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खेल

नटराजन के पास अच्छी लाइन-लैंग्थ : डेविड वार्नर

आस्ट्रेलिया के सालमी बल्लेबाज डेविड वार्नर ने शनिवार को भारत के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज टी.नटराजन की तारीफ की है और कहा कि उनके पास अच्छी लाइन-लैंग्थ है। वार्नर ने हालांकि इस बात पर कोई जवाब नहीं दिया कि अगर नटराजन आखिरी के दो टेस्ट मैचों में खेलते हैं तो वह उनका सामना कैसे

आस्ट्रेलिया के सालमी बल्लेबाज डेविड वार्नर ने शनिवार को भारत के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज टी.नटराजन की तारीफ की है और कहा कि उनके पास अच्छी लाइन-लैंग्थ है। वार्नर ने हालांकि इस बात पर कोई जवाब नहीं दिया कि अगर नटराजन आखिरी के दो टेस्ट मैचों में खेलते हैं तो वह उनका सामना कैसे करेंगे।

नटराजन और वार्नर दोनों आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हैं। वार्नर हैदराबाद के कप्तान हैं। नटराजन ने इस साल आईपीएल पदार्पण किया और 16 मैचों में 16 विकेट लिए थे। इसके बाद वह आस्ट्रेलिया दौरे पर नेट गेंदबाज के तौर पर भारतीय टीम में शामिल किए गए थे।


चोटों के कारण उन्हें हालांकि टी-20 और वनडे पदार्पण का मौका मिला। उमेश यादव के चोटिल होने के बाद वह टेस्ट टीम में भी शामिल किए गए। वार्नर ने शनिवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, “मुझे पता नहीं। मैं उनके रणजी ट्रॉफी के आंकड़े नहीं जानता। मुझे पता है कि उनके पास अच्छी लाइन-लैंग्थ है, लेकिन टेस्ट में लगातार ओवर फेंकना एक अलग बात है। मैं 100 फीसदी आश्वास्त नहीं हूं।”

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वार्नर ने कहा, “मुझे लगता है कि नटारजन के लिए यह बड़ी बात है। वह यहां अपने पहले बच्चे के जन्म को छोड़कर नेट गेंदबाज के तौर पर टीम में आए थे। उनको बधाई और वह काफी अच्छे गेंदबाज हैं। मुझे यह देखना का मौका मिला और आईपीएल में उनकी कप्तानी करने का मौका मिला। मैं उन्हें बधाई देता हूं। उन्हें जब मौका मिलेगा, हम जानते हैं कि वह काफी सहज हैं और जानते हैं कि उन्हें क्या करना है।” (आईएएनएस)

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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क्रांतिकारी दुर्गावती देवी (wikimedia commons)

हिंदुस्तान की भूमि पर कई साहसी और निडर लोगों का जन्म हुआ जिन्होने भारत की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। लेकिन दुःख की बात यह है कि इनका नाम इतिहास के पन्नों में इतनी बार दर्ज नहीं हुआ जितना होना चाहिए था। ऐसी ही एक वीरांगना का नाम है दुर्गावती देवी। इन्हें दुर्गा भाभी के नाम से भी जाना जाता है। यह उन महिलाओं में से एक थी जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ क्रांति में भाग लिया था।

दुर्गा भाभी का जन्म 7 अक्टूबर 1907 में उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में हुआ था। इनका जन्म छोटी उम्र में ही भगवती वोहरा जी के साथ हुआ। भगवती वोहरा का परिवार लाहौर का प्रतिष्ठित परिवार था। दुर्गावती के पति भी क्रांति में पुरजोर तरीके से भाग लेना चाहते थे। लेकिन पिता के दबाव के कारण ऐसा कर नहीं पा रहे थे। पिता का देहांत होने के बाद भगवती जी ने भी क्रांति में भाग लिया था।

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