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संस्कृति

जानिए प्रभु श्री राम के ऐसे 5 गुण जो उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाते हैं

वाल्मीकि रामायण में भगवान श्रीराम की ऐसे ही सोलह गुण बताए गए हैं जिनका अनुसरण करने से आज भी मनुष्य जीवन के सांसारिक कष्टों से मुक्ति पा सकता है।

(NewsGram Hindi)

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जिनके गुणों की जितनी व्याख्या की जाए कम है। कहा जाता है कि 'बेटा हो तो राम जैसा' जो पिता के सम्मान के लिए अपने सारे सुख, हँसी खुशी त्याग दे। बेटा ही नहीं लोग पति, मित्र, भाई सब राम जैसा ही चाहते हैं। और चाहें भी क्यों न, आखिर प्रभु श्री राम हमारे धर्म ग्रंथों के सबसे आदर्श पुरुष जो माने जाते हैं।

ईश्वर के अनेकों अवतार हुए हैं पर उनमे श्री राम की अलग ही महिमा रही है। श्री राम असंख्य गुणों के धनि माने जाते हैं। कहा जाता है की राम के एक भी गुण अगर कोई साधारण मनुष्य अपना ले तो उसका जीवन सार्थक हो जाता है। वाल्मीकि रामायण में भगवान श्रीराम की ऐसे ही सोलह गुण बताए गए हैं जिनका अनुसरण करने से आज भी मनुष्य जीवन के सांसारिक कष्टों से मुक्ति पा सकता है। जानिए प्रभु श्री राम के ऐसे 5 गुण जो उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाते हैं और जिनका पालन करके आप भी असाधारण और विलक्षण प्रतिभा के स्वामी बन सकते हैं -


1- दयालु और सहनशील : भगवान राम ने दयालुता की एक अलग परिभाषा दी है। उन्होंने सिखाया दोस्त ही नहीं अगर दुश्मन भी शरण में आए तो उसपर दया करनी चाहिए और उसकी मदद करनी चाहिए। हर वर्ग के व्यक्तियों पर उन्होंने दया की। चाहे वो मित्र कुल का हो या शत्रु कुल का। सुग्रीव की मदद करना उनकी दयालुता का ही प्रतीक है।

सहनशीलता राम के विशेष गुणों में से एक है। कैकेयी के कहने पर 14 वर्ष वन में बीताने से लेकर माता सीता को त्याग देने के बाद महल में रहते हुए भी एक सन्यासी की भांति जीवन यापन करना , यह सब उनके सहनशीलता की पराकाष्ठा को दर्शाता है।

2 - सच्चा मित्र : हर जाति , हर प्राणी के साथ श्री राम की मित्रता थी। वो भले मानव हो ,पशु हो या दानव हो। सभी के साथ उन्होंने पुरे दिल से मित्रता निभाई है। राम ने यह भी बताया की सच्चा मित्र कैसा होना चाहिए। श्री राम के अनुसार एक सच्चे मित्र की पहचान है -

जिन्ह कें असि मति सहज न आई।
ते सठ कत हठि करत मिताई।।
कुपथ निवारि सुपंथ चलावा।
गुन प्रगटे अवगुनन्हि दुरावा।।
देत लेत मन संक न धरई।
बल अनुमान सदा हित करई।।
बिपति काल कर सतगुन नेहा।
श्रुति कह संत मित्र गुन एहा।।

यहां पर सुग्रीव को आश्वासन देते हुए भगवान राम संत और मित्र के गुणों को एक करके यह बताना चाह रहे हैं कि वस्तुत: मित्रता का निर्वहन तो संत ही करता है, या फिर जो ऐसा करे, वह संत है। संत किसी वेश का नाम न कभी था, न ही है। वह तो चरित्र का नाम है। जो अपने मित्र के दोष को छुपाए और गुणों को सार्वजनिक करे। उसे कुपंथ से निकालकर श्रेष्ठ मार्ग पर लगाने में पूरा सहयोग दे ताकि मित्र का चरित्र सार्वजनिक करने में कोई संकोच न हो।

  \u0936\u094d\u0930\u0940 \u0930\u093e\u092e , \u092e\u0930\u094d\u092f\u093e\u0926\u093e \u092a\u0941\u0930\u0941\u0937\u094b\u0924\u094d\u0924\u092e , \u0930\u093e\u092e\u093e\u092f\u0923 हर जाति , हर प्राणी के साथ श्री राम की मित्रता थी।(Wikimedia Commons)

3 - वचन का पालन करने वाला : राम ने सदैव अपने वचनों का पालन किया। उनके कुल की भी यही परंपरा रही की '' प्राण जाए पर वचन न जाए। ''राज्य के उत्तराधिकारी होते हुए भी अपने पिता के वचनों को पूरा करने के लिए वे 14 वर्ष वनवासी बन जंगलों में भटके। हालाँकि राजा दशरथ अपना वचन तोड़ने को तैयार भी थे पर श्री राम ने उन्हें ऐसा करने नहीं दिया और उनके वचनों का मान रखा।

राम ने सुग्रीव को वचन दिया की वे बालि को मारकर सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाएँगे तो वे तब तक चैन से नहीं बैठे जब तक अपना वचन पूरा नहीं कर दिए।

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4 - सभी को एक सामान देखने वाला : श्री राम ने कभी भेदभाव नहीं किया। वे ऊंच- नीच , जाति- कुजाति ,छोटे बड़े सब को एक सामान मानते थे। वन जाते समय जब वह श्रृंगवेरपुर जाते हैं तो वहां का राजा निषादराज गुह उनके स्वागत के लिए आता है। यह जाति उस समय अछूत मानी जाती थी। लेकिन राम जात-पात का भेद भूलकर उनके प्रेम को सम्मान देते हैं और उसके द्वारा दोनों में दिए गए फल खाकर पानी पीते हैं।

केवट भी नीच जाति का था। श्रीराम उस अछूत केवट को अपने पैर धोने का सौभाग्य देते हैं। इसके अलावा प्रभु राम नीच कुल में पैदा हुई शबरी के आश्रम में जाने के बाद उसके जूठे बेर भी प्रेम से खाते हैं।

5 - कुशल सम्राट : राम राज्य को स्वर्ण युग कहा जाता है। उनके राज्य में किसी प्रकार का भेद भाव या किसी प्रकार का अत्याचार नहीं होता था। धरती के सभी राजाओं में श्री राम को सर्वश्रेष्ठ राजा माना जाता है।उनके राज्य में सच्चा लोकतंत्र था। प्रजा की बातों को सुना और माना जाता था।

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अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली में भारत का दल।(IANS)

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हालांकि, मानवीय पहल में रुकावट आ गई थी, क्योंकि बुधवार तक पाकिस्तान इस खेप को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं था। जयशंकर ने आज कहा, "RIC देशों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट और राजनीतिकरण के अफगान लोगों तक पहुंचे। एक निकट पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साथी के रूप में, भारत उस देश में हाल के घटनाक्रमों, विशेष रूप से अफगान लोगों की पीड़ा के बारे में चिंतित है।"

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