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संस्कृति

मणिपुरी की पौराणिक कथाएं, पांडुलिपियां और उनकी जीवंत कहानियां

एक प्रसिद्ध क्यूरेटर और सांस्कृतिक संरक्षणवादी, एल. सोमी रॉय, एक लेखक और अनुवादक हैं, जिनका काम उनके मूल मणिपुरी को बाहरी दुनिया में लाने में मदद करता है।

अज्ञात मिथकों को आधुनिक मणिपुरी कलाकार सफा युमनाम द्वारा एक पुस्तक में सुंदर चित्रों से समृद्ध किया गया है। (सांकेतिक चित्र, Pixabay)

एक प्रसिद्ध क्यूरेटर और सांस्कृतिक संरक्षणवादी, एल. सोमी रॉय, एक लेखक और अनुवादक हैं, जिनका काम उनके मूल मणिपुरी (Manipuri) को बाहरी दुनिया में लाने में मदद करता है। जो उन्होंने ‘एंड दैट व्हाई’ (पफिन) और म्यांमार के साथ सीमा पर उत्तर पूर्व में पहाड़ी भूमि में 12 जादुई कहानियों में उत्साह के साथ किया है। सैकड़ों वर्षों में विद्वानों, गाथागीतों और दादी नानी द्वारा पारित, इन अज्ञात मिथकों को आधुनिक मणिपुरी कलाकार सफा युमनाम द्वारा एक पुस्तक में सुंदर चित्रों से समृद्ध किया गया है। जो मणिपुरी पांडुलिपि चित्रों से पहले कभी न देखी गई कला का परिचय देता है।

पुस्तक में पौराणिक कहानियां मणिपुर की तिब्बती बर्मन भाषा में पाठ और मौखिक स्रोतों से ली गई हैं। कई कहानियां मौखिक परंपराएं गाथागीत और अनुष्ठानों से हैं, जो लिखित ग्रंथ पुया नामक पांडुलिपियों की एक बहुत ही कम ज्ञात परंपरा में पाए जाते हैं और ज्यादातर मैतेई मायेक में हस्तलिखित होते हैं, जो मुट्ठी भर तिब्बती बर्मन लिपियों में से एक है।


कहानियों में जिस पौराणिक कथा को शामिल किया गया है, वह मेतेईस की है, जो प्रमुख समूह है जिसने मणिपुर के सामंती साम्राज्य की स्थापना की, और जिससे लेखक संबंधित है। वे विद्वानों, पुरालेखपालों और गाथागीतों से एकत्र किए गए हैं।

‘एंड दैट इज व्हाई’ में मिथक मेतेईस के पूर्व हिंदू धार्मिक अभ्यास का एक हिस्सा हैं, जो काफी हद तक पूर्वज पूजा और जीववादी है, और जो वैष्णववाद के साथ सह अस्तित्व में रहा और आज भी इसका अभ्यास किया जाता है।

एंड दैट इज व्हाई’ में मिथक मेतेईस के पूर्व हिंदू धार्मिक अभ्यास का एक हिस्सा हैं| (IANS)

कई कहानियां मणिपुर की निकटवर्ती आदिवासी परंपराओं, जैसे कि काबुई, और चकपा, काकचिंग और मोइरंग जैसे मेतेईस के भीतर छोटी परंपराओं के साथ ओवरलैप या फीचर करती हैं।

एक सांस्कृतिक संरक्षणवादी और क्यूरेटर होने के अलावा, आई. सोमी रॉय घरेलू और अमेरिकी प्रकाशनों के लिए फिल्म, संस्कृति, मणिपुरी पोलो और मणिपुरी टट्टू (जो 13 हाथ या 52 इंच से कम खड़े हैं) के संरक्षण पर लिखती हैं। उन्होंने एशिया सोसाइटी, आधुनिक कला संग्रहालय, लिंकन सेंटर में फिल्म और अमेरिकी कला के व्हिटनी संग्रहालय के लिए प्रदर्शनियों का आयोजन किया है।

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उन्होंने अपनी मां मणिपुरी लेखक एम.के. बिनोदिनी देवी की प्रकाशित रचना उनका ऐतिहासिक उपन्यास ‘द प्रिंसेस एंड द पॉलिटिकल एजेंट’, एक पेंगुइन मॉडर्न क्लासिक, संस्मरण निबंध ‘द महाराजा हाउसहोल्ड ए डॉटर्स मेमोरीज ऑफ हर फादर’, उसका नाटक ‘क्रिमसन रेनक्लाउड्स’ और पटकथा ‘माई सन, माई प्रीशियस’ का अनुवाद किया है।

रॉय इमासी के संस्थापक हैं, मणिपुर में महाराज कुमारी बिनोदिनी देवी फाउंडेशन। (आईएएनएस-SM)

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डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन का मुख्यालय (wikimedia commons)

पूरी दुनिया एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है । डब्ल्यूएचओ यानीं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना वायरस का जो डेल्टा कोविड वैरिएंट संक्रामक वायरस का वर्तमान में प्रमुख प्रकार है, अब यह दुनिया भर में इसका फैलाव हो चूका है । इसकी मौजूदगी 185 देशों में दर्ज की गई है। मंगलवार को अपने साप्ताहिक महामारी विज्ञान अपडेट में वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा, डेल्टा वैरिएंट में अब सेम्पल इकट्ठा करने की डेट जो कि 15 जून -15 सितंबर, 2021 के बीच रहेंगीं । जीआईएसएआईडी, जो एवियन इन्फ्लुएंजा डेटा साझा करने पर वैश्विक पहल के लिए है, एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस है।

मारिया वान केरखोव जो विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 पर तकनीकी के नेतृत्व प्रभारी हैं , उन्होंने डब्ल्यूएचओ सोशल मीडिया लाइव से बातचीत करते हुए कहा कि , वर्तमान में कोरोना के अलग अलग टाइप अल्फा, बीटा और गामा का प्रतिशत एक से भी कम चल रहा है। इसका मतलब यह है कि वास्तव में अब दुनिया भर में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट ही चल रहा है।

\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया का नक्शा (Wikimedia Commons)

ऑस्ट्रेलिया की शार्क प्रजातियों पर एक खतरा आ गया है। वहाँ 10 प्रतिशत से अधिक शार्क प्रजाति विलुप्त होने ही वाली है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान कार्यक्रम (एनईएसपी) समुद्री जैव विविधता हब ने सभी ऑस्ट्रेलियाई शार्क, किरणों और घोस्ट शार्क (चिमेरा) के विलुप्त होने का मूल्यांकन प्रकाशित किया है।


ऑस्ट्रेलिया दुनिया की कार्टिलाजिनस मछली प्रजातियों के एक चौथाई से अधिक का घर है, इसमें 182 शार्क, 132 किरणें और 14 चिमेरे ऑस्ट्रेलियाई जलमार्ग में हैं। पीटर काइन जो चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय (सीडीयू) के एक वरिष्ठ शोधकर्ता है और रिपोर्ट के प्रमुख लेखक है उन्होंने कहा कि तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। पीटर काइन कहा, "ऑस्ट्रेलिया का जोखिम 37 प्रतिशत के वैश्विक स्तर से काफी कम है। यह उन 39 ऑस्ट्रेलियाई प्रजातियों के लिए चिंता का विषय है, जिनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ गया है।"

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ब्रिटेन में पढ़ने के लिए राज्य छात्रवृत्ति मिली 6 आदिवासी छात्रों को।(Unsplash)

भारत के झारखंड राज्य में कुछ छात्रों का भविष्य उज्व्वल होने जा रहा है । क्योंकि झारखंड राज्य में छह छात्रों को राज्य के छात्रवृत्ति कार्यक्रम के तहत विदेश में मुफ्त उच्च शिक्षा मिलने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री चंपई सोरेन राजधानी रांची में गुरुवार कोआयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना मारंग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के तहत लाभार्थियों छात्रोंऔर उनके अभिभावकों को सम्मानित करने जा रहे है।

आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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