Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
देश

केले, जूट, बांस और अन्य 25 प्राकृतिक फाइबर का उपयोग कर साड़ी बनाई गई।

चेन्नई के अनाकपुथुर की तीसरी पीढ़ी के बुनकर सी. सेकर ने केले, जूट, बांस, अनानास और अन्य सहित 25 प्राकृतिक फाइबर का उपयोग कर साड़ी बनाई थी और लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में अपना नाम दर्ज करवाया था।

चेन्नई (Chennai) के अनाकपुथुर की तीसरी पीढ़ी के बुनकर सी. सेकर ने 2011 में केले (banana), जूट (Jute), बांस (Bamboo), अनानास (Pineapple) और अन्य सहित 25 प्राकृतिक फाइबर का उपयोग कर साड़ी बनाई थी और लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में अपना नाम दर्ज करवाया था। यहां तक कि अपनी हालिया चेन्नई यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी सराहना की थी। अनाकपुथुर चेन्नई का एक उपनगर है जो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से परे अडयार नदी (Adyar river) के तट पर स्थित है। यह स्थान एक समय अपने बुनकरों के लिए जाना जाता था। लेकिन आज, एक प्रतिस्पर्धी इंडस्ट्री और मार्केटिंग की विफलता के कारण, हैंडलूम और बुनकरों की संख्या में गिरावट आई है।


सेकर और उनका परिवार पारंपरिक बुनकर थे, और 1970 में मुख्य रूप से अफ्रीका (Africa) में नाइजीरिया में यहां के उत्पाद निर्यात किए जा रहे थे। मद्रास के चेक कपड़े प्रमुख उत्पाद थे, जिसे अनाकपुथुर बुनकर निर्यात कर रहे थे और अफ्रीका में राजनीतिक माहौल में बदलाव के साथ आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिससे अनाकपुथुर बुनकरों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था।

कुछ समय बाद प्राकृतिक उत्पादों और टिकाऊ उत्पादों की मांग में वृद्धि हुई और एक फैशन स्टेटमेंट में बदलाव आ गया। सेकर ने अपने उद्योग को टिकाऊ मोड में बदलने के बारे में सोचा और साड़ियों (Sarees) को केले के फाइबर से बनाने की कोशिश की।

सेकर और उनके अनाकपुथुर बुनकर क्लस्टर में लगभग 100 लोग हैं, जिनमें से अधिकांश महिला (Womens) स्वयं सहायता समूहों के साथ काम कर रही हैं, उन्होंने शुरूआत केले के रेशे से बने धागों से की। केले और पौधे दक्षिण भारत में बहुतायत में हैं और सेकर अपने फाइबर को यार्न में बदलने के लिए केले के पौधों की बड़ी मात्रा का उपयोग करते हैं।

सेकर ने कहा, “वास्तव में, यह एक चुनौती थी और कोई मॉडल नहीं था, लेकिन हमने इस पर काम किया। और हमने केले के तनों से निकाले गए केले के रेशों से धागा बनाया। पिछले कुछ वर्षों में, हमने केले की फाइबर से उत्पादित यार्न से बनी इन सैकड़ों साड़ियों को बेचा है।”

एक साड़ी बनाने में एक ही बुनकर इस पर काम कर रहा है तो उसके लिए 4 से 5 दिन की आवश्यकता होगी। (Pexel)

भले ही केले के तने बड़ी मात्रा में उपलब्ध हों, फिर भी तने से फाइबर (Fiber) को मैन्युअल रूप से निकालने की प्रक्रिया में समय लगता है और केले या अनानास के तने को सूखाना पड़ता है और फिर यार्न बनाने के लिए फाइबर को मैन्युअल रूप से निकाला जाता है।

यहां प्राकृतिक रंगों (Colours) का उपयोग किया जाता है और इन रंगों को बनाने के लिए मुख्य रूप से हल्दी और इंडिगो का उपयोग किया जाता है।

सेकर कहते हैं, “फिर यार्न को विभिन्न जड़ी-बूटियों, मसालों और यहां तक कि गाय के गोबर में उनके जीवाणुरोधी गुणों के लिए इलाज किया जाता है। तुलसी (Tulsi) और पुदीना (Wild mint) जैसी औषधीय जड़ी-बूटियों का भी उपयोग किया जाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि इन कपड़ों के उपयोगकर्ताओं को स्किन एलर्जी न हो।”

एक साड़ी बनाने में दो बुनकरों को दो दिन लगते हैं और अगर एक ही बुनकर इस पर काम कर रहा है तो उसके लिए 4 से 5 दिन की आवश्यकता होगी। प्रत्येक साड़ी की कीमत 1,800 से 10,000 रुपये के बीच होती है, लेकिन सेकर ने कहा कि उच्च मांग होने के बावजूद, कोविड-19 ने व्यवसाय पर एक चोट किया है, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है।

यह भी पढ़ें :- यूपी सरकार की एक और पहल, कुशीनगर में शुरू हुआ ‘बनाना फेस्टिवल’

सेकर को अपने उत्पाद को दुनिया के सभी हिस्सों में ले जाने और दुनिया के प्रत्येक शहर में अपनी साड़ी का एक रिटेल आउटलेट खोलने की महत्वाकांक्षा है और वह प्रधानमंत्री मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) टैग को वैश्विक बनाने के विजन को आगे बढ़ाना चाहते हैं। (आईएएनएस-SM)
 

Popular

प्रमुख हिंदू नेता और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नतेसन (wikimedia commons)

हमारे देश में लव जिहाद के जब मामले आते है , तब इस मुद्दे पर चर्चा जोर पकड़ती है और देश कई नेता और जनता अपनी-अपनी राय को वयक्त करते है । एसे में एक प्रमुख हिंदू नेता और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नतेसन ने सोमवार को एक बयान दिया जिसमें उन्होनें कहा कि यह मुस्लिम समुदाय नहीं बल्कि ईसाई हैं जो देश में धर्मांतरण और लव जिहाद में सबसे आगे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एनडीए के सहयोगी और भारत धर्म जन सेना के संरक्षक वेल्लापल्ली नतेसन नें एक कैथोलिक पादरी द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया दी , जिसमे कहा गया था हिंदू पुरुषों द्वारा ईसाई धर्म महिलाओं को लालच दिया जा रहा है। नतेसन नें पाला बिशप जोसेफ कल्लारंगट की एक टिप्पणी जो कि विवादास्पद "लव जिहाद" और "मादक जिहाद" की भी जमकर आलोचना की और यह कहा कि इस मुद्दे पर "मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाना सही नहीं है"।

Keep Reading Show less

महंत नरेंद्र गिरि (Wikimedia Commons)

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की सोमवार को संदिग्ध हालात में मौत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को बाघंबरी मठ स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों को जांच के बाद सजा दी जाएगी। उन्होंने कहा ''यह एक दुखद घटना है और इसी लिए अपने संत समाज की तरफ से, प्रदेश सरकार की ओर से उनके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करने के लिए में स्वयं यहाँ उपस्थित हुआ हूँ। अखाड़ा परिषद और संत समाज की उन्होंने सेवा की है। नरेंद्र गिरि प्रयागराज के विकास को लेकर तत्पर रहते थे। साधु समाज, मठ-मंदिर की समस्याओं को लेकर उनका सहयोग प्राप्त होता था। उनके संकल्पों को पूरा करने की शक्ति उनके अनुयायियों को मिले''

योगी आदित्यनाथ ने कहा '' कुंभ के सफल आयोजन में नरेंद्र गिरि का बड़ा योगदान था। एक-एक घटना के पर्दाफाश होगा और दोषी अवश्य सजा पाएगा। मेरी अपील है सभी लोगों से की इस समय अनावश्यक बयानबाजी से बचे। जांच एजेंसी को निष्पक्ष रूप से कार्यक्रम को आगे बढ़ाने दे। और जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा उसको कानून की तहत कड़ी से कड़ी सजा भी दिलवाई जाएगी।

Keep Reading Show less

By: कम्मी ठाकुर, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तम्भकार, हरियाणा

केजरीवाल सरकार की झूठ, फरेब, धूर्तता और भ्रष्टाचार की पोल खोलता 'बोल रे दिल्ली बोल' गीतरुपी शब्दभेदी बाण एकदम सटीक निशाने पर लगा है। सुभाष, आजाद, भगतसिंह जैसे आजादी के अमर शहीद क्रांतिकारियों के नाम व चेहरों को सामने रखकर जनता को बेवकूफ बना सुशासन ईमानदारी और पारदर्शिता का सब्जबाग दिखाकर सत्ता पर काबिज हुए अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी सरकार आज पूरी तरह से मुस्लिम तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार, कुशासन एवं कुव्यवस्था के दल-दल में धंस चुकी है। आज केजरीवाल का चाल, चरित्र और चेहरा पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है। दिल्ली में कोविड-19 के दौरान डॉक्टरों सहित सैकड़ों विभिन्न धर्म-संप्रदाय के मेडिकल स्टाफ के लोगों ने बतौर कोरोना योद्धा अपनी जाने गंवाई थी। लेकिन उन सब में केजरीवाल के चश्मे में केवल मुस्लिम डॉक्टर ही नजर आया, जिसके परिजनों को 'आप सरकार' ने एक करोड़ की धनराशि का चेक भेंट किया। किंतु बाकी किसी को नहीं बतौर मुख्यमंत्री यह मुस्लिम तुष्टिकरण, असंगति, पक्षपात आखिर क्यों ?

Keep reading... Show less