “ट्रंप हिंसा को रोक नहीं सके क्योंकि वह इसे सालों से भड़काते रहे हैं।”

ट्रंप और रिपब्लिकन द्वारा लगाए गए आरोप कि बाइडन देश के कुछ हिस्सों में भड़की हिंसा को लेकर नरम हैं, बाइडन ने अपना बचाव करते हुए कहा, “मैं इन सब के बारे में स्पष्ट रहूंगा। दंगा करना विरोध नहीं है। लूटपाट करना विरोध प्रदर्शन नहीं है। आगजनी करना विरोध प्रदर्शन नहीं है।”

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उन्होंने कहा कि इन कृत्यों में शामिल लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

वहीं, बाइडन के भाषण के बाद एक न्यूज कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने आरोप लगाया, “कई महीनों से जो बाइडन झूठ बोलकर प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ाते रहे हैं और ये कहते रहे हैं कि ये विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे।”

उन्होंेने कहा कि पीट्सबर्ग में बाइडन द्वारा दिए भाषण में उन्हें नहीं लगता कि उन्होंने (बाइडन) ने एंटी-फासिस्ट शब्द का इस्तेमाल किया होगा।

ट्रंप ने कहा कि जिन बड़े शहरों में दंगे हुए हैं और कानून-व्यव्स्था लचर साबित हुई हैं, अधिकांश में डेमोक्रेट का शासन है।(आईएएनएस)

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भारत के तमिलनाडु राज्य में बसा कन्याकुमारी स्थल (wikimedia commons)

कुमारी देवी मंदिर :

यह स्थान श्रीपद पराई के नाम से भी जाना जाता है। प्राचीन मान्यताओं की बात करे तो इसके अनुसार इस स्थान पर कभी कन्याकुमारी ने भी तपस्या की थी। इसलिए इस स्थान को कन्याकुमारी कहा जाता है। यहां कुमारी देवी के पैरों के निशान भी हैं। कन्याकुमारी के समुद्री तट पर ही कुमारी देवी का मंदिर है, जहां देवी पार्वती के कन्या रूप को पूजा जाता है। प्राचीन कथाओ में कहा गया है कि भगवान शिव ने एक असुर वाणासुर को वरदान दिया था कि कुंवारी कन्या के अलावा किसी के हाथों उसका वध नहीं होगा। प्राचीनकाल में कभी भारत पर शासन करने वाले राजा भरत की आठ पुत्री और एक पुत्र था। राजा भरत ने अपने साम्राज्य को नों बराबर हिस्सों में बांटकर अपनी संतानों को दे दिया था और दक्षिण का हिस्सा उनकी पुत्री कुमारी को मिला। कुमारी भगवान शिव की अनन्य भक्त थीं और भगवान शिव से विवाह करना चाहती थीं। कहा जाता हैं कि विवाह की तैयारियां होने लगीं लेकिन नारद मुनि यह चाहते थे कि वाणासुर नामक असुर का कुमारी के हाथों वध हो जाए। इस कारण शिव और देवी कुमारी का विवाह नहीं हो पाया। कुमारी को शक्ति देवी का अवतार माना जाने लगा और वाणासुर के वध के बाद कुमारी की याद में ही दक्षिण भारत के इस स्थान को 'कन्याकुमारी' कहा जाने लगा। यह भी कहा जाता है कि शहर का नाम देवी कन्या कुमारी के नाम पर पड़ा है । प्रचलित कथाओं में कुमारी देवी को भगवान श्रीकृष्ण की बहन भी माना गया है। प्रचलित कथा के अनुसार ऐसा कहा गया है कि देवी का विवाह संपन्न न हो पाने के कारण बचे हुए दाल-चावल बाद में कंकर बन गए। आश्चर्यजनक रूप से कन्याकुमारी के समुद्र तट की रेत में दाल और चावल के आकार और रंग-रूप के कंकर बड़ी मात्रा में देखे जा सकते हैं।

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यूएनडीपी का चिन्ह (Wikimedia Commons)

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र का वैश्विक विकास नेटवर्क है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की स्थापना 22 नवंबर 1965 को हुई थी। यह राष्ट्रों के बीच तकनीकी और निवेश सहयोग को बढ़ावा देता है और देशों को ज्ञान, अनुभव और संसाधनों से जोड़ता है ताकि लोगों को अपने लिए बेहतर जीवन बनाने में मदद मिल सके। संयुक्त राष्ट्र की विकास एजेंसी के रूप में, यूएनडीपी सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में देशों की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यूएनडीपी के कार्यक्रमों में गरीबी कम करने, विकासशील देशों में बीमारियों के प्रसार का इलाज और मुकाबला करने के लिए रणनीति विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम लोगों के जीवन की गुणवत्ता को मापने के लिए हर साल मानव विकास सूचकांक रिपोर्ट प्रकाशित करता है। पहला मानव विकास रिपोर्ट 1990 में पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक और भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन द्वारा लॉन्च किया गया था। तब से लेकर अब तक हर साल यह रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। मानव विकास सूचकांक प्रमुख क्षेत्रों में देश के प्रदर्शन के आधार पर सभी देशों को रैंक देता है। इन प्रमुख क्षेत्रों में शैक्षिक स्तर, स्वास्थ्य की स्थिति और एक सभ्य जीवन स्तर शामिल हैं। मानव विकास सूचकांक में 0 से 1.0 के पैमाने पर देश को रैंक किया जाता है, जिसमें 1.0 उच्चतम मानव विकास है।

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हाल ही में कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख के रूप में नियुक्त किए गए नवजोत सिंह सिद्धू के साथ जारी राजनीतिक खींचतान के बीच कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। राजभवन के गेट पर 79 वर्षीय अमरिंदर सिंह ने कहा कि वह खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। बात यह है कि यह एक महीने में तीसरी बार हो रहा है कि विधायकों को बैठक के लिए बुलाया जा रहा है, मेरे नेतृत्व पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अमरिंदर सिंह का यह फैसला कांग्रेस के लिए मुसीबत बन सकता है क्योंकि पंजाब के चुनाव में 6 महीने से भी काम के समय रह गया है। अमरिंदर सिंह ने कहा कि "मैंने आज सुबह कांग्रेस अध्यक्ष (सोनिया गांधी) को फोन किया और उनसे कहा कि मैं इस्तीफा देने जा रहा हूं। उन्होंने कहा कि भविष्य की रणनीति उनके समर्थकों से चर्चा के बाद तय की जाएगी।

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