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देश

कोरोनाकाल के बाद देश में नई राष्ट्रीय रोजगार नीति बनाएगी मोदी सरकार

देश में पहली बार संगठित और असंगठित दोनों सेक्टर में रोजगार की सही तस्वीर पता करने में केंद्र की मोदी सरकार जुट गई है। एक साथ पांच बड़े सर्वे से आंकड़े जुटाने के बाद सरकार नई राष्ट्रीय रोजगार नीति तैयार करेगी।

By : नवनीत मिश्र

देश में पहली बार संगठित और असंगठित दोनों सेक्टर में रोजगार की सही तस्वीर पता करने में केंद्र की मोदी सरकार जुट गई है। एक साथ पांच बड़े सर्वे से आंकड़े जुटाने के बाद सरकार नई राष्ट्रीय रोजगार नीति तैयार करेगी। रोजगार सेक्टर में सरकार का यह कदम बेहद क्रांतिकारी माना जा रहा है। हर सेक्टर में काम करने वालों के लिए सरकार उचित नीति बनाएगी। मोदी सरकार के इस बड़े मिशन में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का लेबर ब्यूरो आफ इंडिया जुट गया है।


लेबर ब्यूरो ऑफ इंडिया के महानिदेशक (डीजी) डीपीएस नेगी ने आईएएनएस को बताया, “लेबर ब्यूरो को पांच तरह के अखिल भारतीय सर्वेक्षणों की जिम्मेदारी मिली है। एक से डेढ़ महीने सर्वे में लगे कर्मियों की ट्रेनिंग होगी। फिर फील्ड सर्वे शुरू होगा। उम्मीद है कि सात महीने में फील्ड सर्वे कार्य पूरा हो जाएगा।”

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी रैंक के अफसर डीपीएस नेगी के मुताबिक लेबर ब्यूरो का यह सर्वे बहुत महत्वपूर्ण है। सर्वे से मिले आंकड़ों के आधार पर देश में एक ठोस राष्ट्रीय रोजगार नीति तैयार होगी।

 

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सर्वे की खासियत

कोरोना काल में जिस तरह शहरों से गांवों की तरफ रिवर्स पलायन देखने को मिला, प्रवासी मजदूरों के मुद्दे ने पूरे देश का ध्यान खींचा, उसके कारण सरकार, प्रवासी श्रमिकों का अखिल भारतीय सर्वेक्षण कराने जा रही है। इसके आलावा चार तरह के और सर्वे होने हैं। इसमें घरेलू कामगारों, प्रोफेशनल की ओर से सृजित रोजगार और परिवहन के क्षेत्र में सृजित रोजगार का पूरे देश में लेबर ब्यूरो सर्वे करेगा।

खास बात है कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का लेबर ब्यूरो 10 से अधिक श्रमिकों और 10 से कम श्रमिकों वाले संस्थानों में रोजगार की सही तस्वीर पता लगाने के लिए भी अखिल भारतीय त्रैमासिक सर्वेक्षण भी शुरू करने जा रहा है। मंत्रालय के अफसरों के मुताबिक इस तिमाही सर्वेक्षण से असंगठित क्षेत्र में रोजगारों संख्या से संबंधित आंकड़ों की सही जानकारी पता चलेगी। मंत्रालय के अफसरों के मुताबिक सर्वे में सूचना एवं तकनीक का भरपूर इस्तेमाल होगा। जिससे सर्वे में समय कम लगेगा। (आईएएनएस )

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इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) [IANS]

दुनिया की अग्रणी हॉस्पिटैलिटी और पाक कला शिक्षा दिग्गजों में से एक, सॉमेट एजुकेशन (Sommet Education) ने हाल ही में देश के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी संस्थान, इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) के साथ हाथ मिलाया है। इसके साथ सॉमेट एजुकेशन की अब आईएसएच (ISH) में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो पूर्व के विशाल वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण एडिशन है। रणनीतिक साझेदारी सॉमेट एजुकेशन को भारत में अपने दो प्रतिष्ठित संस्थानों को स्थापित करने की अनुमति देती है। इनमें इकोले डुकासे शामिल है, जो पाक और पेस्ट्री कला में एक विश्वव्यापी शिक्षा संदर्भ के साथ है। दूसरा लेस रोचेस है, जो दुनिया के अग्रणी हॉस्पिटैलिटी बिजनेस स्कूलों में से एक है।

इस अकादमिक गठबंधन के साथ, इकोले डुकासे का अब भारत में अपना पहला परिसर आईएसएच (ISH) में होगा, और लेस रोचेस देश में अपने स्नातक और स्नातकोत्तर आतिथ्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करेगा।

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Credit- Wikimedia Commons

भारतीय रेलवे (Wikimedia Commons)

पूर्व मध्य रेल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद इसके अनुपालन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इको स्मार्ट स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मध्य रेल के 52 चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड द्वारा सुझाए गए 24 इंडिकेटर (पैरामीटर) लागू किए हैं। सभी 52 स्टेशनों ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक प्रमाणन आईएसओ-14001:2015 प्राप्त किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित पूर्व मध्य रेल के 52 नामांकित स्टेशनों में से 45 का संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें के लिए सहमति-से-स्थापित (सीटीई) प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुतियां सुनिश्चित कीं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेष कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के सभी 45 स्टेशनों के लिए स्थापना की सहमति के लिए एनओसी प्राप्त कर ली गई है और 32 स्टेशनों को कंसेंट-टू-ऑपरेट (सीटीओ) दी गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणीकरण ने पूर्व मध्य रेलवे को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें द्वारा निर्धारित पानी, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों की आवश्यकता को सुव्यवस्थित करने में मदद की है।

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वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच अब गोरखपुर में भी हो सकेगा। [IANS]

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस समेत अन्य वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच शुरू हो गई है। गोरखपुर (Gorakhpur) में यह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)की क्षेत्रीय इकाई रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC) के जरिए संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के प्रयास से शुरू इस आरएमआरसी में नौ अत्याधुनिक लैब्स बनकर तैयार हैं। बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) इसका उद्घाटन करेंगे।

राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आरएमआरसी (RMRC) की इन लैब्स के जरिये न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर वल्र्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा। सबसे खास बात यह भी है कि अब गोरखपुर (Gorakhpur) में ही आने वाले समय में कोरोनाकाल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वेरिएंट (Covid variant) अधिक प्रभावित कर रहा है।

Narendra Modi , PM of India, ICMR मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस RMRC का उद्घाटन करेंगे। [Wikimedia Commons]

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