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संस्कृति

पर्यटन संवर्धन योजना में शिव मंदिरों के सर्वाधिक प्रस्ताव

यूं तो आस्था को किसी पैमाने पर परखा नहीं जा सकता, पर मंदिर जीर्णोद्धार के इच्छुक भक्तों में शिव आराधकों की तादाद सबसे ज्यादा है।

शिव के अन्य नामों दुग्धेश्वर, कैलाश, महादेव, गौरी शंकर, भुजंगनाथ, तपेश्वरनाथ और मनकामेश्वर आदि नामों को जोड़ दें तो यह संख्या और अधिक हो जाएगी। (Wikimedia Commons)

यूं तो आस्था को किसी पैमाने पर परखा नहीं जा सकता, पर मंदिर जीर्णोद्धार के इच्छुक भक्तों में शिव आराधकों की तादाद सबसे ज्यादा है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा घोषित पर्यटन संवर्धन योजना के तहत एक ‘विधानसभा-एक पर्यटन केंद्र’ योजना के लिए 373 विधायकों की ओर से आए प्रस्तावों में से सीधे करीब 52 शिव मंदिरों से जुड़े हैं। शिव के अन्य नामों दुग्धेश्वर, कैलाश, महादेव, गौरी शंकर, भुजंगनाथ, तपेश्वरनाथ और मनकामेश्वर आदि नामों को जोड़ दें तो यह संख्या और अधिक हो जाएगी। मालूम हो कि मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत योगी सरकार हर विधानसभा के किसी एक पर्यटनस्थल पर बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए 50 रुपये लाख देती है। इसमें विधायक अपनी निधि या अन्य स्रोतों से भी खर्च कर सकते हैं। सरकार का मानना है कि इससे हर विधानसभा क्षेत्र में एक पर्यटन स्थल पर बुनियादी सुविधाएं बढ़ने से वहां स्थानीय लोगों की आवाजाही और बढ़ेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार का अवसर भी बढ़ेंगे। सरकार की मंशा को पूरी करने में गांव-गिरांव की आस्था के केंद्र वहां के शिवालय बड़ी भूमिका निभाने जा रहे हैं।

क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी कीर्ति ने बताया, “कोविड के दौरान लोगों का बाहर जाना बंद है। ऐसे में स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार तेजी से काम कर रही हैं। इसके लिये यूपी हर विधानसभा में कोई न कोई धार्मिक या अन्य कोई पर्यटक स्थल है, उसको पर्यटन की दृष्टि से सुसज्जित रखने का काम किया जा रहा है। जैसे कि संपर्क मार्ग, प्रकाश शौचालय ,पीने का पानी आदि की व्यवस्था को दुरुस्त करना है। काफी विधानसभा में काम शुरू है। अक्टूबर नवम्बर तक सभी काम पूरा करना है। इसका बजट 50 लाख रुपये रखे गए हैं।”


शिव अनादि हैं और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समग्र ब्रह्मांड उनमें समाहित है। (Pixabay)

पंडित गिरीश्वर कहते हैं, “भौतिकवादी जीवन मे भी संतस्वरूप और योग के अधिष्ठाता भगवान शिव की स्वीकार्यता का निर्विवाद प्रमाण है। शिव अनादि हैं और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समग्र ब्रह्मांड उनमें समाहित है। अर्थात सम्पूर्ण सृष्टि ही शिवमय है। ‘वेदो शिवम, शिवो वेदं’ अर्थात वेद ही शिव हैं और शिव ही वेद हैं का आख्यान उनकी सर्वस्वीकार्यता और अनिर्वचनीय महत्ता का हर युग में पर्याय है। शिव भगवान श्रीराम के भी आराध्य हैं। रामचरित मानस में कई जगह इसका जिक्र भी है। मसलन लंका पर विजय के लिए समुद्र पार करने के लिए पुल बनाने के पहले श्रीराम ने रामेश्वरम में शिव की पूजा की थी।”

यह भी पढ़ें :- अरुणाचलेश्वर मंदिर: विश्व भर में भगवान शिव का सबसे बड़ा मंदिर

यह हम सबका सौभाग्य है कि तीनों लोकों से न्यारी शिव की अतिप्रिय काशी उत्तर प्रदेश में है। मान्यता है कि भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी दुनिया की प्राचीनतम जीवंत नगरी काशी के कोतवाल बाबा विश्वनाथ यानी शिव खुद हैं। सावन का पूरा महीना ही शिव के नाम है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में शिव की स्वीकार्यता स्वाभाविक है। लगभग हर गांव में तालाब या पोखरे के किनारे छोटे-बड़े शिवालयों का होना इसका प्रमाण है। अनेक गांवों में स्वप्रस्फुटित शिवलिंग शिवालयों में विराजमान हैं। शिव की स्वीकार्यता का आलम यह है कि पहले गांवो में कुंए के किनारे और घर के आंगन में भी एक वेदी पर शिवलिंग स्थापित कर उनकी पूजा होती रही है।” (आईएएनएस-SM)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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हरिद्वार हिंदुओं की धार्मिक नगरी है , जहा हर 12 वर्षो में कुंभ का मेला भी आयोजित होता है (wikimedia commons)

उत्तराखंड देवभूमि के नाम से विख्यात है , यहां हिंदु धर्म के कई तीर्थ स्थल हैं। उत्तराखंड राज्य के नए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुछ विशेष कदम उठाये हैं। इस माह की शुरुआत में धामी सरकार ने प्रदेश में अप्रत्याशित रूप से बढ़ती मुस्लिम आबादी पर काबू करने के लिए जनसंख्या नियंत्रण नीति लाने पर हामी भरी थी। धामी सरकार से RSS से जुड़े 35 संगठनों ने यह मांग की थी। कई हिन्दूवादी संगठनों का दावा है कि उत्तराखंड के कई शहर देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल में मुस्लिम आबादी कुछ सालों में लगातार बढ़ रही है ।

हरिद्वार हिंदुओं की धार्मिक नगरी है , जहां हर 12 वर्षो में कुंभ का मेला भी आयोजित होता है यह हिंदुओ के आस्था का केंद्र रहा है। सनातन धर्म के प्रमुख केंद्रों में एक, जहां सभी मठ, अखाड़े और आध्यात्मिक केंद्र स्थित हैं। यह हिंदुओं के सबसे बड़े धार्मिक कार्यो की पवित्र भूमि है। यहां पर हिन्दू अस्थि विसर्जन से लेकर जनेऊ या उपनयन संस्कार और यंहा तक की काँवड़ यात्रा में जाने के लिए भक्त जन यंहा गंगा जल तक लेने आते हैं।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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