

नई एयरलाइन को मिली सरकारी मंज़ूरी के बीच उसके मालिकाना ढांचे, फंडिंग और कारोबारी पृष्ठभूमि को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिस उद्योग में वर्षों पुरानी कंपनियाँ भी घाटे और शिकायतों से जूझ रही हैं, वहाँ एक नई और कम उम्र की कंपनी पर भरोसा करने से पहले तथ्यात्मक जाँच ज़रूरी लगती है।
यह मामला सिर्फ एक प्रेरक कहानी नहीं, बल्कि यह देखने का विषय है कि क्या नियमों, पारदर्शिता और यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता तो नहीं हुआ।
हवाई यात्रा आज किसी भी व्यक्ति के लिए परिवहन का एक सबसे सुलभ और प्रभावी माध्यम बन चुकी है। इसकी मदद से लोग कम समय में, बिना अधिक थकान के, किसी भी कार्यक्रम, काम या ज़रूरी स्थान पर समय से पहुँच सकते हैं। भारत में हवाई यात्रा अब केवल अमीर वर्ग तक सीमित नहीं रही है। बीते एक दशक में आम आदमी भी फ्लाइट से सफर करने लगा है। परन्तु कई बार बिना पूर्व सूचना के फ्लाइट रद्द होने की घटनाएँ सामने आई हैं। इतना ही नहीं, कई मामलों में यात्रियों के टिकट के पैसे समय पर वापस नहीं मिले, जिससे लोगों का भरोसा डगमगाया है। यही कारण है कि भारत में जब भी किसी नई एयरलाइन का नाम सामने आता है, तो लोगों में उत्साह के साथ-साथ शंका भी जन्म लेती है। इसी अस्थिर माहौल के बीच भारत सरकार ने कुछ नई एयरलाइंस को संचालन की अनुमति दी है।
हाल के समय में अलहिंद एयर (Alhind Air) और शंख एयरलाइन (Shankh Airline) को उड़ान शुरू करने के लिए एनओसी (NOC) मिली है। इसके साथ-साथ एक क्षेत्रीय एयरलाइन स्टार एयर (Star Air) भी धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है। सरकार का उद्देश्य है—उड़ान (UDAN – उड़े देश का आम नागरिक) जैसी योजनाओं के ज़रिए छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना, प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और यात्रियों को सस्ते विकल्प उपलब्ध कराना। शंख एयर लाइन को लेकर विशेष रूप से चर्चा तेज़ है।
शंख एयरलाइन
शंख एयरलाइन उत्तर प्रदेश की पहली निजी एयरलाइन बताई जा रही है, जिसका संचालन केंद्र नोएडा और लखनऊ को बनाया जाना प्रस्तावित है। नागर विमानन मंत्रालय द्वारा सितंबर 2025 में इसे मंज़ूरी दिए जाने की बात सामने आई है। इस एयरलाइन के मालिक श्रवण कुमार विश्वकर्मा बताए जाते हैं, जिनका नाम हाल के दिनों में मीडिया और सोशल मीडिया पर तेज़ी से उभरा है। उन्हें एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। कई इंटरव्यू और लेखों में यह कहानी प्रमुखता से दिखाई जा रही है कि एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति, जो कभी ऑटो चालक था, आज एयरलाइन का मालिक बन गया है और लोगों को आसमान में उड़ने के सपने दिखा रहा है।
कौन है श्रवण कुमार ?
मीडिया में उपलब्ध जानकारी के अनुसार श्रवण कुमार विश्वकर्मा कानपुर के रहने वाले बताए जाते हैं और उनका संबंध एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से बताया जाता है। यह भी कहा गया है कि अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने ऑटो चलाया। हालाँकि, हाल के इंटरव्यू में यह भी सामने आया है कि उन्होंने सीमेंट, टीएमटी और माइनिंग जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार किया है। मीडिया द्वारा लिखे गए लगभग हर लेख और इंटरव्यू की हेडलाइन एक ही रहती है—“ऑटो चालक से शंख एयरलाइन के मालिक तक का सफर।”
हाल में हुए इंटरव्यूज में जब उनसे एयरलाइन शुरू करने के विचार को लेकर सवाल किया गया, तो उनका जवाब था कि किसी भी बिज़नेस के ठप होने का सबसे बड़ा कारण कर्ज़ होता है, और एयरलाइन जैसे कारोबार में कर्ज़ के सहारे शुरुआत नहीं की जा सकती। उनका यह भी दावा है कि उन्हें किसी अन्य एयरलाइन से प्रतिस्पर्धा का डर नहीं है और वह सिर्फ अपने एयरलाइन पर ध्यान देना चाहते हैं, लेकिन यहीं से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
जनता का प्रश्न है जब देश की सबसे बड़ी और स्थापित एयरलाइंस को लेकर भी यात्रियों की शिकायतें सामने आती रहती हैं, तो एक अपेक्षाकृत नए और एक व्यक्ति के स्वामित्व वाली एयरलाइन को इतनी आसानी से मंज़ूरी देना क्या पूरी तरह सुरक्षित और तार्किक निर्णय है? क्या केवल एक प्रेरक कहानी के आधार पर किसी एयरलाइन पर भरोसा किया जा सकता है? क्या भावनाओं में बहकर तथ्यों को नज़रअंदाज़ करना सही होगा?
असाधारण सफ़लता या घोटाला ?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो और दावे इन सवालों को और गहरा करते हैं। बताया जा रहा है कि श्रवण कुमार विश्वकर्मा की कंपनी शंख ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड (Shankh Trading Private Limited ) मात्र दो से तीन साल पुरानी है। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि इतनी नई कंपनी देश में एक एयरक्राफ्ट आधारित एयरलाइन कैसे संचालित करने जा रही है? बताया जा रह है कि, कंपनी के किसी भी कर्मचारी का ईपीएफओ (EPFO) रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है और न ही कंपनी में किसी निजी हिस्सेदारी (Private Equity), वेंचर कैपिटल (Venture Capital ) या बाहरी निवेशक (External Investors) की स्पष्ट जानकारी सामने आती है।
इसके साथ ही सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया जा रहा है कि केवल तीन वर्षों में श्रवण कुमार की कंपनी का रेवेन्यू लगभग 658 प्रतिशत बढ़ा है, जो 36 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 275 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। क्या यह वृद्धि सामान्य कारोबारी परिस्थितियों में संभव है? क्या इसे एक असाधारण सफलता माना जाए या फिर इसके पीछे किसी गड़बड़ी की आशंका की जाँच होनी चाहिए?
सोशल मीडिया पर यह प्रश्न है की जब एक आम व्यक्ति को महज़ दो-तीन लाख रुपये का बैंक लोन लेने के लिए भी लंबी प्रक्रिया और कई चक्कर का सामना करना पड़ता हैं, तो क्या यह सवाल उठना स्वाभाविक नहीं है कि इतनी नई कंपनी को सैकड़ों करोड़ रुपये के लोन कैसे उपलब्ध हो गए? बैंकिंग व्यवस्था में इसे हाई-रिस्क (High Risk ) या हाई-अलर्ट (High-Alert) श्रेणी में क्यों नहीं देखा गया?
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री का बयान
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू (जो भाजपा सरकार में हैं) ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि सरकार अधिक एयरलाइंस को बढ़ावा देना चाहती है ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े और यात्रियों के पास विकल्प बढ़ें। मंत्री ने यह भी कहा है कि यह कदम भारत के नागर विमानन क्षेत्र को विकसित करने और छोटे-छोटे प्लेयर्स को उभारने के लिए है एक नीति स्तर का फैसला है ।
पहले भी सरकार पर उठ चुके हैं आरोप
अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस का नाम राफेल लड़ाकू विमान सौदे के ऑफसेट अनुबंधों को लेकर राजनीतिक विवादों में सामने आया था, जहाँ कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया था कि उन्हें अनुभव न होने के बावजूद यह अनुबंध मिला। हालांकि, सरकार और अंबानी ने इन आरोपों का खंडन किया था, और यह मामला भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों से संबंधित था, न कि नागरिक उड्डयन या निजी विमानों से।
ऐसे में लोगों द्वारा प्रश्न यह उठता है की सरकार द्वारा एक ऐसी एयरलाइन को मंज़ूरी देना कहाँ तक उचित है जिसे एयरलाइन के क्षेत्र में कोई अनुभव नहीं है और जय यह सचमुच मध्यमवर्गी लोगों के लिए किया जाने वाला प्लान है या सरकार की तरफ से होने वाला कोई बड़ा घोटाला ?
(PO)