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मनोरंजन

जानिए ट्रोल्स को लेकर क्या कहना है कॉमेडी किंग कपिल शर्मा का

कपिल ने बताया, "मैं सिर्फ अपने प्रशंसकों को हंसाने-गुदगुदाने पर फोकस करता हूं। मैं ट्रोल्स पर ज्यादा ध्यान नहीं देता हूं।"

कॉमेडियन कपिल शर्मा। (Twitter)

By – नतालिया निंगथौजम

कॉमेडियन कपिल शर्मा का कहना है कि वह ट्रोल्स पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं और अपने चुटकूलों के माध्यम से दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने में यकीन रहते हैं।


दरअसल, कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर लोगों ने कपिल को इसलिए आड़े हाथों ले लिया क्योंकि उन्हें अपने शो पर दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के बारे में कोई जिक्र नहीं किया।

ट्रोलिंग का वह किस तरह से सामना करते हैं? इसके जवाब में कपिल ने आईएएनएस को बताया, “मैं सिर्फ अपने प्रशंसकों को हंसाने-गुदगुदाने पर फोकस करता हूं और मैं अपने चुटकूलों के माध्यम से दुनिया को बेहतर जगह बनाने में यकीन रखता हूं। मैं ट्रोल्स पर ज्यादा ध्यान नहीं देता हूं।”

कपिल इस वक्त अपने मौजूदा दौर का जमकर आनंद ले रहे हैं। पिछले साल, वह पिता बने और अब वह खासतौर पर बच्चों के लिए बने एक शो के साथ जुड़े हैं।

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कपिल कहते हैं, “मैं खुद को बहुत धन्य मानता हूं। हर दिन कोई नया ऑफर मिल रहा है। पिता बनने से पहले भी मेरे अंदर बच्चों के लिए कुछ करने की ख्वाहिश थी। इसी का नतीजा है कि ‘द कपिल शर्मा शो’ में आपकों बच्चों का अवतार देखने को मिल रहा है। बच्चों के लिए आगे भी बहुत कुछ करना जारी रखूंगा। ‘द हनी बनी शो विद कपिल शर्मा’ इसकी एक अच्छी शुरुआत है।”

शो के बारे में बात करते हुए कपिल ने कहा, “पहली बार मैं किसी एनिमेटेड शो के लिए शूटिंग कर रहा हूं। यह एक नया अनुभव है, लेकिन समय के बाद मैं इसे समझ पाने में कामयाब रहा और मुझे अब इसमें मजा आ रहा है। यह एक अनोखा और रोमांचक अनुभव है।” (आईएएनएस)

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इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) [IANS]

दुनिया की अग्रणी हॉस्पिटैलिटी और पाक कला शिक्षा दिग्गजों में से एक, सॉमेट एजुकेशन (Sommet Education) ने हाल ही में देश के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी संस्थान, इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) के साथ हाथ मिलाया है। इसके साथ सॉमेट एजुकेशन की अब आईएसएच (ISH) में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो पूर्व के विशाल वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण एडिशन है। रणनीतिक साझेदारी सॉमेट एजुकेशन को भारत में अपने दो प्रतिष्ठित संस्थानों को स्थापित करने की अनुमति देती है। इनमें इकोले डुकासे शामिल है, जो पाक और पेस्ट्री कला में एक विश्वव्यापी शिक्षा संदर्भ के साथ है। दूसरा लेस रोचेस है, जो दुनिया के अग्रणी हॉस्पिटैलिटी बिजनेस स्कूलों में से एक है।

इस अकादमिक गठबंधन के साथ, इकोले डुकासे का अब भारत में अपना पहला परिसर आईएसएच (ISH) में होगा, और लेस रोचेस देश में अपने स्नातक और स्नातकोत्तर आतिथ्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करेगा।

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Credit- Wikimedia Commons

भारतीय रेलवे (Wikimedia Commons)

पूर्व मध्य रेल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद इसके अनुपालन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इको स्मार्ट स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मध्य रेल के 52 चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड द्वारा सुझाए गए 24 इंडिकेटर (पैरामीटर) लागू किए हैं। सभी 52 स्टेशनों ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक प्रमाणन आईएसओ-14001:2015 प्राप्त किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित पूर्व मध्य रेल के 52 नामांकित स्टेशनों में से 45 का संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें के लिए सहमति-से-स्थापित (सीटीई) प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुतियां सुनिश्चित कीं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेष कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के सभी 45 स्टेशनों के लिए स्थापना की सहमति के लिए एनओसी प्राप्त कर ली गई है और 32 स्टेशनों को कंसेंट-टू-ऑपरेट (सीटीओ) दी गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणीकरण ने पूर्व मध्य रेलवे को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें द्वारा निर्धारित पानी, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों की आवश्यकता को सुव्यवस्थित करने में मदद की है।

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वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच अब गोरखपुर में भी हो सकेगा। [IANS]

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस समेत अन्य वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच शुरू हो गई है। गोरखपुर (Gorakhpur) में यह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)की क्षेत्रीय इकाई रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC) के जरिए संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के प्रयास से शुरू इस आरएमआरसी में नौ अत्याधुनिक लैब्स बनकर तैयार हैं। बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) इसका उद्घाटन करेंगे।

राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आरएमआरसी (RMRC) की इन लैब्स के जरिये न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर वल्र्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा। सबसे खास बात यह भी है कि अब गोरखपुर (Gorakhpur) में ही आने वाले समय में कोरोनाकाल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वेरिएंट (Covid variant) अधिक प्रभावित कर रहा है।

Narendra Modi , PM of India, ICMR मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस RMRC का उद्घाटन करेंगे। [Wikimedia Commons]

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