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दुनिया

स्विट्जरलैंड के चमगादड़ों में आसानी से इंसानों में फैलने वाले कई वायरस मिले

स्विट्जरलैंड में चमगादड़ 39 विभिन्न वायरल परिवारों के वायरस को शरण दिए हुए हैं और इनमें से कुछ में तो मनुष्यों में बीमारी पैदा करने की भी क्षमता है|

चमगादड़ 39 (Bat 39) विभिन्न वायरल परिवारों के वायरस को शरण दिए (अपने अंदर समाए) हुए हैं| (Pixabay)

स्विट्जरलैंड (Switzerland) में चमगादड़ 39 (Bat 39) विभिन्न वायरल परिवारों के वायरस को शरण दिए (अपने अंदर समाए) हुए हैं और इनमें से कुछ में तो मनुष्यों सहित अन्य जानवरों में संचारित होने और बीमारी पैदा करने की भी क्षमता है। शोधकर्ताओं ने एक नए शोध में यह दावा किया है। दुनिया भर में चमगादड़ों द्वारा अपने शरीर में आश्रय दिए गए वायरस की निगरानी से उन वायरस की समझ और पहचान में सुधार हो सकता है, जो मनुष्यों के लिए जोखिम पैदा करते हैं और दुनिया अपने आपको इस तरह की एक और महामारी के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकती है।

पिछले कुछ शोध या स्टडी में कई अलग-अलग देशों में चमगादड़ों पर विभिन्न प्रकार के वायरस (Virus) को लेकर जांच की गई है, लेकिन अभी तक किसी भी स्टडी का ध्यान स्विट्जरलैंड पर केंद्रित नहीं हुआ था।


हालांकि अब ज्यूरिख विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने स्विट्जरलैंड में रहने वाले 7,000 से अधिक चमगादड़ों पर वायरस की जांच की है। ये चमगादड़ स्थिर और प्रवासी चमगादड़ों की 18 प्रजातियों से संबंध रखते हैं। विशेष रूप से, उन्होंने चमगादड़ से एकत्र किए गए अंग, मल या उनके द्वारा मल त्याग करने वाले स्थानों से नमूनों में पाए जाने वाले वायरस के डीएनए और आरएनए अनुक्रमों का विश्लेषण किया है।

जीनोमिक विश्लेषण से वायरस के 39 विभिन्न परिवारों की उपस्थिति का पता चला, जिनमें 16 परिवार पहले अन्य धमनियों (कशेरुकी) को संक्रमित करने में सक्षम पाए गए और इसलिए संभावित रूप से यह अन्य जानवरों या मनुष्यों में संचारित हो सकते हैं।

इस जोखिम वाले वायरस के आगे के विश्लेषण से पता चला है कि अध्ययन किए गए बैट कॉलोनियों में से एक ने मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम (एमईआरएस) से संबंधित कोरोनावायरस (सीओवी) के रूप में जाने जाने वाले वायरस के लगभग-पूर्ण जीनोम को आश्रय दिया।

चमगादड़ों में पाए जाने वाले कुछ वायरस अन्य जानवरों में आसानी से पहुंच सकते हैं और यहां तक कि यह मनुष्यों में भी फैल सकते हैं। (Pixabay)

जबकि एमईआरएस-सीओवी से संबंधित वायरस मनुष्यों में बीमारी पैदा करने के लिए नहीं जाना जाता है, एमईआरएस-सीओवी 2012 में एक महामारी के लिए जिम्मेदार रहा है। ये निष्कर्ष ओपन-एक्सेस जर्नल प्लोस वन में प्रकाशित हुए हैं।

इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से इसाबेल हार्डमेयर ने कहा, स्विट्जरलैंड के लिए स्थानिक चमगादड़ के मेटागेनोमिक विश्लेषण से व्यापक वायरस जीनोम विविधता का पता चलता है। 39 विभिन्न वायरस परिवारों के वायरस जीनोम का पता चला है, जिनमें से 16 धमनियों को संक्रमित करने के लिए जाने जाते हैं, जिनमें कोरोनावायरस, एडेनोवायरस, हेपेवायरस, रोटावायरस ए एवं एच और परवोवायरस शामिल हैं।

शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष में पाया कि बैट स्टूल (Bat stool) के नमूनों का जीनोमिक विश्लेषण चमगादड़ों से फैलने वाले वायरस की निरंतर निगरानी के लिए एक उपयोगी उपकरण हो सकता है, जिसमें एमईआरएस-सीओवी- संबंधित वायरस भी शामिल है। इस प्रकार की ट्रैकिंग संभावित रूप से ऐसे वायरल आनुवंशिक उत्परिवर्तन के संचय का पता लगा सकती है, जो अन्य जानवरों में संचरण के जोखिम को बढ़ाने वाली हो सकती है, जिससे मनुष्यों के लिए खतरा पैदा करने वाले वायरस का पहले पता लगाया जा सके।

यह भी पढ़ें :- सेरोपोजिटीविटी दर, एंटी-स्पाइक एंटीबॉडी टाइट्रे कोविशील्ड में कोवैक्सीन से है ज्यादा : अध्ययन

रोग पैदा करने वाले वायरस चमगादड़ से सीधे मनुष्यों में संचारित होने के कुछ ज्ञात उदाहरण भी पहले से ही हमारे सामने हैं। चमगादड़ों में पाए जाने वाले कुछ वायरस अन्य जानवरों में आसानी से पहुंच सकते हैं और यहां तक कि यह मनुष्यों में भी फैल सकते हैं।

चल रही कोविड-19 महामारी के पीछे का वायरस सार्स-सीओवी-2 (SARS-CoV-2) है, जिसे लेकर माना जा रहा है कि यही वह वायरस है, जिससे कोरोना महामारी फैली है और इसके मनुष्यों को संक्रमित करने से पहले एक चमगादड़ से दूसरे जानवर में फैलने की संभावना भी जताई जा रही है। (आईएएनएस-SM)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

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\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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