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जस्टिन लैंगर ने चोटों के लिए आईपीएल को जिम्मेदार ठहराया

आस्ट्रेलिया के मुख्य कोच जस्टिन लैंगर ने कहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का 2020 सीजन सही समय पर आयोजित नहीं किया गया और इसके कारण कई खिलाड़ी चोटिल भी हुए। कोरोना महामारी के कारण आईपीएल, 2020 का आयोजन 19 सितंबर से 10 नवंबर तक यूएई में किया गया था और इसके बाद ही

आस्ट्रेलिया के मुख्य कोच जस्टिन लैंगर ने कहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का 2020 सीजन सही समय पर आयोजित नहीं किया गया और इसके कारण कई खिलाड़ी चोटिल भी हुए। कोरोना महामारी के कारण आईपीएल, 2020 का आयोजन 19 सितंबर से 10 नवंबर तक यूएई में किया गया था और इसके बाद ही भारत का आस्ट्रेलिया दौरा शुरू हो गया था।

लैंगर ने वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा, “मैंने कहा है कि यह इस समर सबसे अधिक जीवित रहने वाला है। इस सत्र में चोटों की सूची लंबी है। मेरे हिसाब से इस साल आईपीएल का समय सही नहीं था। खासकर इतने बड़े सीरीज के लिए तैयारी का मौका नहीं मिला। लेकिन इस बार टूर्नामेंट का टाइमिंग आइडियल नहीं था।” चोट के कारण आस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर पहले वनडे, तीन टी-20 और दो टेस्ट मैचों में आस्ट्रेलिया के लिए नहीं खेल पाए थे। वार्नर तीसरे टेस्ट के लिए भी पूरी तरह से फिट नहीं थे, लेनिक इसके बावजूद वह खेले थे। भारत की ओर से जसप्रीत बुमराह, रवींद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन भी चोटिल हो चुके हैं और उनका चौथे टेस्ट में खेलना तय नहीं है। उनसे पहले मोहम्मद शमी और उमेश यादव भी चोटिल होकर सीरीज से बाहर हो गए थे।

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लैंगर ने हालांकि आईपीएल की तारीफ करते हुए कहा, “मुझे आईपीएल पसंद है। यह उसी तरह है, जैसे मेरे युवा दिनों में काउंटी क्रिकेट था। काउंटी खेलकर क्रिकेट कौशल का विकास होता था और अब आईपीएल से सीमित ओवरों के खेल में निखार आ रहा है, लेकिन कोविड-19 के कारण इस बार टाइमिंग सही नहीं थी। दोनों टीमों में कितने खिलाड़ी चोटिल हैं जो लीग का असर भी हो सकता है।” उन्होंने कहा, “मुझे यकीन है कि इसकी समीक्षा की जाएगी। यह क्रिकेट आस्ट्रेलिया की नजर में है। वनडे सीरीज के बाद भी हम कह चुके हैं कि इसकी समीक्षा होनी चाहिए।” (आईएएनएस)

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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क्रांतिकारी दुर्गावती देवी (wikimedia commons)

हिंदुस्तान की भूमि पर कई साहसी और निडर लोगों का जन्म हुआ जिन्होने भारत की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। लेकिन दुःख की बात यह है कि इनका नाम इतिहास के पन्नों में इतनी बार दर्ज नहीं हुआ जितना होना चाहिए था। ऐसी ही एक वीरांगना का नाम है दुर्गावती देवी। इन्हें दुर्गा भाभी के नाम से भी जाना जाता है। यह उन महिलाओं में से एक थी जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ क्रांति में भाग लिया था।

दुर्गा भाभी का जन्म 7 अक्टूबर 1907 में उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में हुआ था। इनका जन्म छोटी उम्र में ही भगवती वोहरा जी के साथ हुआ। भगवती वोहरा का परिवार लाहौर का प्रतिष्ठित परिवार था। दुर्गावती के पति भी क्रांति में पुरजोर तरीके से भाग लेना चाहते थे। लेकिन पिता के दबाव के कारण ऐसा कर नहीं पा रहे थे। पिता का देहांत होने के बाद भगवती जी ने भी क्रांति में भाग लिया था।

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