Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
देश

पहले आसिफ पर रोना अब मंदिर की आरती में रोड़ा, आखिर कब तक?

'शांतिप्रिय' समुदाय आरती के समय मंदिर में हंगामा करने चले आए। उन्होंने 'अल्लाह-हु-अकबर' चिल्लाने के साथ-साथ वहां चल रहे अनुष्ठानों को भी रोकने का भी प्रयास किया। 

मछिंदरनाथ मंदिर में आरती के समय शांतिप्रिय समुदाय ने मचाया उत्पात।(Pixabay)
  • 28 मार्च 2021 को महाराष्ट्र में मच्छिंद्रनाथ के प्राचीन मंदिर में 50 से 60 मुस्लिम समुदाय के लोग ‘अल्लाह-हु-अकबर’ चिल्लाते हुए मंदिर में हंगामा करने लगे। यह घटना तब हुई जब वहां पर भक्त पारम्परिक संध्या आरती कर रहे थे। यह 28 मार्च की घटना थी, किन्तु इस घटना को जनता के बीच आने में इसलिए समय लगा क्योंकि लिब्रलधारी मीडिया ने इस घटना को बताने की रत्ती-भर भी रुचि दिखाई। इस घटना के सबूत के तौर पर एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें शांतिप्रिय समुदाय के लोग मंदिर में धर्म-विशेष नारे लगा रहे हैं और भक्तों के साथ हाथापाई पर उतर आएं हैं।

प्रथा अनुसार हर वर्ष मछिंद्रनाथ के सम्मान में भक्त श्रीमालंग यात्रा करते हैं, जिनमे उनकी आस्था अधिक है। किन्तु कोरोना महामारी की वजह से इसे स्थगित करना पड़ा और मंदिर में ही अनुष्ठान को करने की अनुमति दी गई। इस बीच कम लोगों को ही उपस्थित रहने की अनुमति दी गई थी,  जिनमे से केवल सात लोग ही आरती में शामिल हुए थे। किन्तु उन शांतिप्रिय लोगों को यह आज़ादी भी रास नहीं आई और मंदिर में हंगामा करने चले आए। उन्होंने ‘अल्लाह-हु-अकबर’ चिल्लाने के साथ-साथ वहां चल रहे अनुष्ठानों को भी रोकने का भी प्रयास किया।


इस वीडियो के वायरल होने के बाद कुछ मीडिया संगठनों ने भी मोर्चा संभाला। किन्तु लिब्रलधारी मीडिया जैसे The Wire या अन्य संगठनों ने इस पर चर्चा भी नहीं की है। यही नहीं महाराष्ट्र के ही अकोला जिले में 28 मार्च को ही इन शांतिप्रिय समुदाय के लगभग 300 लोगों ने जलती होलिका पर पानी डाल दिया और पैरों से मार-मारकर बुझा दिया था । यह घटना वहां हुई है जहाँ मुस्लिम समुदाय के अधिकांश लोग रहते हैं। जिस मंदिर में यह घटना हुई उसे उदासी मठ के नाम से जाना जाता है जो कि काफी प्राचीन मंदिरों में से एक है। इस घटना का सबूत देते हुए ‘स्वानंद कोंडीलकर’ ने एक वीडियो साझा किया जिसमे मुस्लिम लोग होलिका को पानी से बुझाते दिखाई दे रहे हैं। वह मराठी में ट्वीट करते हैं जिसका हिंदी अनुवाद है कि “पोला चौक, अकोला में एक प्राचीन हनुमान मंदिर (उदासी मठ) है। मंदिर मुस्लिम बहुल इलाके में है। यह मंदिर पिछले कई वर्षों से उपेक्षित है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से इलाके के हिंदू युवाओं ने हर शनिवार हनुमान चालीसा और आरती करना शुरू कर दिया है।”

अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा कि “कल, इलाके के युवाओं ने मंदिर के सामने होलिका जलाने का फैसला किया। स्थानीय मुसलमानों ने होलिका जलाने का विरोध किया। विरोध में होलिका जलाई गई। इसके तुरंत बाद, 200 से 300 मुस्लिम भीड़ इकट्ठा हुई और होलिका पर पानी डाला गया। अकोला में यही स्थिति …”

यह भी पढ़ें: Dasna Temple: वह मंदिर पर थूकते रहें और हम ‘सॉरी’-‘सॉरी’ कहें!

विचार करने की बात यह है कि यदि भारत सांप्रदायिक सद्भाव के लिए विश्वभर में प्रसिद्द है, तो हमले और आलोचनाओं के कटाक्ष हिन्दू ही क्यों सहते हैं? आखिर एक सनातनी कितना सहनशील रहेगा? हिन्दू बहुल राष्ट्र में यदि मुस्लिम समुदाय होलिका जलाने पर विरोध कर सकते हैं, तो यह एकता और भाईचारे का ढोंग क्यों? इन दोनों घटनाओं के बाद हिन्दू समाज में गुस्से का माहौल है और वह सभी पुलिस से उन उपद्रवियों पर करवाई करने का 4 दिन का अल्टीमेटम भी दे चुके हैं।

Popular

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

Keep Reading Show less

राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

Keep Reading Show less

शोधकर्ताओं ने कोविड के खिलाफ लड़ने में कारगर हिमालयी पौधे की खोज। ( Pixabay )

कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

Keep reading... Show less