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प्राकृतिक चिकित्सा के प्रसार में दिया था महात्मा गांधी ने अहम योगदान

केंद्र सरकार के आयुष एवं रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने कहा कि महात्मा गांधी ने प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी (Wikimedia Commons)

केंद्र सरकार के आयुष एवं रक्षा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने कहा कि महात्मा गांधी ने प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। उन्होंने 18 नवंबर 1946 को पुणे में ऑल इंडिया नेचर की ओर फाउंडेशन की स्थापना की थी। इसलिए आयुष मंत्रालय ने 2018 में 18 नवंबर को राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पुणे में 300 करोड़ बजट से नेचुरोपैथी अनुसंधान केंद्र और सुविधा युक्त चिकित्सालय बनाने की स्वीकृति दे दी गई है।

केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाइक ने एक अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड-19 के समय यह सभी लोग समझ गए हैं कि प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में प्राकृतिक चिकित्सा, योग, आयुर्वेद आदि आयुष पद्धतियों की मुख्य भूमिका है।


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख रामलाल ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा में संयम होना आवश्यक है। तभी हम प्रकृति के पांचों तत्व का प्रयोग हम कर पाएंगे। तीव्र रोग शरीर से हमारे विजातीय तत्व बाहर निकलते हैं। अत: हमें घबराना नहीं चाहिए। प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाना चाहिए।

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गुरुग्राम विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मार्कण्डेय आहूजा ने कहा कि प्राकृतिक जीवन शैली हमारे जीवन का अंग है। यदि हम प्राकृतिक जीवन छोड़ते हैं तो बीमार होने लगते हैं। लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा से हम फिर से स्वस्थ होकर अपनी शक्ति प्राप्त करते हैं।

त्रिनिनाद से कार्यक्रम में वर्चुअल हिस्सा लेते हुए स्वामी बह्मदेव ने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद हमारी जीवन शैली है। जिसका प्रभाव बढ़ रहा है। 2021 में आयुर्वेद का अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार कराया जाएगा। अध्यक्षता प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय ने की। नवयोग सूर्योदय सेवा समिति के संस्थापक डॉ. नवदीप जोशी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार के माध्यम से जन-जन तक प्राकृतिक चिकित्सा को फैलाने का अच्छा प्रयास किया गया है। राष्ट्रीय योगासन प्रतियोगिता में 28 राज्यों से 553 लोगों ने भाग लिया। 18 अक्टूबर से चल रहे अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार में 3 लाख से अधिक लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिसमें 20 विश्वविद्यालयों के कुलपति, देश-विदेश के 80 प्राकृतिक चिकित्सक और विद्वान उपस्थित हुए।(आईएएनएस)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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शोधकर्ताओं ने कोविड के खिलाफ लड़ने में कारगर हिमालयी पौधे की खोज। ( Pixabay )

कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

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