

Summary
बीजेपी के तीन नेताओं पर सैकड़ों आपराधिक मामले, जिनमें हत्या की कोशिश जैसे गंभीर आरोप शामिल।
पार्टी ने तीनों को टिकट दिया, लेकिन दो नेता कभी नहीं जीते, एक 2019 जीता – 2024 हारा।
कोई सजा नहीं, अधिकतर मामले अदालत में लंबित।
"जब भले लोग मिलकर काम करेंगे, तब अपराधी शक्तियाँ काम नहीं कर पाएँगी।” ये बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कथन है। ये बात उन्होंने 18 अक्टूबर 2022 को एक कार्यक्रम के दौरान कही थी। 2014 में जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी (BJP) जीतकर आई थी, तो लगा था कि देश की कानून व्यवस्था में बदलाव आएगा क्योंकि 2012 में दिल्ली में जो निर्भया कांड हुआ था, उसके बाद से ही मनमोहन सरकार को लेकर लोगों के बीच आक्रोश था।
2014 में बीजेपी (BJP) की सरकार बनी और उसके बाद सबको उम्मीद थी कि हालात सुधरेंगे लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि सत्ता में बैठी बीजेपी के 3 ऐसे नेता हैं, जिनपर सबसे ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। ऐसे में सवाल यह है कि सत्ताधारी पार्टी ही अपराधियों को अपनी पार्टी में रखेगी, तो देश में हालत कैसे सुधरेंगे? हैरानी की बात ये है कि पार्टी की तरफ से इन तीनों को चुनाव का टिकट भी मिला था। ऐसे में आइये जानते हैं, कौन हैं वो 3 नेता?
इस लिस्ट में पहला नाम बीजेपी (BJP) के के. सुरेंद्रन का है जो केरल प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और वायनाड लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। उनका राजनीतिक करियर लंबा रहा है, लेकिन अब तक वो एक भी चुनाव जीत नहीं पाए हैं।
पार्टी ने सुरेंद्रन को लोकसभा और विधानसभा मिलाकर लगभग 9 बार टिकट दिया लेकिन वो एक बार भी जीत नहीं पाएं। बीजेपी (BJP) ने लोकसभा में उन्हें 2009 में कसारगोड, 2019 में पथानामथिट्टा और 2024 में वायनाड से टिकट दिया लेकिन वो जीत नहीं पाए जबकि 2011, 2016 और 2021 में उन्हें केरल से विधानसभा का चुनाव लड़ने का मौका मिला और यहाँ भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
वहीं, 2024 के लोसकभा में जब के. सुरेंद्रन ने हलफनामा दिया, तो उसमें उनके नाम करीब 243 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 100 से अधिक मामलों को “गंभीर श्रेणी” का बताया गया है। इनमें दंगा, अवैध सभा, पुलिस पर हमला, सरकारी काम में बाधा और हिंसा से जुड़े आरोप शामिल हैं।
इसके अलावा, 2021 के मनजेश्वरम विधानसभा चुनाव में रिश्वत देने का मामला भी काफी चर्चा में रहा था, जिसमें उन पर एक उम्मीदवार को चुनाव से हटने के लिए पैसे और सामान देने का आरोप लगा था। इस मामले में SC/ST एक्ट जैसी सख्त धाराएँ भी लगीं, लेकिन बाद में उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले, तो मजबूरन अदालत को उन्हें रिहा करना पड़ा।
साथ ही सुरेंद्रन के ऊपर “हत्या की कोशिश” (IPC धारा 307- Attempt to Murder) का मामला भी दर्ज हैं। हालांकि, ये सभी आरोप उनके ऊपर लगे हैं, सजा अब तक नहीं मिली है। अब तक किसी हत्या या हत्या की कोशिश के मामले में उन्हें दोषी ठहराकर सजा नहीं दी गई है।
इस लिस्ट में दूसरा नाम डॉ. के. एस. राधाकृष्णन का है, जो केरल बीजेपी (BJP) के एक वरिष्ठ नेता हैं। उन्होंने अब तक लगभग 5 से 6 चुनाव लड़े हैं, जिनमें 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव शामिल हैं। खासतौर पर वो 2024 के लोकसभा के चुनाव में वो एर्नाकुलम सीट से बीजेपी के उम्मीदवार थे। उनके चुनावी हलफनामों के अनुसार उनके ऊपर लगभग 211 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें करीब 100 से अधिक मामले गंभीर श्रेणी के हैं।
इन आरोपों में सबसे गंभीर है हत्या की कोशिश (IPC धारा 307), जो यह दर्शाता है कि उन पर किसी को जान से मारने की नीयत से हमला करने का आरोप है। इसके अलावा उन पर खतरनाक हथियार से हमला करने, दंगा-फसाद भड़काने, अवैध सभा करने, पुलिस और सरकारी अधिकारियों पर हमला करने, बिना अनुमति किसी की संपत्ति में प्रवेश करने, चुनावी अपराधों में मतदाता प्रभावित करने और धमकाने, तथा चुनावी रिश्वत देने जैसे कई गंभीर आरोप लगे हैं।
हालांकि, अब तक किसी मामले में उन्हें अदालत द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया है और सभी मामले कोर्ट में लंबित हैं। शायद डॉ. के. एस. राधाकृष्णन के ऊपर जो आपराधिक मामले दर्ज हैं, शायद उसकी वजह से ही वो आज तक चुनाव नहीं जीत पाए हैं।
इस लिस्ट में तीसरा नाम बीजेपी (BJP) नेता अर्जुन सिंह का है, जो पश्चिम बंगाल के बैरकपुर क्षेत्र से आते हैं। 2019 में वो बैरकपुर से चुनाव लड़कर संसद पहुंचे थे जबकि 2024 में उनकी करारी हार हुई। उनके खिलाफ लगभग 93 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से कई गंभीर आरोप हैं। सबसे गंभीर आरोपों में हत्या की कोशिश (IPC धारा 307) शामिल है, जिसका मतलब है किसी को जान से मारने की नीयत से हमला करना।
इसके अलावा उन पर खतरनाक हथियार से हमला करना, धमकाना, धोखाधड़ी, जानलेवा चोट पहुंचाना, विस्फोटक से नुकसान पहुंचाना, चुनावी अपराधों में मतदाता प्रभावित करना जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं। वहीं, अर्जुन सिंह के खिलाफ 2020 में मुर्शिदाबाद सांप्रदायिक विवाद पर आपत्तिजनक ट्वीट के कारण FIR दर्ज हुई थी, और ये मामला काफी चर्चा में रहा था।
हालांकि, अर्जुन सिंह के खिलाफ कोई भी हत्या का मामला दर्ज नहीं है लेकिन हत्या की कोशिश के आरोप उनके हलफनामे में शामिल हैं। कई बार उन्होंने राजनीतिक हिंसा और विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया, जिसके बाद पुलिस ने उनपर FIR भी दर्ज की। अब तक कोर्ट ने सजा सुनाकर दोषी नहीं ठहराया है और कई मामले अभी अदालत में लंबित है। भाजपा नेता का राजनीतिक करियर फिलहाल विवादों के बीच ही चल रहा है।