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सोशल मीडिया (Social media) पर सिर्फ साकारात्मक चीजें ही नहीं चलती हैं बल्कि नाकारात्मक चीजें भी चलती हैं और कभी-कभी उसका असर बहुत बुरा होता है। कोरोना (Corona) काल में सोशल मीडिया ने बेहतर काम किया है और इससे लोगों को बहुत मदद भी मिली है लेकिन वहीं दूसरी ओर इसका नाकारात्मक पक्ष भी देखने को मिला है। एक गलत खबर के वायरल होने की वजह से चीजें किस कदर बिगड़ जाती है, यह किसी को बताने की जरूरत नहीं। इतना ही नहीं कई बार सोशल मीडिया (Social media) मेन स्ट्रीम मीडिया की खबरों को खंडन भी करता है, इसलिए जरूरी है कि ‘मिस्ट’ ऐप (Mist App) की मदद से अपने प्लेटफॉर्म से नाकारात्मक चीजों को स्प्रेड न होने दें।


यह बात आम आदमी पार्टी (Asm adami party) के सांसद संजय सिंह ने यहां आयोजित एक सामारोह में पूरी तरह से भारतीय मोबाइल ऐप ‘मिस्ट’ (Mist app) की लॉन्चिंग के मौके पर कही। कार्यक्रम में इस ऐप को बनाने वाले वेस्टन ग्रुप (Western group) के निदेशक और मेस्ट4 भारत के फाउंडर क्षितिज सिंह (Kshitij singh), सीएमडी राजबीर सिंह (Rajbeer singh), सीईओ अनिल झा (Anil jha), डायरेक्टर ऑपरेशन सुनील झा (Sunil jha) आदि मौजूद थे।

इस मौके पर क्षितिज सिंह ने कहा कि कोरोना काल में जब डाटा की सुरक्षा को लेकर 24 जून को सरकार ने टिकटॉक को बंद कर दिया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra modi) ने युवाओं से भारतीय एप डब्लप करने की अपील की तो उसके बाद उन्होंने मिस्ट एप के बनाने के बारे में सोचा और फिर 1 महीने की मेहनत के बाद पूरी तरह से भारतीय ऐप ‘मिस्ट’ (Mist) डिजाइन हुआ।

सोशल मीडिया (Social media) पर सिर्फ साकारात्मक चीजें ही नहीं चलती हैं बल्कि नाकारात्मक चीजें भी चलती हैं | (Unsplash)

क्षितिज ने दावा किया कि यह एप भारतीय कानून के अनुसार बना हुआ है और इसका डेटा पूरी सरह से सुरक्षित है। क्षितिज ने कहा कि भारतीय कम में ज्यादा चाहते हैं जो मिस्ट (Mist) पूरा करता है। उन्होंने कहा कि अभी तक हमारा देश खरीदार था पर अब मिस्ट के बाद वह दूसरे देशों को बेचने की स्थिति में होगा।

राजबीर सिंह (Rajbeer singh) ने कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के सपने को साकार करने वाला है, क्योंकि उन्होंने ही युवाओं से देशी ऐप बनाने की अपील की थी। सिंह ने बताया कि अन्य ऐप जहां 35 एमबी जगह घेरते हैं तो मिस्ट एप सिर्फ 5 एमबी जगह ही घेरता है। इसकी वजह से मोबाइल हैंग नहीं होता है।

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राजबीर ने कहा कि सुरक्षा के मामले में भी यह पूरी तरह से सुरक्षित है। अन्य सोशल साइटों या एप पर किसी वीडियो को डिलीट कर दिया जाता है फिर भी वह सर्वर में रहता है, लेकिन इस एप में ऐसा नहीं है। मिस्ट को सबसे स्लो इंटनेट (Internet) पर चलने के लिए बनाया है। इससे यह फायदा होगा कि ग्रामीण इलाकों में जहां इंटरनेट बहुत स्लो चलता है। एसी स्थिति में भी मिस्ट काम करेगा। (आईएएनएस-SM)

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इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) [IANS]

दुनिया की अग्रणी हॉस्पिटैलिटी और पाक कला शिक्षा दिग्गजों में से एक, सॉमेट एजुकेशन (Sommet Education) ने हाल ही में देश के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी संस्थान, इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) के साथ हाथ मिलाया है। इसके साथ सॉमेट एजुकेशन की अब आईएसएच (ISH) में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो पूर्व के विशाल वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण एडिशन है। रणनीतिक साझेदारी सॉमेट एजुकेशन को भारत में अपने दो प्रतिष्ठित संस्थानों को स्थापित करने की अनुमति देती है। इनमें इकोले डुकासे शामिल है, जो पाक और पेस्ट्री कला में एक विश्वव्यापी शिक्षा संदर्भ के साथ है। दूसरा लेस रोचेस है, जो दुनिया के अग्रणी हॉस्पिटैलिटी बिजनेस स्कूलों में से एक है।

इस अकादमिक गठबंधन के साथ, इकोले डुकासे का अब भारत में अपना पहला परिसर आईएसएच (ISH) में होगा, और लेस रोचेस देश में अपने स्नातक और स्नातकोत्तर आतिथ्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करेगा।

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Credit- Wikimedia Commons

भारतीय रेलवे (Wikimedia Commons)

पूर्व मध्य रेल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद इसके अनुपालन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इको स्मार्ट स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मध्य रेल के 52 चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड द्वारा सुझाए गए 24 इंडिकेटर (पैरामीटर) लागू किए हैं। सभी 52 स्टेशनों ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक प्रमाणन आईएसओ-14001:2015 प्राप्त किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित पूर्व मध्य रेल के 52 नामांकित स्टेशनों में से 45 का संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें के लिए सहमति-से-स्थापित (सीटीई) प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुतियां सुनिश्चित कीं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेष कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के सभी 45 स्टेशनों के लिए स्थापना की सहमति के लिए एनओसी प्राप्त कर ली गई है और 32 स्टेशनों को कंसेंट-टू-ऑपरेट (सीटीओ) दी गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणीकरण ने पूर्व मध्य रेलवे को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें द्वारा निर्धारित पानी, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों की आवश्यकता को सुव्यवस्थित करने में मदद की है।

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वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच अब गोरखपुर में भी हो सकेगा। [IANS]

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस समेत अन्य वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच शुरू हो गई है। गोरखपुर (Gorakhpur) में यह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)की क्षेत्रीय इकाई रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC) के जरिए संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के प्रयास से शुरू इस आरएमआरसी में नौ अत्याधुनिक लैब्स बनकर तैयार हैं। बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) इसका उद्घाटन करेंगे।

राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आरएमआरसी (RMRC) की इन लैब्स के जरिये न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर वल्र्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा। सबसे खास बात यह भी है कि अब गोरखपुर (Gorakhpur) में ही आने वाले समय में कोरोनाकाल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वेरिएंट (Covid variant) अधिक प्रभावित कर रहा है।

Narendra Modi , PM of India, ICMR मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस RMRC का उद्घाटन करेंगे। [Wikimedia Commons]

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