Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
दुनिया

ओमिक्रॉन को देखते हुए हुआ​ लॉकडाउन​ तो पड़ेगा महंगा-डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, ओमिक्रॉन वैरिएंट के खतरे को कम करने के लिए लॉकडाउन लागू करना बहुत महंगा साबित हो सकता है और इसे अंतिम उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

ओमिक्रॉन को देखते हुए हुआ लॉकडाउन तो पड़ेगा महंगा! (Image: Pixabay)

कोविड-19(Covid 19) का नया सुपर म्यूटेंट ओमिक्रॉन वैरिएंट(Omicron Variants) काफी खतरनाक बताया जा रहा है, जिसमें स्पाइक प्रोटीन पर 30 से अधिक म्यूटेंट बताए जा रहे हैं, जो मानव कोशिकाओं को बुरी तरह से संक्रमित करने में सक्षम हैं। यह वैरिएंट सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था और इसके बाद यह तेजी से फैल रहा है और इसकी चपेट में भारत, श्रीलंका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, नीदरलैंड और ब्रिटेन सहित 24 से अधिक देश आ चुके हैं।

निश्चित ही सभी देश इस वैरीअंट(Omicron Variants) को रोकने के लिए लॉकडाउन(Lockdown) जैसे बड़े फैसले पर विचार कर रहे हैं। लेकिन डब्ल्यूएचओ ने लॉकडाउन को सही फैसला नहीं बताया है, जबकि अंतिम उपाय के रुप मे लॉकडाउन(Lockdown) को बताया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ओमिक्रॉन वैरिएंट के खतरे को कम करने के लिए लॉकडाउन लागू करना बहुत महंगा साबित हो सकता है और इसे अंतिम उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।


डब्ल्यूएचओ(WHO) में दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल(Poonam Khetrapal) कहा, "वायरस के संचरण को कम करने के लिए लॉकडाउन(Lockdown) लगाने का विकल्प, हालांकि प्रभावी है, मगर यह एक बहुत महंगा उपाय है और इसे अंतिम उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हम वायरस और इसके वैरिएंट्स को फैलने, आगे बढ़ने और हमें चुनौती देना जारी नहीं रख सकते हैं और न ही ऐसा होने देना चाहिए। हमें इसके प्रसार को कम करने के लिए हर संभव प्रयास करने की आवश्यकता है।"


Poonam Khetrapal, WHO डब्ल्यूएचओ में दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल(Twitter)


डॉ. पूनम खेत्रपाल(Poonam Khetrapal) ने कहा, "किसी भी नए वैरिएंट के आने और मौजूदा वायरस और इसके वैरिएंट्स के संचरण का तेजी से पता लगाने के लिए निगरानी को मजबूत करने, कैलिब्रेटेड सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक उपायों को लागू करने और टीकाकरण कवरेज को बढ़ाने पर हमारा ध्यान केंद्रित होना चाहिए।"

हालांकि ओमिक्रॉन(Omicron) की गंभीरता, जोखिम और प्रतिरक्षा से बचने की क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए अध्ययन चल रहे हैं। प्रारंभिक परीक्षणों से पता चला है कि यह वैरिएंट अन्य के मुकाबले काफी तेजी से फैल सकता है, जिससे जल्दी ही मामलों में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा उन्होंने(Poonam Khetrapal) कहा, "हालांकि यह मान लेना उचित होगा कि वर्तमान में उपलब्ध टीके गंभीर बीमारी और मृत्यु से सुरक्षा प्रदान करते हैं।" उन्होंने कोविड 19 टीकाकरण कवरेज में तेजी लाने के प्रयासों को और तीव्र करने पर जोर दिया।

दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से ओमिक्रॉन वैरिएंट(Omicron Variants) के बारे में सामने आई खबरों के बाद, अमेरिका और ब्रिटेन सहित कई देशों ने कई अफ्रीकी देशों के यात्रियों के लिए यात्रा प्रतिबंध या क्वारंटीन अवधि के नियम लागू करने का फैसला किया है। लेकिन खेत्रपाल(Poonam Khetrapal) के अनुसार, सामूहिक यात्रा प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय वायरस प्रसार को नहीं रोकेंगे और इसके बजाय, यह जीवन और आजीविका पर भारी बोझ डाल देगा।

यह भी पढ़े - कोरोना से मौत होने का खतरा हुआ दोगना!

इसके अलावा, इस तरह के प्रतिबंध महामारी विज्ञान और सीक्वेंसिंग डेटा की रिपोर्ट करने और इसे साझा करने के लिए देशों को हतोत्साहित करके एक महामारी के दौरान वैश्विक स्वास्थ्य प्रयासों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने कहा(Poonam Khetrapal) कि मास्क का उपयोग, शारीरिक दूरी, इनडोर स्थान का वेंटिलेशन, भीड़ से बचना और हाथ की स्वच्छता कोविड-19(Covid -19) के संचरण को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है, यहां तक कि उभरते हुए वैरिएंट्स(Omicron Variants) से बचने के लिए भी यह प्रभावी उपाय हैं।

Popular

'संभावित रूप से हानिकारक' कंटेंट की विजिबिलिटी को कम करेगा इंस्टाग्राम (Wikimedia Commons)

मेटा(Meta) के स्वामित्व वाला फोटो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) अपने ऐप में 'संभावित रूप से हानिकारक' कंटेंट को कम दिखाई देने के लिए नए कदम उठा रहा है। एनगैजेट की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने कहा कि यूजर्स के फीड और स्टोरीज में पोस्ट करने के तरीके को सशक्त करने वाला एल्गोरिदम अब ऐसे कंटेंट को प्राथमिकता देगा, जिसमें 'बदमाशी, अभद्र भाषा या हिंसा भड़काने वाली सामग्री हो सकती है।'

इंस्टाग्राम के नियम पहले से ही इस प्रकार की अधिकांश सामग्री को प्रतिबंधित करते हैं, जबकि परिवर्तन सीमा रेखा पोस्ट या कंटेंट को प्रभावित कर सकता है जो अभी तक ऐप के मॉडरेटर तक नहीं पहुंची है। कंपनी ने एक अपडेट में बताया, "यह समझने के लिए कि क्या कोई चीज हमारे नियमों को तोड़ सकती है, हम चीजों को देखेंगे जैसे कि कैप्शन एक कैप्शन के समान है जो पहले हमारे नियमों को तोड़ता था।"

Keep Reading Show less

सरकार ने यह करके बिल्कुल सही कदम उठाया है, अमर जवान ज्योति अस्थाई थी: जेबीएस यादव (Wikimedia Commons)

दिल्ली इंडिया गेट पर जलने वाली अमर जवान ज्योति का नेशनल वॉर मेमोरियल में विलय हो गया, सरकार के इस फैसले को डेप्युटी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ से 2005 में रिटायर्ड हुए लेफ्टिनेंट जनरल जेबीएस यादव ने इसे बिल्कुल सही ठहराया है। दरअसल इंडिया गेट पर पिछले 50 साल से अमर जवान ज्योति जल रही है। वहीं 25 फरवरी, 2019 को नेशनल वॉर मेमोरियल में अमर जवान ज्योति प्रज्वलित की गई थी।

साल 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर हिंदुस्तानी सेना को कमांड कर रहे, लेफ्टिनेंट जनरल जेबीएस यादव ने आईएएनएस को बताया कि, सरकार ने यह करके बिल्कुल सही कदम उठाया है, अमर जवान ज्योति अस्थाई थी। उस वक्त हमारे पास नेशनल वॉर मेमोरियल नहीं था और अंग्रेजों का बना हुआ था। फिर इसमें बदलाव करके अमर जवान ज्योति लगाई गई थी।

Keep Reading Show less

नेताजी भारतीय लोगों के दिलों में थे, हैं और आगे भी रहेंगे। ( Wikimedia Commons )

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती समारोह पराक्रम दिवस के अंग के तौर पर आयोजित एक वेबिनार में जर्मनी से शामिल हुईं नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी डॉ. अनीता बोस फाफ ने कहा कि नेताजी के पास भारत की वित्तीय और आर्थिक मजबूती के लिए एक विजन था और भारत को आजादी मिलने से पहले ही उन्होंने एक योजना आयोग का गठन कर लिया था।

जर्मनी से इस वेबिनार को संबोधित करते हुए डॉ. अनीता बोस फाफ ने कहा कि नेताजी भारतीय लोगों के दिलों में थे, हैं और आगे भी रहेंगे। उन्होंने कहा कि हालांकि उनके पिता एक धर्मनिष्ठ हिंदू थे लेकिन उनके मन में सभी धर्मों के लिए सम्मान था। उनके पिता ने एक ऐसे भारत की कल्पना की थी जहां सभी धर्म के लोग शांतिपूर्वक सह-अस्तित्व में रहते हों। उन्होंने कहा कि नेताजी लैंगिक समानता के हिमायती थे। उनका दृष्टिकोण एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना था जहां पुरुषों और महिलाओं को न केवल समान अधिकार हों, बल्कि वे समान कर्तव्यों का पालन भी कर सकें।

Keep reading... Show less