Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×

नासा ( NASA  ) ने एजेंसी के लघु व्यवसाय नवाचार अनुसंधान (एसबीआईआर) और लघु व्यवसाय प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (एसटीटीआर) कार्यक्रम से प्रारंभिक फंडिंग के लिए 365 अमेरिकी छोटे व्यापार प्रस्तावों का चयन किया है, जो कुल 4.5 करोड़ डॉलर से अधिक का निवेश है। नासा ने गुरुवार को कहा कि एजेंसी कंपनियों को अपने नवाचारों की योग्यता और व्यवहार्यता स्थापित करने के लिए 125,000 डॉलर तक प्रदान कर रही है।

एजेंसी के स्पेस टेक्नोलॉजी मिशन डायरेक्टोरेट (एसटीएमडी) के एसोसिएट एडमिनिस्ट्रेटर जिम रेउटर ने एक बयान में कहा, “हम मानते हैं कि नासा में महामारी के कारण छोटे व्यवसायों को अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।”


उन्होंने कहा, “इस वर्ष, छोटे व्यवसायों के हाथों में लिए जल्द धन प्राप्त करने के लिए हमने 2021 एसबीआईआर/एसटीटीआर चरण-की दो महीने की सोलिसिटेशन की गति तेज कर दी है। हमें उम्मीद है कि शीघ्र वित्त पोषण भविष्य की सफलता के लिए एक निकट-अवधि की बढ़ोतरी में मदद करेगा।”
कार्यक्रम के माध्यम से, नासा अमेरिका के छोटे व्यवसायों और अनुसंधान संस्थानों के साथ अत्याधुनिक तकनीकों को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।

नासा छोटे व्यवसायों की मदद करेगा ।  ( pixabay ) 

यह भी पढ़ें: चीन दुनिया के लिए खतरा है : अमेरिका

चरण-एसबीआईआर अनुबंध छोटे व्यवसायों को प्रदान किए जाते हैं और छह महीने तक चलते हैं, जबकि चरण-एसटीटीआर अनुबंध एक शोध संस्थान के साथ साझेदारी में और 13 महीने तक चलने वाले छोटे व्यवसायों को दिए जाते हैं।
चरण- के दौरान उनकी प्रगति के आधार पर, कंपनियां बाद में एसबीआईआर/एसटीटीआर अवसरों के प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकती हैं और अतिरिक्त धन प्राप्त कर सकती हैं।

नासा ने अपनी तकनीकी योग्यता और व्यावसायिक क्षमता के आधार पर धन प्राप्त करने के प्रस्तावों का चयन किया है। ( AK आईएएनएस )

Popular

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

Keep Reading Show less

राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

Keep Reading Show less

शोधकर्ताओं ने कोविड के खिलाफ लड़ने में कारगर हिमालयी पौधे की खोज। ( Pixabay )

कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

Keep reading... Show less