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खेल

बायो-बबल पर कुलदीप यादव ने माना, बिना खेले इसमें रहना काफी मुश्किल

गेंदबाज कुलदीप यादव ने कहा है कि खेलने के अवसरों के बिना बायो-बबल में जीवन कठिन है और खुद को लेकर संदेह पैदा करता है।

चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव (Instagram)

श्रीलंका के खिलाफ रविवार को पहले वनडे मैच में शीर्ष क्रम के दो विकेट लेने वाले चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव ने कहा है कि खेलने के अवसरों के बिना बायो-बबल में जीवन कठिन है और खुद को लेकर संदेह पैदा करता है। 26 वर्षीय कुलदीप ने पिछले 16 महीनों में बहुत कम क्रिकेट खेला है। पिछले 16 महीनों में कुलदीप ने सिर्फ एक टेस्ट, तीन वनडे खेले हैं जबकि उनके हिस्से एक भी टी20 मैच नहीं अयाा है।

यादव ने श्रीलंका के खिलाफ पहले वनडे के बाद वर्चुअल मीडिया इंटरैक्शन के दौरान कहा, बायो-बबल का जीवन मुश्किल है। खासतौर पर ऐसे में अगर आप नहीं खेल रहे हैं। इसके बाद तो आपके मन में संदेह पैदा होने लग जाता है।


कुलदीप ने आगे कहा, ऐसे कई लोग हैं, जो आपसे बात करना चाहते हैं और आपकी मदद करना चाहते हैं, लेकिन अगर आप बहुत से लोगों से बात करते हैं, तो आप अपने भीतर संदेह पैदा करते हैं। यह एक टीम खेल है। कुछ लोगों को मौके मिलते हैं, कुछ को नहीं। हमें अपने मौके का इंतजार करना चाहिए।

भारतीय क्रिकेटर कुलदीप यादव। (Instagram)

यादव और लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल दोनों लंबे समय बाद साथ खेल रहे थे। उन्होंने पिच पर दो-दो विकेट लिए जिससे स्पिनरों को थोड़ी मदद मिली।

उत्तर प्रदेश के गेंदबाज, जो कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए भी खेलते हैं, ने कहा कि वह युजवेंद्र चहल के साथ फिर से खेलकर खुश हैं। दोनों ने भारत को कई सीरीज जीतने में मदद की है, जिसमें 2018 में दक्षिण अफ्रीका में पहली बार वनडे सीरीज जीतना भी शामिल है।

यह भी पढ़ें- टी20 विश्व कप की टीम में जगह बनाने के लिए कुलदीप यादव को दिखाना होगा अपनी फिरकी का कमाल.

कुलदीप ने कहा, मैं बहुत खुश था कि हम लंबे समय के बाद एक साथ खेल रहे हैं। हम एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। जब भी हमें मैदान पर एक-दूसरे की जरूरत होती है, मैं उसका मार्गदर्शन करता हूं और वह मेरा मार्गदर्शन करता है। हम अच्छी बॉन्डिंग है। जब भी हम गेंदबाजी करते हैं तो हम एक-दूसरे के साथ सहज होते हैं। यह जमीन पर दिखता है। जिस तरह से हमने प्रदर्शन किया। यह टीम के लिए बहुत अच्छा था। (आईएएनएस-PS)

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वेल्लोर के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला ( Pixabay)

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कनिष्कर अपने पिता को फाईलें संभालते देखता था, जो दिन पर दिन बढ़ती चली जा रही थीं। जल्द ही वह समझ गया कि उसके पिता की तरह ही अन्य वकील भी थे, जो इसी समस्या से पीड़ित थे। इसलिए जब कनिष्कर को पाठ्यक्रम अपने कोडिंग के प्रोजेक्ट के लिए विषय चुनने का समय आया, तो उसने कुछ ऐसा बनाने का निर्णय लिया, जो उसके पिता की मदद कर सके। वेल्लोर (Vellore) के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला। इस ऐप का मुख्य उद्देश्य वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट के एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करना है। इस ऐप द्वारा यूजर्स साईन इन करके अपने काम को नियोजित कर सकते हैं और क्लाईंट से संबंधित दस्तावेज एवं केस की अन्य जानकारी स्टोर करके रख सकते हैं। इस ऐप के माध्यम से यूजर्स सीधे क्लाईंट्स से संपर्क भी कर सकते हैं। जिन क्लाईंट्स को उनके वकील द्वारा इस ऐप की एक्सेस दी जाती है, वो भी ऐप में स्टोर किए गए अपने केस के दस्तावेज देख सकते हैं।

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