16 वीं शताब्दी के सिक्के मिलने के बाद थमीराबरनी नदी और पुन्नकयाल गांव में और अधिक खुदाई की योजना

16वीं शताब्दी के सिक्कों की खुदाई इन क्षेत्रों में एक सभ्यता के संकेतक
ताम्बे से सिक्के
ताम्बे से सिक्केWikimedia

तमिलनाडु (Tamil Nadu) पुरातत्व विभाग को हाल ही में एक खुदाई के दौरान 16 वीं शताब्दी के 14 सिक्कों का पता चलने के बाद नदी के पूर्वी तट पर थमीराबरनी नदी और पुन्नकयाल गांव में और अधिक खुदाई की योजना बना रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राज्य के अभिलेखागार विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, थमीरबरनी मोती मत्स्य पालन का एक प्रमुख हलचल क्षेत्र रहा है।

राज्य के तमिल संस्कृति (Tamil Sanskriti) और पुरातत्व मंत्री थंगम थेनारासु ने आईएएनएस को बताया, "16वीं शताब्दी के सिक्कों की खुदाई इन क्षेत्रों में एक सभ्यता (civilization) के संकेतक हैं। ऐसे दावे थे कि 16वीं शताब्दी का सबसे पुराना प्रिंटिंग प्रेस (Printing Press) इस क्षेत्र में स्थित था और अधिक खुदाई यहां रहने वाली सभ्यताओं के बारे में और खुलासे करेंगे।"

पुन्नकयाल गांव में और अधिक खुदाई की योजना बना रहा है पुरातत्व विभाग
पुन्नकयाल गांव में और अधिक खुदाई की योजना बना रहा है पुरातत्व विभागWikimedia

पुन्नकयाल बस्ती में हाल ही में हुई खुदाई में शामिल एक अधिकारी ने मीडियाकर्मियों को बताया कि, इस क्षेत्र से प्राप्त सिक्के 16वीं और 17वीं शताब्दी के नायक काल के सिक्के (coins) जैसे दिखते हैं।

उन्होंने कहा कि, ज्यादातर सिक्के हरे हो गए थे क्योंकि तांबे (copper) ने खारे पानी के साथ प्रतिक्रिया की होगी।

ताम्बे से सिक्के
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पुरातत्वविदों (Archaeologists) का मत है कि पुन्नकायल प्राचीन तमिल संस्कृति की कुंजी हो सकती है और इस क्षेत्र में पहले की सभ्यता के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए और अधिक खुदाई (excavations) की जानी है।

आईएएनएस/RS

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