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By: Aaditya Kanchan


वैसे तो इन दिनों प्यार करने और फ़िल्म बनाने के तरीके काफी बदल गए हैं लेकिन क्या आप जानते हैं की भारतीय इतिहास की पहली ओन स्क्रीन किस फ़िल्म में हुई थी ।   

आज वह बॉलीवुड इंडस्ट्री ( Bolloywood  Industry ) जहां पर एडल्ट कंटेंट और ओटीटी ( OTT ) पर दिखाए जाने वाले तड़क-भड़क वाले सीन भी किए जाते हैं उसके भी कई साल पूरे हो चुके हैं ।  फिल्मों के  शुरुआत में महिलाओं के काम को ज्यादा पसंद नहीं किया जाता था, लेकिन वक्त के साथ कई परिवर्तन आए देश आजाद हुआ, बॉलीवुड का जन्म हुआ, अन्य स्थानीय भाषाओं का सिनेमा भी आया और कई बदलाव भी आए हैं।

अब बात करते हैं उन सितारों की जिन्होंने पहली भारतीय ऑन स्क्रीन किस किया था। वह अभिनेत्री हैं देविका रानी ( Devika Rani )  और उनके पति अभिनेता हिमांशु राय ( Himanshu Rai ) जिन्होंने लगभग 1 मिनट तक किस किया था। 
 

अभिनेत्री देविका रानी और अभिनेता हिमांशु राय किस करते हुए ।   ( Wikimedia Commons ) 

देविका रानी (Devika Rani) का जन्म वैसे तो 30 मार्च 1908  में तमिलनाडु (Tamil Naidu) के मद्रास शहर में हुआ था और उन्होंने तीस के दशक में एक्टिंग (Acting) में दुनिया में कदम रखा ।

देखा जाए तो उस समय का समाज मनोरंजन में ज्यादा विश्वास नहीं रखता था और ना ही महिलाओं के विकास पर इतना सोचता था, लेकिन देविका रानी (Devika Rani)  ने फिल्मों में काम करके इस मिथक का नाश किया और अभिनय में अपना सिक्का जमाया।

बता दें कि वह फर्स्ट लेडी ऑफ of Indian cinema के नाम से भी जानी जाती हैं ।

यह भी पढ़ें: पांच भाषाओं में बोलते हैं धाराप्रवाह, इमरजेंसी में गए थे जेल, संघ के नए सरकार्यवाह होसबोले के बारे में जानिए

किसिंग सीन का सच 

बात है 1933 की फिल्म कर्मा की जो अंग्रेजी भाषा की देश की पहली फिल्म थी। मुख्य किरदार में लीड रोल में थे हिमांशु राय और देविका रानी। बता दें कि इस फिल्म के जरिए देश की जनता ने और सिनेमा के प्रेमियों ने पहली बार एक किसिंग सीन (Kissing Scene)  देखा। सबसे रोचक बात यह है कि यह सीन फिल्माने में बहुत वक्त लगा था और कई रीटेक भी लिए गए थे ऐसा भी बोला जाता है कि यह 4 मिनट से लंबा सीन था और इसको लेकर कई बवाल भी मचा था लेकिन अभिनेत्री देविका रानी (Devika Rani)  और अभिनेता हिमांशु राय (Himanshu Rai) इसके कारण काफी सुर्खियां बटोर चुके थे। दोनों किरदारों ने अपना नाम इतिहास में भी शामिल कर लिया ।

पहले का सिनेमा और आज का Bollywood 

उस समय फिल्मों पर कई ज्यादा पैसा तो नहीं लगाया जाता था और एक्टर और एक्ट्रेस के बीच में रोमांस के सीन भी नहीं होते थे और ना ही उन्हें खुलकर दिखाया जाता था । लेकिन आज के दौर में स्थितियां बदली है और कई दृश्य को फिल्माने के लिए नई नई तकनीक का भी बॉलीवुड सहारा ले रही है।

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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8 जनवरी को चुनाव आयोग(Election Commission of India) द्वारा जारी के गए 5 राज्यों के विधान सभा चुनावों(Vidhan Sabha Election 2022) के तारिखों के ऐलान से चुनावी गहमा-गहमी चरम पर है। आपको बता दें कि वर्ष 2022 में 5 अहम राज्यों में विधान सभा चुनाव आयोजित होने जा रहे हैं। यह राज्य हैं उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखण्ड, गोवा एवं मणिपुर। साथ ही उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) में होने जा रहे चुनाव को 7 चरणों में बांटा गया है, मणिपुर 2 चरणों में और गोवा, उत्तराखण्ड, पंजाब(Punjab) में चुनाव 1 चरण में आयोजित किया जाएगा। चुनाव तारीखों के घोषित होने बाद सभी राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं और हर वह हथकंडा अपना रहे हैं जिससे मतदाता आकर्षित हों। साथ ही अब यह भी संभावना अधिक है कि इस बीच चुनावी जमाखोरी बढ़ जाएगी।

पिछले चुनाव में पार्टियों ने कितना खर्च किया था?

आपको जानकारी के लिए बता दें कि 2017 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करीब 5,500 करोड़ रूपये बड़ी पार्टियों द्वारा चुनाव अभियान में खर्च किए गए थे। साथ ही एक मीडिया रेपोर्ट के अनुसार 1000 करोड़ से अधिक पैसा मतदाताओं को पैसे से या शराब से लुभाने में खर्च किए गए थे। आपको यह भी बता दें कि 2017 में ही हुए 5 राज्यों में विधान सभा चुनाव में 1.89 अरब रूपये खर्च किए गए थे, जिसमें बाहरी खर्च कितना था इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है।

इसके साथ विधानसभा में चुनाव आयोग ने निर्धारित की खर्च सीमा प्रति उम्मीदवार 30 लाख तय किया है, किन्तु यह सभी जानते हैं कि इसका पालन नहीं होता है। बल्कि बाहरी खर्च और वोट के लिए नोट का इस्तेमाल कर बेहिसाब पैसा बहाया जाता है। सभी पार्टियां, पार्टी चंदे को भी चुनाव में होने वाले खर्च के लिए इस्तेमाल करती हैं। साथ ही टिकट बिक्री को भी चुनावी जमाखोरी में गिना जा सकता है। हालही में आम आदमी पार्टी के खुदके विधायक ने अरविन्द केजरीवाल पर करोड़ों रुपयों के बदले टिकट बेचने का आरोप लगाया है।
जैसा की आपको पता है कि इस साल होने वाले 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव सभी पार्टियों की नाक की बात बन गई है, जिस वजह से हर कोई अपने-अपने तरीके से लोगों को जुटाने में और चीजों को भुनाने में जुटा हुआ है। चाहे वह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा हो या 'मैं लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ', किन्तु आज भी हम यह कह सकते हैं कि किसी भी प्रदेश ने महिलाओं की सुरक्षा का ठोस आश्वासन नहीं दिया है। इसी तरह भ्रष्टाचार और पैसों की जमाखोरी पर किसी भी सरकार को निर्दोष करार दे देना समझदारी का काम नहीं होगा। आपको बता दें कि एक समय ऐसा भी था जब समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने यह स्वीकारा था कि समाजवादी पार्टी के सरकार में भ्रष्टाचार होता था।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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