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देश

अब रानी लक्ष्मी बाई की धरती से मिलेगा चीन को जवाब

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर की गौरी-गणेश टेरोकोटा की मूर्तियों के बाद अब शौर्य एवं संस्कार की धरती बुंदेलखंड भी चीन को जवाब देने की तैयारी में है।

झाँसी में खिलौना उत्पादन से चीन को दिया जाएगा जवाब। (सांकेतिक चित्र, Pixabay)

By: विवेक त्रिपाठी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शहर गोरखपुर की गौरी-गणेश टेरोकोटा की मूर्तियों के बाद अब शौर्य एवं संस्कार की धरती बुंदेलखंड भी चीन को जवाब देने की तैयारी में है। जवाब करारा होगा, क्योंकि यह जंगे आजादी में अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाली रानी लक्ष्मी बाई की धरती झांसी से मिलेगा। हथियार होंगे साट ट्वाय। इस तरह के खिलौने झांसी की पहचान हैं। इसी नाते वर्ष 2018 में इसे मुख्यमंत्री की लैगिशप योजना एक जिला एक उत्पाद ओडीओपी में शामिल किया गया।


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इस उद्योग की बेहतरी के लिए काम भी शुरू हो चुका है। उद्योग की मौजूदा स्थिति क्या है? इससे जुड़े लोगों की समस्याएं और उनके समाधान क्या हैं? इन समस्याओं का अगर समाधान कर दिया जाये तो इसके नतीजे क्या होंगे? इस सबकी जानकारी के लिए डायग्ननोस्टि स्टडी रीपोर्ट डीएसआर तैयार कर उस पर सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम विभाग एमएसएमई अमल भी कर रहा है।

इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित आत्म निर्भर भारत पैकेज की घोषणा के बाद उनके वोकल फॉर लोकल के सपने को साकार करने के लिए मई में मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित पहले मेगा ऑनलाइन लोन मेले इसी उद्योग से जुड़ी झांसी की उदिता गुप्ता को कारोबार के विस्तार के लिए 50 लाख रुपये का चेक भी दिया गया। प्रधानमंत्री द्वारा मन की बात में खिलौना उद्योग की चर्चा करने के बाद इसमें और तेजी आना तय है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(फ़ाइल फोटो, PIB)

ज्ञात हो झांसी अपने साट ट्वायज के लिए जाना जाता है। अधिकांश खिलौने दीनदयाल नगर में बनते हैं। खिलौने बनने के बाद बची चीजों से बच्चों के जूते और अन्य छोटे सामान बनते हैं। कटिंग से लेकर सिलाई, भराई, धुलाई, चौकिंग और परिवहन का अधिकांश काम परंपरागत तरीके से हाथ से होता है। प्रयुक्त होने वाला कच्चा माल सिंथेटिक फाइबर, कपड़े, बटन, आंख और पली क्लॉथ आदि दिल्ली से आता है। तैयार माल का अधिकांश बाजार भी दिल्ली ही है। अगर कच्चा माल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो तो लागत 20 से 25 फीसदी तक घट सकती है। झांसी के खिलौनों को ब्रांड बनाकर आक्रामक मार्केटिंग करने से भी इस उद्योग से जुड़े हजारों लोग को लाभ होगा।

सरकार की मंशा यहां ओडीओपी के तहत कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) बनाने की है। इसमें एक ही छत के नीचे डिजाइन स्टूडियो, गुणवत्ता जांचने के लिए लैब, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर होंगे। इसके अलावा इस उद्योग से जुड़े लोगों की उत्पादन क्षमता बढ़े, तैयार माल की फिनिशिंग बेहतर हो और वे गुणवत्ता और दाम में प्रतिस्पर्धी हों, इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए उनको लेजर कटिंग मशीन, कंप्रेसर, कारडिंग फर को संवारने मशीन और आटोमेटिक टेलरिंग मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी।

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बाजार में किस तरह और किस डिजाइन के खिलौनों की मांग है, इसके लिए उनको प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्ननोलजी-आईआईटी, निड और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन एंड टेक्ननोलजी (निफ्ट) के विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी।

अपर मुख्य सचिव (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग) नवनीत सहगल ने बताया कि झांसी भौगोलिक रूप से देश के बीचो-बीच है। यह बुंदेलखंड का गेटवे है। रेल और सड़क से यह पूरे देश से बेहतर तरीके से जुड़ा है। झांसी में हवाईअड्डा बन जाने और बुंदेलखंड एक्सप्रेस के बन जाने पर यह कनेक्टिविटी और बेहतर हो जाएगी। मुख्यमंत्री बुंदेलखंड के विकास को लेकर बेहद संजीदा हैं। ऐसे में झांसी के परंपरागत खिलौना उद्योग को अगर तकनीक से जोड़ दें तो कारोबार और रोजगार की ²ष्टि से इसकी संभावना बहुत बेहतर है।(आईएनएस)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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