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देश

लद्दाख ने शुरू किया महीने भर का जल अभियान

लद्दाख ने केंद्र शासित प्रदेश में जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन की गति को तीन-आयामी दृष्टिकोण के साथ बढ़ाने के लिए एक महीने का 'पानी माह' (जल माह) अभियान शुरू किया है

लद्दाख (wikimedia commons)

लद्दाख ने केंद्र शासित प्रदेश में जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन की गति को तीन-आयामी दृष्टिकोण के साथ बढ़ाने के लिए एक महीने का ‘पानी माह’ (जल माह) अभियान शुरू किया है – पानी की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करते हुए गांवों में पानी की आपूर्ति का टेस्ट, योजना और रणनीति बनाना और पानी सभा का निर्बाध कामकाज पर ध्यान रहेगा। लद्दाख में जेजेएम के क्रियान्वयन पर चार दिवसीय कार्यशाला के दौरान 25 जुलाई को शुरू हुआ ‘पानी माह’ अभियान दो चरणों में ब्लॉक और पंचायत स्तर पर चलेगा। जल शक्ति मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि पहला चरण 1 से 14 अगस्त तक चलेगा जबकि दूसरा चरण 16 से 30 अगस्त तक चलेगा।

अभियान की शुरूआत करते हुए लद्दाख के उपराज्यपाल आर.के. माथुर ने ‘पानी माह’ के उद्देश्य पर जोर दिया और कहा कि एक कुशल सेवा वितरण पारदर्शिता लाता है और सुशासन सुनिश्चित करता है।


उन्होंने कहा, “इस महीने भर चलने वाले अभियान के माध्यम से ग्रामीण समुदायों को गुणवत्ता जांच और निगरानी के लिए पानी की गुणवत्ता प्रयोगशालाओं में पानी के नमूने भेजने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।”

‘पानी माह’ के पहले चरण में, ग्राम जल और स्वच्छता समिति (वीडब्ल्यूएससी)/पानी समिति के सदस्यों द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण और स्वच्छता अभियान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस चरण के दौरान, टेस्ट के लिए सभी चिन्हित स्रोतों और सेवा वितरण बिंदुओं से पानी का नमूना एकत्र किया जाएगा। पहले चरण में जागरूकता और संवेदीकरण अभियान भी शामिल होंगे।

लद्दाख (wikimedia commons)

पानी माह के दूसरे चरण में जेजेएम के तहत पानी की गुणवत्ता और सेवा वितरण पर प्रभावी संचार के लिए पानी सभा/ग्राम सभा/ब्लॉक स्तर की बैठकें आयोजित करने और घर-घर जाकर दौरा करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस चरण के दौरान, जेजेएम कार्यान्वयन, जल गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट और विश्लेषण पर ग्रामीणों के साथ खुले मंच पर चर्चा की जाएगी। विज्ञप्ति में कहा गया है कि अभियान में ग्रामीणों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जल नमूना संग्रह और ग्राम सभाओं के लिए एक गांव/ब्लॉक-वार कार्यक्रम भी तैयार किया गया है।

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लद्दाख ने प्रत्येक जिले के पहले पांच ‘हर घर जल’ गांवों के लिए प्रति गांव 5 लाख रुपये और प्रत्येक जिले में पहले ‘हर घर जल’ ब्लॉक को 25 लाख रुपये का पुरस्कार देने की भी घोषणा की है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि पंचायती राज संस्थानों, खंड विकास अधिकारियों, सहायक कार्यकारी अभियंताओं और अन्य संबंधित हितधारकों जैसे उत्कृष्ट स्थानीय सदस्यों को गांवों, ब्लॉकों और जिलों को ‘हर घर जल’ के अनुरूप बनाने के लिए उनके योगदान के लिए गणतंत्र दिवस 2022 पर सम्मानित किया जाएगा।

–(आईएएनएस-PS)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

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