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मनोरंजन

‘जस्टिस फॉर सुशांत’ का बिहार चुनाव पर कैसे होगा असर, जानिए इसके राजनीतिक मायने

अब यदि राजपूतों की राजनीतिक ताकत का आंकलन करना हो तो बिहार के पिछले चुनावों पर नजर डालें। 2015 के विधानसभा चुनावों के टिकट वितरण में बीजेपी ने ऊंची जाति के 65 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, जिनमें से 30 राजपूत थे।

सुशांत सिंह राजपूत, दिवंगत अभिनेता(Sushant Singh Rajput, Instagram)

By: Anindya Banerjee

सुशांत की मौत के मामले में जो ‘जस्टिस फॉर सुशांत’ की गुहार लग रही है, इसके बिहार के वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में अहम मायने हैं। भले ही सुशांत की जाति वाले लोगों की राज्य में आबादी केवल 4 फीसदी है लेकिन यहां राजपूतों का एक ऐसा प्रभावशाली समुदाय है जो चुनावों पर प्रभाव डालने की ताकत रखता है। इसकी झलक यहां के नेताओं की प्रतिक्रियाओं में साफ नजर आती है। अभिनेता की रहस्यमय मौत के बाद से भाजपा सांसद रूपा गांगुली ने हैशटैग ‘सीबीआई फॉर सुशांत’ के साथ कम से कम सौ ट्वीट किए होंगे। राजद के तेजस्वी यादव से लेकर सत्तारूढ़ जेडी-यू के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक सभी ने सुशांत के घर पर उपस्थिति दर्ज कराई। लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग पासवान ने तो जांच को सीबीआई को सौंपने की भी मांग की थी।


ऐसे में सवाल यह है कि आखिर क्यों सुशांत की जाति उस राज्य में इतनी महत्वपूर्ण है, जहां इसकी आबादी बमुश्किल 4 फीसदी है?

दरअसल, इसके पीछे राजनीतिक कारण से ज्यादा भावनात्मक कारण प्रमुख है। बॉलीवुड के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि ‘पद्मावत’ फिल्म का करणी सेना द्वारा विरोध किए जाने के बाद सुशांत ने अपनी सरनेम हटाने तक की बात कह दी थी। लेकिन आज बिहार की राजनीतिक रंगभूमि में सुशांत ही राजपूतों का सबसे बड़ा कोई चेहरा हैं, जो कथित रूप से बॉलीवुड सिस्टम का शिकार हुए।

यह भी पढ़ें: रिया चक्रवर्ती का खुलासा, ‘मेरे पास सुशांत की सिर्फ एक संपत्ति है’

अब यदि राजपूतों की राजनीतिक ताकत का आंकलन करना हो तो बिहार के पिछले चुनावों पर नजर डालें। 2015 के विधानसभा चुनावों के टिकट वितरण में बीजेपी ने ऊंची जाति के 65 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, जिनमें से 30 राजपूत थे। वहीं जेडी-यू, आरजेडी और कांग्रेस के ‘महागठबंधन’ ने ऊंची जाति के जिन 39 उम्मीदवारों को टिकट दिए थे, उनमें से 12 राजपूत थे। यहां तक कि सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने वाली राजद ने अपनी बिहार इकाई के लिए अध्यक्ष के रूप में जगदानंद सिंह को चुना, जो कि राजपूत हैं।

यह भी पढ़ें: बिहार विधानसभा में भी गूँजा सुशांत सिंह राजपूत का मामला, सीबीआई जांच कि उठी मांग

पिछले हफ्तों में दो मुख्यमंत्री, बिहार के नीतीश कुमार और हरियाणा के मनोहर लाल खट्टर सुशांत के पिता से मिलने पहुंचे। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, भाजपा सांसद मनोज तिवारी भी सुशांत के घर गए। राजनेताओं की ये यात्राएं साफतौर पर बताती हैं कि ‘बिहारी अस्मिता’ से समझौता नहीं किया जाएगा और ‘हम राजपूतों के साथ खड़े हैं’। (आईएएनएस)

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बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रौशन।(Wikimedia Commons)

बॉलीवुड के सबसे हैंडसम एक्टर कहे जाने वाले ऋतिक रोशन अपने बेहतरीन लुक्स के अलावा कमाल के नृत्य कौशल के लिए भी अक्सर सुर्ख़ियों में रहते हैं।

सोशल मीडिया पर वे अक्सर अपने फैंस के लिए वीडियोज शेयर करते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने वर्कआउट सेशन के दौरान के वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया जो देखते ही देखते वायरल हो गया।

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आईआईटी दिल्ली को उपहार में मिला 1 मिलियन अमरीकी डालर [ Wikimedia Commons]

आईआईटी दिल्ली के एक पूर्व छात्र डॉ मोहित एरोन ने आईआईटी दिल्ली को 1 मिलियन अमरीकी डालर उपहार के रूप में दिए हैं। उन्होंने यह राशि आईआईटी दिल्ली के कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग को दी है। आईआईटी दिल्ली के मुताबिक इस धन राशि का उपयोग संकाय की अनुसंधान गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए किया जाएगा। आईआईटी दिल्ली आगे भी कोशिश करेगा कि विभाग के स्नातक, परास्नातक और पीएचडी छात्र भारत और विदेशों में आयोजित कार्यशालाओं, प्रतिस्पर्धी कार्यक्रमों और सम्मेलनों में भाग ले सकें।

मोहित एरोन हाइपर-कन्वज्र्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर के जनक कहे जाते हैं। मोहित आरोन स्केलेबल निर्माण के क्षेत्र में 15 से अधिक वर्षों के अनुभव के उद्यमी और व्यवसायी हैं। उन्होंने 2009 में न्यूटेनिक्स और 2013 में कोहेसिटी इंक की स्थापना की। बता दें की आज ये दोनों कंपनियां यूनिकॉर्न बन गई हैं।

2018 में डॉ एरोन को राइस विश्वविद्यालय से उत्कृष्ट इंजीनियरिंग पूर्व छात्र पुरस्कार मिला। इसके अगले साल यानि 2019 में उन्हें आईआईटी दिल्ली से विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार भी मिला।

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निहंग सिखों ने दलित लखबीर सिंह की हत्या कर जारी किया था वीडियो (Wikimedia commons)

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानून के विरोध में दिल्ली के बॉर्डरों पर बैठे किसान हटने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसी बीच एक ऐसी खबर आई है जो अत्यंत शर्मनाक हैं। और उससे भी शर्मनाक यह है कि हत्या करने का वीडियो बनाया गया और उसे जारी भी किया गया। आप सबको याद होगा एक समय होता था जब आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठन हत्या करने का वीडियो बनाकर जारी करते थे और हत्या करने की जिम्मेदारी भी लेते थे इसी तरह के कृत करने की कोशिश हमारे देश भारत में हुई है। अगर इसे अभी नहीं रोका गया तो ऐसी वारदातें और बढ़ सकती हैं।

अब आपको विस्तार से पूरी घटना बताते हैं। शुक्रवार को सिंधु बॉर्डर पर 35 साल के युवक जिसका नाम लखबीर सिंह है उसका मृत शव मिला। वह एक दलित मजदूर था। लखबीर सिंह की हत्या इतनी बर्बरता से की गई थी कि उसका एक हाथ और एक पैर कटा हुआ पाया गया और सबसे जरूरी बात यह की शव संयुक्त किसान मोर्चा के मंच के पास से मिला था। जिस कारण किसान आंदोलन और किसान नेताओ का कटघरे में खड़े होना तो तय हैं।

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