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थोड़ा हट के

National Mathematics Day : अंकों की जादू नगरी में आपका स्वागत है !

अल्बर्ट आइंस्टीन का मानना था कि गणित मात्र लॉजिक नहीं बल्कि लॉजिकल विचारों की कविता है।

पासों की विपरीत दिशाओं के अंकों को जोड़ने के बाद उत्तर हमेशा ‘ 7 ‘ ही होगा। (Pixabay)

क्या आपको भी गणित की कक्षा में बैठे उबासियाँ आने लगती थीं? या आती हैं? अगर ऐसा है तो शायद आज आपका ख्याल थोड़ा बदल जाए। क्योंकि गणित सिर्फ लॉजिक नहीं बल्कि जादू नगरी है जिसके जादूगर हैं अंतहीन नंबर्स।

भारत के महान गणितज्ञ ‘श्रीनिवास रामानुजन’ ने कहा था “An equation means nothing to me unless it expresses a thought of God.” अर्थात उनके लिए किसी भी मैथमेटिकल समीकरण का कोई महत्व नहीं अगर वो ईश्वर के विचार को व्यक्त नहीं करता।


श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के ईरोड नामक गांव में हुआ था।

हर वर्ष 22 दिसंबर को भारत, राष्ट्रिय गणित दिवस (National Mathematics Day) मना कर अपने महान गणितज्ञ ‘श्रीनिवास रामानुजन’ की जन्मतिथि को गौरवान्वित दर्जा देते हुए उनके प्रति अपनी कृतज्ञता को व्यक्त करता है। आइए आज उसी कृतज्ञता की तर्ज पर गणित के कलात्मक पहलू को देखते हैं।

यह भी पढ़ें – आई पैड पर गेम खेलते हुए 6 साल के बच्चे ने 11 लाख रुपए किए खर्च

‘ 9 ‘ का मैजिक

अंकों की श्रृंखला में ‘ 9 ‘ को मैजिक नंबर की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यदि आप किसी भी एक नंबर को 9 से गुणा करते हैं तो प्राप्त हुए नए नंबर के सभी अंकों को एक साथ जोड़ने के बाद आपको हमेशा पुनः 9 नंबर की प्राप्ति होगी। मिसाल के तौर पर : 4 x 9 = 36, अब प्राप्त हुए 36 नंबर के सभी अंकों को जोड़ने के बाद (3 + 6 = 9) हमें फिर से ‘ 9 ‘ नंबर देखने को मिल जाता है।

‘ 4 ‘ का आतंक

आपको जान के हैरानी होगी कि पूर्वी एशिया के अधिकांश हिस्सों जैसे चीन, जापान, कोरिया आदि देशों में ‘ 4 ‘ का बड़ा आतंक है। इस डर को लोगों ने टेट्राफोबिया (Tetraphobia) का नाम दिया है। असल में इन देशों में ‘ 4 ‘ नंबर को मृत्यु के उपलक्ष में समझा जाता है।

‘ 7 ‘ की अलौकिकता

आपके दिमाग में कभी तो यह विचार ज़रूर आया होगा कि हफ्ते में 7 ही दिन क्यों होते हैं, इंद्रधनुष में भी 7 रंग,संगीत में 7 स्वर, दुनिया में आपके 7 हमशक्ल, शादी की 7 कसमें, और पुनर्जन्म के मौके भी मात्र 7 बार ही मिलते हैं। धार्मिक परिप्रेक्ष्य में भी ‘7’ को सबसे महत्वपूर्ण संख्या माना गया है।

‘ 0 ‘ की दुविधा

ज़ीरो किसी नंबर के पीछे लग जाए तो आगे खड़े नंबर के भाव बढ़ जाते हैं। पर रोमन साम्राज्य इस नेक दिल नंबर को नंबर मानने से इंकार कर चुका है। क्योंकि रोमन्स की गिनती ‘ 1 ‘ से शुरू होती है। उनके पास ‘ 0 ‘ का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई अक्षर ही नहीं। अब रोमन्स ज़ीरो को महत्व दें या ना दें, पूरी दुनिया इसके आगे नतमस्तक है।

‘ 3 ‘ का तिकड़म

तीन अपने आप में भी बड़ा ख़ास अंक है। अगर आप किसी भी नंबर को तीन से गुणा करते हैं। तो प्राप्त हुए नंबर के सभी अंकों को जोड़ने के बाद जो नई संख्या प्राप्त होगी, उस संख्या को हमेशा ही ‘ 3 ‘ से डिवाइड किया जा सकेगा। उदाहरण के तौर पर : 9 x 3 = 27, अब जोड़ने के बाद (2 + 7 = 9) प्राप्त हुए अंक को तीन से डिवाइड किया जा सकता है। 9 / 3 = 3

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए – Rejoicing December 22 National Mathematics Day

इन कुछ मामूली मिसालों से आपको यह अनुमान तो लग ही चुका होगा कि गणित अपने आप में इतनी व्यापक है कि उसके रूप को किसी एक खांचे में डाल पाना बड़ा कठिन है। अल्बर्ट आइंस्टीन भी मानते थे कि गणित मात्र लॉजिक नहीं बल्कि लॉजिकल विचारों की कविता है। अब कविता तो अपने अंदर ना जाने कितने मोती छुपाए होती है। उन्हीं मोतियों को चुन कर, जो उसमें लीन हो जाता है, आगे चल कर वही इसके भीतर की जादू नगरी को समझने में सक्षम है।

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