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वायरस के खिलाफ इस युद्ध में : कईयों ने जंग जीत ली, पर कुछ हार भी गए।

कोरोनावायरस के चलते कई जिंदगियों ने हार मान ली हो, लेकिन अब भी कई लोग, इस वायरस से संक्रमित होने के बावजूद निडरता और साहस से लड़ रहे हैं।

पिछले एक साल से हमारी दुनिया बिल्कुल बदल चुकी है। कोरोना वायरस (Corona Virus) के प्रकोप के चलते सारी दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है और बीते कुछ महीनों में, कोरोनावायरस की दूसरी लहर या कह सकते हैं, इसका भयावह रूप देखने को मिला है। इस लहर ने अब तक करोड़ों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। वैक्सीनेशन (Vaccination) शुरू किए जाने के बावजूद संक्रमण की यह दूसरी लहर पहले से भी घातक साबित हो रही है। कोरोना वायरस की जांच कराने वाला हर तीसरा व्यक्ति संक्रमित पाया जा रहा है। मौत के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं। रोजाना हजारों की संख्या में लोग अपनी जान गंवा रहे है। कई मरीजों को बेड्स नहीं मिल रहे तो कई लोग ऑक्सीजन के लिए तड़प रहे हैं। लेकिन इस भयावह स्थिति में भी, कुछ लोग सकारात्मक सोच को उजागर करने से नहीं चूक रहे। कुछ ने हार मान ली हो, लेकिन अब भी कई लोग, इस वायरस से संक्रमित होने के बावजूद निडरता और साहस से लड़ रहे हैं। 

सोशल मीडिया (Social Media) के माध्यम से कई ऐसे वीडियो (Viral Videos) सामने आ रहे हैं, जिसे देखकर मन खुश हो जाता है। आइए जानते हैं, उन योद्धाओं के बारे में, जो इस प्रकोप में भी, उम्मीद की एक  – एक डोर बांध रहे हैं। 


अभी हालही में छत्तीसगढ़ के रायपुर के एक अस्पताल में दंपति ने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। लेकिन एक हफ्ते के भीतर ही बच्चे को तेज बुखार हुआ, जिसके बाद दंपति ने अपने बच्चे को भुवनेश्वर के एक अस्पताल में भर्ती कराया।

टेस्ट के बाद पता चला कि, बच्चा कोरोना से संक्रमित है। डॉ. अरिजीत महापात्रा जो की neonatologist हैं, उन्होंने बताया कि, जब शिशु को हमारे पास लाया गया तो उसे तेज बुखार था और सांस लेने में भी तकलीफ थी। जिस वजह से उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। नवजात शिशु पर रेमडेसिवीर (Ramdesvir) का कोई शोध नहीं था। लेकिन बच्चे को बचाना भी था। यह परीक्षण जानलेवा भी हो सकता था। लेकिन 10 दिन तक इस लड़ाई से जूझते हुए, आखिरकार हमने सकारात्मक परिणाम देखे। आज वह बच्चा जीवित है। कोरोना वायरस की इस जंग में उसने बेहतर जीत हासिल करी है। 

बच्चे हों या बूढ़े इस वायरस के प्रकोप से कोई नहीं बच पा रहा है। अभी सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें 95 साल की एक वृद्ध महिला कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बावजूद भी लोगों में होसले को बढ़ाने के लिए गरबा करती नजर आ रही थीं। वृद्ध और बीमार होने के बावजूद वह महिला ऑक्सीजन मास्क पहने हुए अस्पताल में गरबा करती नजर आई। 

डियर ज़िन्दगी का टाइटल ट्रैक “लव यू ज़िंदगी” (Love You Zindagi) हम सभी ने सुना है। अभी कुछ दिन पहले दिल्ली के कोविड इमरजेंसी वार्ड के अंदर से इस गाने पर झूमती एक 30 वर्षीय महिला का वीडियो वायरल हुआ था। 8 May को डॉ मोनिका लांगेह ने ट्वीट कर बताया कि “हम पिछले 10 दिन से इन महिला की देखरेख कर रहे हैं। वह NIV Support पर हैं। रेमेडेसविर, प्लास्माथेरेपी आदि महिला को दिए जा चुके हैं। डॉक्टर ने कहा, वह एक मजबूत महिला है। जिनमें सकारात्मक और मजबूत इच्छाशक्ति है। महिला ने मुझसे पूछा था कि, मैं कोई गाना चला सकती हूं। जिसके बाद मैंने उन्हें मंजूरी दे दी थी।” जिसका वीडियो बहुत वायरल भी हुआ था। लेकिन 13 मई को डॉक्टर मोनिका लांगेह ने फिर एक बार ट्वीट कर बताया कि, मुझे खेद है, हमने एक बहादुर आत्मा को खो दिया है।……ॐ शान्ति।

इन महिला की मृत्यु के बाद कई लोगों के उम्मीदों की भी मृत्यु हो गई। यूजर्स ने लिखा, हमें यकीन था, वह महिला इस घातक वायरस को हरा देंगी। 

यह भी पढ़ें :- वैक्सीन की खुराक के बीच बढ़े अंतर से नकारात्मक प्रभाव नही : विशेषज्ञ

यह कुछ वीडियो हमने आपसे साझा की है। लेकिन अभी तमाम लोग ऐसे हैं, जो महामारी के इस गंभीर प्रकोप के बाद भी, अंतिम समय तक हार नहीं मान रहे हैं। लड़ रहे हैं। लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होनें जंग लड़ी तो जरूर पर जीत नहीं सके। स्थिति अब भी भयावह है। जितना संभव हो, “घर पर रहें सुरक्षित रहें” (Stay Home Stay Safe)। 

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अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत करते हुए, भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश (IANS)

केबीसी यानि कोन बनेगा करोड़पति भारतीय टेलिविज़न का एक लोकप्रिय धारावाहिक है । यहा पर अक्सर ही कई सेलिब्रिटीज आते रहते है । इसी बीच केबीसी के मंच पर भारत की हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश पहुंचे । केबीसी 13' पर मेजबान अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत करते हुए, भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश 41 साल बाद हॉकी में ओलंपिक पदक जीतने को लेकर बात की। श्रीजेश ने साझा किया कि "हम इस पदक के लिए 41 साल से इंतजार कर रहे थे। साथ उन्होंने ये भी कहा की वो व्यक्तिगत रूप से, मैं 21 साल से हॉकी खेल रहे है। आगे श्रीजेश बोले मैंने साल 2000 में हॉकी खेलना शुरू किया था और तब से, मैं यह सुनकर बड़ा हुआ हूं कि हॉकी में बड़ा मुकाम हासिल किया, हॉकी में 8 गोल्ड मेडल मिले। इसलिए, हमने खेल के पीछे के इतिहास के कारण खेलना शुरू किया था। उसके बाद हॉकी एस्ट्रो टर्फ पर खेली गई, खेल बदल दिया गया और फिर हमारा पतन शुरू हो गया।"

जब अभिनेता अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ के बारे में अधिक पूछा, तो उन्होंने खुल के बताया।"इस पर अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ पर खेलते समय कठिनाई के स्तर को समझने की कोशिश की। इसे समझाते हुए श्रीजेश कहते हैं कि "हां, बहुत कुछ, क्योंकि एस्ट्रो टर्फ एक कृत्रिम घास है जिसमें हम पानी डालते हैं और खेलते हैं। प्राकृतिक घास पर खेलना खेल शैली से बिल्कुल अलग है। "

इस घास के बारे में आगे कहते हुए श्रीजेश ने यह भी कहा कि "पहले सभी खिलाड़ी केवल घास के मैदान पर खेलते थे, उस पर प्रशिक्षण लेते थे और यहां तक कि घास के मैदान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेलते थे। आजकल यह हो गया है कि बच्चे घास के मैदान पर खेलना शुरू करते हैं और बाद में एस्ट्रो टर्फ पर हॉकी खेलनी पड़ती है। जिसके कारण बहुत समय लगता है। यहा पर एस्ट्रो टर्फ पर खेलने के लिए एक अलग तरह का प्रशिक्षण होता है, साथ ही इस्तेमाल की जाने वाली हॉकी स्टिक भी अलग होती है।" सब कुछ बदल जाता है ।

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वर्तमान में भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे बड़े खिलाड़ी और कप्तान विराट कोहली ने गुरूवार को घोषणा की कि वह इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले टी20 विश्व कप के बाद टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ेंगे। उनका ये एलान करोड़ो दिलो को धक्का देने वाला था क्योंकि कोहली को हर कोई कप्तान के रूप में देखना चाहता है । कई दिनों से चल रहे संशय पर विराम लगाते हुए कोहली ने आज ट्विटर के जरिए एक बयान में इसकी घोषणा की। कोहली ने बताया कि वह इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले टी20 विश्व कप के बाद टी20 के कप्तानी पद को छोड़ देंगे।

ट्वीट के जरिए उन्होंने इस यात्रा के दौरान उनका साथ देने के लिए सभी का धन्यवाद दिया। कोहली ने बताया कि उन्होंने यह फैसला अपने वर्कलोड को मैनेज करने के लिए लिया है। उनका वर्कलोड बढ़ गया था ।

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मंगल ग्रह पर घर बनाने का सपना हकीकत में बदल सकता हैं। वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष यात्रियों के खून, पसीने और आँसुओ की मदद से कंक्रीट जैसी सामग्री बनाई है, जिसकी वजह से यह संभव हो सकता है। मंगल ग्रह पर छोटी सी निर्माण सामग्री लेकर जाना भी काफी महंगा साबित हो सकता है। इसलिए उन संसाधनों का उपयोग करना होगा जो कि साइट पर प्राप्त कर सकते हैं।

मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के अध्ययन में यह पता लगा है कि मानव रक्त से एक प्रोटीन, मूत्र, पसीने या आँसू से एक यौगिक के साथ संयुक्त, नकली चंद्रमा या मंगल की मिट्टी को एक साथ चिपका सकता है ताकि साधारण कंक्रीट की तुलना में मजबूत सामग्री का उत्पादन किया जा सके, जो अतिरिक्त-स्थलीय वातावरण में निर्माण कार्य के लिए पूरी तरह से अनुकूल हो।

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