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बिल गेट्स से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

आज माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स का जन्मदिन है। उनके विषय कुछ रोचक बातें जानते हैं।

बिल गेट्स (Wikimedia Commons)

आज माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स का जन्मदिन है। हम सबको उनके बारे में 2 से 3 प्रसिद्ध विषयों का पता है। एक है कि वह दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में गिने जाते हैं, दूसरा कि वह दुनिया के सबसे सफल कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक हैं और तीसरा यह कि वह एक अच्छे इंसान हैं। लेकिन आज उनके विषय में कुछ ऐसे तथ्यों को आपके सामने रखने की कोशिश है जो शायद आप नहीं जानते हैं

1.”बिल 1977 में जेल जा चुके हैं क्योंकि मैक्सिको में वह बिना लाइसेंस के गाड़ी चला रहे थे और उन्होंने रेड लाइट पर भी गाड़ी नहीं रोकी।”

बिल गेट्स (Wikimedia Commons)


2.”बिल ने 1997 तक प्लेन उड़ाया है, लेकिन आज वह एक हवाई जहाज के मालिक हैं जिसका नाम है ‘बिग सप्लर्ग”

3.”उनके विमान के आलावा बिल के पास कोडेक्स लीसेस्टर, लियोनार्डो दा विंची के लेखन का एक संग्रह है। उन्होंने 1994 में हुई नीलामी में 30.8 मिलियन डॉलर में कोडेक्स को अपना बनाया था।”

बिल गेट्स (Wikimedia Commons)

4.”अपनी अपार संपत्ति के बावजूद, गेट्स कहते हैं कि उनके बच्चे केवल 10 मिलियन डॉलर ही प्राप्त करेंगे, यह उनके 81.1 बिलियन डॉलर की निजी संपत्ति मूल्य का एक बहुत छोटा अंश है। गेट्स का कहना है कि “बच्चों के भरी मात्रा में संपत्ति छोड़कर उन पर एहसान नहीं करना चाहते।”

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5.”गेट्स किसी भी विदेशी भाषा को नहीं जानते हैं। वह कहता है, जीवन में उसका सबसे बड़ा अफसोस है।”

बिल गेट्स (Wikimedia Commons)

6.”गेट्स कहते हैं कि अगर माइक्रोसॉफ्ट ने काम नहीं किया होता, तो वह शायद कृत्रिम बुद्धिमत्ता/ एआई के शोधकर्ता होते।”

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अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत करते हुए, भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश (IANS)

केबीसी यानि कोन बनेगा करोड़पति भारतीय टेलिविज़न का एक लोकप्रिय धारावाहिक है । यहा पर अक्सर ही कई सेलिब्रिटीज आते रहते है । इसी बीच केबीसी के मंच पर भारत की हॉकी टीम के गोलकीपर पीआर श्रीजेश पहुंचे । केबीसी 13' पर मेजबान अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत करते हुए, भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश 41 साल बाद हॉकी में ओलंपिक पदक जीतने को लेकर बात की। श्रीजेश ने साझा किया कि "हम इस पदक के लिए 41 साल से इंतजार कर रहे थे। साथ उन्होंने ये भी कहा की वो व्यक्तिगत रूप से, मैं 21 साल से हॉकी खेल रहे है। आगे श्रीजेश बोले मैंने साल 2000 में हॉकी खेलना शुरू किया था और तब से, मैं यह सुनकर बड़ा हुआ हूं कि हॉकी में बड़ा मुकाम हासिल किया, हॉकी में 8 गोल्ड मेडल मिले। इसलिए, हमने खेल के पीछे के इतिहास के कारण खेलना शुरू किया था। उसके बाद हॉकी एस्ट्रो टर्फ पर खेली गई, खेल बदल दिया गया और फिर हमारा पतन शुरू हो गया।"

जब अभिनेता अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ के बारे में अधिक पूछा, तो उन्होंने खुल के बताया।"इस पर अमिताभ बच्चन ने एस्ट्रो टर्फ पर खेलते समय कठिनाई के स्तर को समझने की कोशिश की। इसे समझाते हुए श्रीजेश कहते हैं कि "हां, बहुत कुछ, क्योंकि एस्ट्रो टर्फ एक कृत्रिम घास है जिसमें हम पानी डालते हैं और खेलते हैं। प्राकृतिक घास पर खेलना खेल शैली से बिल्कुल अलग है। "

इस घास के बारे में आगे कहते हुए श्रीजेश ने यह भी कहा कि "पहले सभी खिलाड़ी केवल घास के मैदान पर खेलते थे, उस पर प्रशिक्षण लेते थे और यहां तक कि घास के मैदान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेलते थे। आजकल यह हो गया है कि बच्चे घास के मैदान पर खेलना शुरू करते हैं और बाद में एस्ट्रो टर्फ पर हॉकी खेलनी पड़ती है। जिसके कारण बहुत समय लगता है। यहा पर एस्ट्रो टर्फ पर खेलने के लिए एक अलग तरह का प्रशिक्षण होता है, साथ ही इस्तेमाल की जाने वाली हॉकी स्टिक भी अलग होती है।" सब कुछ बदल जाता है ।

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कोहली ने आज ट्विटर के जरिए एक बयान में इसकी घोषणा की। (IANS)

वर्तमान में भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे बड़े खिलाड़ी और कप्तान विराट कोहली ने गुरूवार को घोषणा की कि वह इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले टी20 विश्व कप के बाद टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ेंगे। उनका ये एलान करोड़ो दिलो को धक्का देने वाला था क्योंकि कोहली को हर कोई कप्तान के रूप में देखना चाहता है । कई दिनों से चल रहे संशय पर विराम लगाते हुए कोहली ने आज ट्विटर के जरिए एक बयान में इसकी घोषणा की। कोहली ने बताया कि वह इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले टी20 विश्व कप के बाद टी20 के कप्तानी पद को छोड़ देंगे।

ट्वीट के जरिए उन्होंने इस यात्रा के दौरान उनका साथ देने के लिए सभी का धन्यवाद दिया। कोहली ने बताया कि उन्होंने यह फैसला अपने वर्कलोड को मैनेज करने के लिए लिया है। उनका वर्कलोड बढ़ गया था ।

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मंगल ग्रह की सतह (Wikimedia Commons)

मंगल ग्रह पर घर बनाने का सपना हकीकत में बदल सकता हैं। वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष यात्रियों के खून, पसीने और आँसुओ की मदद से कंक्रीट जैसी सामग्री बनाई है, जिसकी वजह से यह संभव हो सकता है। मंगल ग्रह पर छोटी सी निर्माण सामग्री लेकर जाना भी काफी महंगा साबित हो सकता है। इसलिए उन संसाधनों का उपयोग करना होगा जो कि साइट पर प्राप्त कर सकते हैं।

मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के अध्ययन में यह पता लगा है कि मानव रक्त से एक प्रोटीन, मूत्र, पसीने या आँसू से एक यौगिक के साथ संयुक्त, नकली चंद्रमा या मंगल की मिट्टी को एक साथ चिपका सकता है ताकि साधारण कंक्रीट की तुलना में मजबूत सामग्री का उत्पादन किया जा सके, जो अतिरिक्त-स्थलीय वातावरण में निर्माण कार्य के लिए पूरी तरह से अनुकूल हो।

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