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मनोरंजन

माधुरी दीक्षित: यशजी एक बहुत ही प्रगतिशील निर्देशक थे|

बॉलीवुड की डांसिंग डिवा माधुरी दीक्षित नेने मानती हैं कि, दिवंगत फिल्म निर्माता यश चोपड़ा बहुत ही प्रगतिशील फिल्म निर्माता थे |

बॉलीवुड की डांसिंग डिवा माधुरी दीक्षित नेने|(Madhuri Dixit Nene) (सोशल मीडिया)

बॉलीवुड की डांसिंग डिवा माधुरी दीक्षित नेने (Madhuri Dixit Nene) मानती हैं कि, दिवंगत फिल्म निर्माता यश चोपड़ा (Yash Chopra) बहुत ही प्रगतिशील फिल्म निर्माता थे और उन्होंने हमेशा समय के साथ अच्छा तालमेल बिठाया। माधुरी ने हाल ही में अपने प्रशंसकों के साथ बातचीत करते हुए अपनी राय व्यक्त की, जहां उनके फैन क्लब ने हैशटैग मैडजनेस अवार्ड बनाया। ये माचिस की डिब्बियों का उपयोग करके बनाए गए पुरस्कार हैं और स्मृति चिन्ह के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं। प्रशंसकों के वोटों के आधार पर पुरस्कारों की श्रेणियां तय की गईं हैं।

बातचीत के दौरान, चोपड़ा की ‘दिल तो पागल है’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ संगीत और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार घोषित किया गया।


माधुरी ने कहा कि एक निर्माता और निर्देशक के रूप में यश चोपड़ा (Left) बहुत ही पेशेवर’ थे। (सांकेतिक चित्र, ट्विटर)

माधुरी ने कहा “यशजी एक बहुत ही प्रगतिशील निर्देशक थे और उन्होंने हमेशा समय के साथ तालमेल बिठाया। उनकी ‘दीवार’, ‘दाग’, ‘काला पत्थर’ जैसी कई फिल्में बहुत प्रगतिशील हैं।”

उन्होंने आगे कहा “जब मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला, तो मैंने स्क्रिप्ट सुनी और उनसे प्यार हो गया। फिल्म प्यार के बारे में थी और एक लड़की कैसे मानती है कि वह अपनी आत्मा से मिलेगी, जो मैं सोचती हूं मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था जब मैं श्रीराम नेने से मिली थी।”

यह भी पढ़ें :- अभिनेताओं के पास अब कुछ ‘हटके’ करने का मौका: नीना गुप्ता

माधुरी ने कहा कि एक निर्माता और निर्देशक के रूप में यश चोपड़ा ‘बहुत ही पेशेवर’ थे। उन्होंने कहा “मुझे उनके बारे में जो सबसे ज्यादा पसंद आया कि वह कलाकारों को अपना काम करने के लिए स्वतंत्र छोड़ते थे।” (आईएएनएस-SM)

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एप्पल वॉच,सांकेतिक चित्र (Pixabay)

एक नए अध्ययन से जानकारी समाने आया है कि एप्पल वॉच सीरीज 6 'नियंत्रित परिस्थितियों में फेफड़ों की बीमारियों के रोगियों में हृदय गति और ऑक्सीजन संतृप्ति (एसपीओ2) प्राप्त करने का एक विश्वसनीय तरीका है।'

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन ने 9टू5मैक की रिपोर्ट 'एप्पल वॉच डिवाइस कमर्शियल ऑक्सीमीटर के बीच मजबूत सकारात्मक सहसंबंध' देखा गया है।

ऐप्पल वॉच या वाणिज्यिक ऑक्सीमीटर उपकरणों में त्वचा के रंग, कलाई की परिधि, कलाई के बालों की उपस्थिति और एसपीओ 2 के लिए तामचीनी कील और हृदय गति माप के मूल्यांकन में कोई सांख्यिकीय अंतर नहीं था।

साओ पाउलो विश्वविद्यालय की ओर से अध्ययन एक आउट पेशेंट न्यूमोलॉजी क्लिनिक से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और इंटरस्टिशियल लंग डिजीज के 100 रोगियों के साथ किया गया।

इसने ऐप्पल वॉच सीरीज 6 के साथ एसपीओ 2 और हृदय गति डेटा एकत्र किया और उनकी तुलना दो वाणिज्यिक पल्स ऑक्सीमीटर से की।

परीक्षण स्वस्थ व्यक्तियों, इंटरस्टीशियल लंग डिजीज और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज वाले लोगों के साथ किए गए थे।

oximeter, corona virus, covid 19 कोरोना काल में ऑक्सीमीटर का सबसे अधिक उपयोग किया गया है।(Pixabay)

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बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार। (Twitter, Nitish Kumar)

जातीय जनगणना को लेकर बिहार में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दो बडे दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (युनाइटेड) अब सीधे तौर पर आमने-सामने नजर आने लगे हैं। केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार जहां जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार कर रही है वहीं जदयू के नेता नीतीश कुमार इस मामले को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ मुखर हैं। ऐसे में कयास लगाया जाने लगा है कि क्या फिर से बिहार की सियासी समीकण बदलेंगे। हालांकि इस मुद्दे को लेकर कोई भी नेता अब तक खुलकर बात नहीं कर रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली में रविवार को स्पष्ट कर चुके हैं कि जाति जनगणना देश के लिए जरूरी है। उन्होंने दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना करानी चाहिए। इसके कई फायदे हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के पहले जनगणना हुई थी, आजादी के बाद नहीं हुई। जातीय जनगणना होगी तभी लोगों के बारे में सही जानकारी होगी। तब पता चलेगा कि जो पीछे है, उसे आगे कैसे किया जाए। जातीय के साथ उपजातीय जनगणना भी कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर एक बार फिर राज्य में सभी दलों के साथ बैठक कर आगे का निर्णय लेंगे। नीतीश के इस बयान के बाद तय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातिगत जनगणना के मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इधर, भाजपा के नेता इसमें व्यवहारिक दिक्कत बता रहे हैं।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि तकनीकी और व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना संभव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।


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अगरबत्ती उपयोग पर त्रिपुरा अपने खोए हुए गौरव को वापस पाने का संभव कोशिश कर रहा है। (Unsplash)

अगरबत्ती उपयोग पर त्रिपुरा अपने खोए हुए गौरव को वापस पाने का संभव कोशिश कर रहा है, जिसे पहले वियतनाम और चीन द्वारा नियंत्रण किया जा रहा था। त्रिपुरा इंडस्ट्रियल विकास निगम के अधिकारियों के अनुसार राज्य में बांस की छड़ियों का उत्पादन में भारी गिरावट आई है 2010 में 29,000 मीट्रिक टन से गिरकर 2017 में 1,241 मीट्रिक टन हो गया था, क्योंकि भारत कि प्रतिवर्ष 70,000 (96 प्रतिशत) मीट्रिक टन गोल बास की छड़ियां (46प्रतिशत) वियतनाम और (47 प्रतिशत) चीन द्वारापूरी की जा रही थी।

टीआईडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि 2019 में, केंद्र सरकार ने सीमा शुल्क 25 प्रतिशत बढ़ा दिया और बांस के उत्पादों को प्रतिबंधित सूची में शामिल कर दिया गया, जिससे दूसरे देशों के लिए समस्या उत्पन्न हुई। वर्तमान में, पूर्वोत्तर राज्य 2,500 मीट्रिक टन बांस की छड़ें पैदा कर रहा है और आने वाले कुछ वर्षों में उत्पादन (12,000 मीट्रिक टन) पढ़कर हो जाएगा, क्योंकि आधुनिक मशीनों के साथ 14 और नई बांस की छड़ें निर्माण इकाइयां जल्द ही पूरे राज्य में आ जाएंगी।उन्होंने कहा, पहले त्रिपुरा के कारीगर हाथ से बांस की छड़ें बनाते थे ,परंतु कुछ साल पहले सरकार ने उनकी अनुकूल मशीन खरीदने में सहायता की।

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