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कृति सेनन ने ‘मिमी’ में वजन बढ़ने को लेकर किया खुलासा

अभिनेत्री कृति सेनन का कहना है कि उन्होंने आगामी फिल्म 'मिमी' में गर्भावस्था के विभिन्न चरणों को चित्रित करते हुए एक यथार्थवादी दृष्टिकोण चुना।

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अभिनेत्री कृति सेनन का कहना है कि उन्होंने आगामी फिल्म ‘मिमी’ में गर्भावस्था के विभिन्न चरणों को चित्रित करते हुए एक यथार्थवादी दृष्टिकोण चुना। कृति ने याद किया कि “अच्छे मेटाबोल्जिम के कारण मैं हमेशा जो कुछ भी चाहती हूं उसे खा सकती हूं। इसी कारण मेरे लिए किलो में वजन बढ़ाना आसान नहीं था। वजन बढाने के लिए मुझे नाश्ता, खाने , मिठाई, आदि ज्यादा से ज्यादा खाना पड़ा।”

अभिनेत्री ने आगे कहा, “हर दो घंटे में, मुझे भूख न होने पर भी कुछ न कुछ नाश्ता करना पड़ता था। थोड़ी देर बाद, जंक फूड देखकर ही मुझे अजीब सा लगने लगा था। मुझे योग सहित किसी भी तरह की कसरत करने की भी अनुमति नहीं थी, जिसने मुझे वास्तव में अनफिट महसूस कराया।”


अभिनेत्री कृति सेनन।(Wikimedia Commons)

‘मिमी’ के निर्देशक लक्ष्मण उटेकर ने कहा, “एक चरित्र को निभाने और चरित्र बनने में अंतर है। कृति ने इस भूमिका में एक गहरा गोता लगाया है और यह सचमुच नजर आ रहा है।”

उटेकर ने कहा कि बहुत कम एक्टर अपने शिल्प की पवित्रता को अपने स्टारडम से ऊपर रखते हैं। कृति पहले एक कलाकार हैं और जानती थीं कि मिमी उनसे लाइन क्रस करने की मांग करेंगी। यह कड़ी मेहनत और समर्पण से पैदा हुआ प्रदर्शन है।

कृति आगे कहा कि वह जानती थीं कि वह बाद में उन कैलोरी को बर्न कर सकती हैं, लेकिन अपने चरित्र में खुद को डुबो देना समय की आवश्यकता थी।

‘मिमी’ में पंकज त्रिपाठी, साईं तम्हनकर, सुप्रिया पाठक और मनोज पाहवा भी हैं।

यह भी पढ़े : शंकर महादेवन : रैप संगीत का एक बहुत ही महत्वपूर्ण रूप .

फिल्म 30 जुलाई से जियो सिनेमा और नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी। (आईएएनएस-PS)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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शोधकर्ताओं ने कोविड के खिलाफ लड़ने में कारगर हिमालयी पौधे की खोज। ( Pixabay )

कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

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