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 एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स जो कभी दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी हैंडसेट निर्माता कंपनी थी और 10 साल पहले उसका फीचर फोन कारोबार बुलंदियां छू रहा था, उसके बारे में सोमवार को एक इंडस्ट्री वॉचर ने दोहराया कि वह भारत के बाजार में कभी भी गंभीर दावेदार नहीं थी। एलजी ने अपने मोबाइल व्यवसाय को बंद कर दिया है और हाल के वर्षों में उसने अपने मोबाइल व्यवसाय में बदलाव लाने की कोशिशें की हैं। इसमें फोल्ड होने वाला फोन ‘विंग’ लॉन्च करना भी शामिल है। हालांकि इसकी बिक्री को लेकर स्थिति बहुत ही निराशाजनक रही।


काउंटरपॉइंट रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर तरुण पाठक के मुताबिक एलजी का 2019 में मार्केट शेयर 0.15 फीसदी और 2020 में 0.30 फीसदी रहा।

पाठक ने आईएएनएस को बताया, “2020 में सामने आई यह बढ़ी हुई सेल भी त्योहारी सीजन में हुई बिक्री के कारण थी, वरना कंपनी का मार्केट शेयर 0.15 प्रतिशत पर स्थिर रहता।”

एलजी मध्यम स्तरीय चीनी ब्रांड के फोन और प्रीमियम सेगमेंट के एप्पल, सैमसंग, वनप्लस के बीच सैंडविच की तरह है।

बीते सालों में एलजी के हैंडसेट की बिक्री में आई थी गिरावट।(Pixabay)

इस साल एलजी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स शो (सीईएस) 2021 में रोलेबल डिस्प्ले वाला एक स्मार्टफोन लॉन्च करने वाली थी, लेकिन फिर कंपनी ने इस योजना को रद्द कर दिया।

यह भी पढ़ें: RBI ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर चिंता जताई : Shaktikanta Das

इंडस्ट्री इंटेलीजेंस ग्रुप (आईआईजी) सीएमआर के प्रमुख प्रभु राम ने कहा, “एलजी समय के साथ प्रतिस्पर्धा को मापने में असमर्थ रहा। खासकरके वैल्यू मूल्य के अनुपात में उत्पाद नहीं दे पाया और उत्पाद को लेकर मजबूत संदेश नहीं दे पाया। साथ ही मार्केटिंग कौशल का भी अच्छे से उपयोग नहीं कर पाए।”

मार्केट रिसर्चर काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, पिछले साल 2.47 करोड़ स्मार्टफोन्स की शिपिंग के साथ ही एलजी दुनिया का नौवां सबसे बड़ा स्मार्टफोन विक्रेता था। हालांकि यह साल इसके एक साल पहले से 13 फीसदी कम थी।(आईएएनएस-SHM)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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शोधकर्ताओं ने कोविड के खिलाफ लड़ने में कारगर हिमालयी पौधे की खोज। ( Pixabay )

कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

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