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ओपिनियन

काश यूँ हुआ होता : कहानी जयनाथ मिसरा की (भाग-6)

यह कहानी ज़ख़्मी आँखों से रिश्तों को कुरेदती हुई इंसानी दौड़-धूप में आह भरती है। हाज़िर है एक आदमी के संघर्ष की तमाम दास्तान।

काश यूँ हुआ होता : कहानी जयनाथ मिसरा की (भाग-6)

आखिरी मुलाक़ात

मंजू की सेहत पर ग्रहण लग चुका था। उसके पित्त कोष में संक्रमण फैल रहा था। जिसकी वजह से भारत के डॉक्टर्स ने मंजू को विदेश में अपना इलाज करवाने की सलाह दी। उसी सलाह की तर्ज पर कलकत्ता से मंजू के पति ने कैलाश को पत्र लिखा। वही पत्र कैलाश ने जयनाथ के हाथों में रख दिया। वहां यह बात तय हुई कि मंजू को विदेश बुला लिया जायेगा। मंजू जयनाथ के घर में रहेगी। पैसों का सारा हिसाब कैलाश देख लेगा। आईवी और बच्चों के होते हुए कैलाश अपनी बेटी को अपने पास रखने में असमर्थ था।


कहानी अब तक –

काश यूँ हुआ होता : कहानी जयनाथ मिसरा की (भाग-1)

काश यूँ हुआ होता : कहानी जयनाथ मिसरा की (भाग-2)

काश यूँ हुआ होता : कहानी जयनाथ मिसरा की (भाग-3)

काश यूँ हुआ होता : कहानी जयनाथ मिसरा की (भाग-4)

काश यूँ हुआ होता : कहानी जयनाथ मिसरा की (भाग-5)

इसके बाद जयनाथ और मैरी लंदन वापस आ गए। पार्ट्रिज रोड के अपने नये घर में प्रवेश कर गए। हनीमून से लौटते ही दोनों के हाथों में घर की चाभी थी। घर का फर्नीचर मैरी ने अपने किसी दूर के रिश्तेदार से खरीद लिया था। जयनाथ ने भी अपने एक दोस्त से सेकंड हैंड गाड़ी खरीद ली। और ऐसे शुरू हुई जयनाथ की नई जीवन यात्रा!

लेकिन इस नई यात्रा में पुराने कई रिश्ते नये तरीके से जयनाथ से मिलने को उतारू थे। सबसे पहले तो मंजू का अपने ऑपरेशन के लिए लंदन आना हुआ। मैरी ने उसके लिए पहले ही एक सर्जन से बात कर ली थी। इसी सर्जन ने कई साल पहले मैरी के अपेंडिक्स का ऑपरेशन किया था। मंजू के आने के बाद मैरी ने उसकी बड़ी सेवा की। ऐसी ही थी मैरी। साल भर बाद जयनाथ की मुन्नी बुआ ने भी लंदन की ज़मीन पर कदम रखा। कहने को बुआ पहले भी दो दफा लंदन आ चुकी थीं। लेकिन इस बार मामला गंभीर था। कैलाश की ढलती उम्र को किसी सहारे की दरकार थी। उसी ने मुन्नी को पत्र भेज कर आने को कहा। एयरपोर्ट से लौटते वक़्त कैलाश, आईवी और मुन्नी तीनों ही जयनाथ के घर पहुंच गये। यहाँ कुछ ऐसा हुआ जिसका इंतज़ार जयनाथ को अपने बुलन्दशहर के दिनों से था।

मैरी और जयनाथ की शादी स्कॉटलैंड में हुई थी।

मुन्नी को जयनाथ की कुंठा का पता था। वह अपने भाई के बेइन्साफ़ रिश्तों से मुखातिब थी। उस दिन खाने की टेबल पर बैठे यह एक परिवार के हिस्से बिखरे छंद से लग रहे थे। जयनाथ के ठीक सामने कैलाश बैठा हुआ था। इधर-उधर की बातों से शुरू हुई वार्ता अंत में सुशीला पर जाकर थर्रा उठी। सुशीला को इन्साफ के तराजू में तौला जा सके भला ऐसे शब्द कहाँ थे। लेकिन जयनाथ ने उस घड़ी में अपने पिता से वह सारे सवाल किये जिसके खालीपन ने अभी तक उसमें तड़प ज़िंदा रखी थी।

आखिर कैलाश ने अपने परिवार को इस हद तक धोखे में क्यों रखा था? क्या पैसों की भूख और सफलता के फितूर ने उसे यह करने पर मजबूर कर दिया या यह सब पूरे होशो-हवास में किया गया था? आखिर कौन था सुशीला का दोषी? कैलाश या कभी ना लौट कर आने वाले उसके दोनों बेटे। जयनाथ भले ही अपनी माँ के लिए विदेश गया हो लेकिन अंतिम समय में वह भी अपनी माँ के साथ नहीं था। और यही सच था। जिस सच से जयनाथ भी दूर नहीं था। काश! सुशीला की अर्थी को उसके बेटों का कन्धा मिला होता। काश! कैलाश एक दफा ही सही पर उससे मिलने गया होता। काश! सुशीला की निगाह में अपनों के लौट कर आने की तस्वीर छप पाती। 

कहानी अब तक –

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काश यूँ हुआ होता : कहानी जयनाथ मिसरा की (भाग-3)

काश यूँ हुआ होता : कहानी जयनाथ मिसरा की (भाग-4)

काश यूँ हुआ होता : कहानी जयनाथ मिसरा की (भाग-5)

रिश्तों की इन पेचीदा गलियों ने जयनाथ और कैलाश के बीच सागर की उस गहराई को जन्म दिया जहाँ बाप-बेटे का प्रेम मात्र तिनके सा था। कैलाश के पास अपने बेटे के किसी भी सवाल का जवाब न था। बात और गर्म होती इससे पहले ही मैरी ने दखल कर मामले को ठंडा करने की कोशिश की। यह जयनाथ और कैलाश की आखिरी मुलाक़ात रही।

कुछ सालों बाद, उम्र के नरम पायदान पर कैलाश को अपनी आँखों का ऑपरेशन कराना था। लंदन के डॉक्टर्स ने हाथ खड़े कर दिए थे। उनके हिसाब से ऑपरेशन के समय कैलाश को सुन्न करने का कदम जोखिम भरा हो सकता था। लेकिन इसके बावजूद कैलाश ऑपरेशन के लिए भारत चला गया। और भारत के उस अस्पताल में ही कैलाश ने अपनी आखिरी सांस ली…

कैलाश की मौत से लगभग साल भर पहले 1975 में मैरी ने एक बच्ची को जन्म दिया था। उसका नाम शीला रखा गया…आगे की कहानी जीवनी के आखिरी भाग – सैल्यूट टू यू सर जी” के माध्यम से आप तक पहुंचेगी।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
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