लंगूर की आवाज निकालो नौकरी पाओ, दिल्ली विधानसभा में निकली जॉब, बजट ₹17.5 लाख

दिल्ली सरकार ने बंदरों से निपटने के लिए जुगाड़ नहीं, समझदारी वाला देसी उपाय चुना है—ना जानवर को नुकसान, ना इंसानों को परेशानी। इस पूरी सेवा के लिए सरकार ने करीब ₹17.5 लाख का बजट रखा है।
इस इमेज में बंदर को देखा जा सकता है।
लंगूर की आवाज निकालो नौकरी पाओ, दिल्ली विधानसभा में निकली जॉब।Md. Tareq Aziz Touhid, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons
Reviewed By :
Published on
Updated on
2 min read
  • दिल्ली विधानसभा में बंदरों से निपटने के लिए सरकार ने लंगूर की आवाज़ वाला देसी जुगाड़ निकाला।

  • PWD ने टेंडर जारी किया, 8 घंटे की शिफ्ट में कर्मचारी सिर्फ आवाज़ से बंदर भगाएंगे।

  • नकली लंगूर फेल हुए, अब सरकार को उम्मीद है कि आवाज़ वाला तरीका काम करेगा।

दिल्ली विधानसभा परिसर में बंदरों का आतंक एक समस्या बना हुआ है। बंदर या तो कभी फाइलें गिरा देते हैं, कभी तारों पर उछल-कूद, तो कभी अचानक अंदर घुसकर अफरा-तफरी करने लगते हैं। इसी झंझट से निपटने के लिए अब सरकार ने देशी और मानवीय तरीका अपनाने का फैसला किया है। अब बंदरों को भगाने के लिए लंगूर का पुतला नहीं, बल्कि लंगूर की आवाज़ निकालने वाले लोग तैनात किए जाएंगे। जी हाँ आप बिलकुल सही पढ़ रहे हैं, दिल्ली लोक निर्माण विभाग (PWD) ने ऐसे लोग को भर्ती करने का फ़ैसला किया, जो हू-ब-हू लंगूर जैसी आवाज़ निकाल सकें, ताकि बंदर डरें और परिसर से दूर रहें।

इस पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग (PWD) को दी गई है। PWD ने इसके लिए टेंडर जारी किया है। ये कर्मचारी दिल्ली विधानसभा के बाहर और आसपास तैनात रहेंगे।

काम कैसे होगा?

इस टेंडर के तहत कर्मचारी 8-8 घंटे की शिफ्ट में काम करेंगे। इस टेंडर में भर्ती हुए कर्मचारी को सातों दिन काम करना होगा। इस प्रक्रिया का मकसद साफ है—बंदरों को नुकसान पहुँचाए बिना, सिर्फ आवाज़ से डराकर भगाना। इससे पहले नकली लंगूर के पुतले लगाए जाते थे, लेकिन बंदर इतने समझदार निकले कि उन पुतलों से डरने के बजाय उन्हीं पुतलों पर बैठने लगे। तब जाकर दिल्ली लोक निर्माण विभाग को समझ आया कि बंदरों को पुतलों द्वारा नहीं भगाया जा सकता है, इसके लिए असली आवाज़ को हथियार के रूप में प्रयोग करना ज्यादा समझदारी का काम है।

इस पूरी सेवा के लिए सरकार ने करीब ₹17.5 लाख का बजट रखा है। हालांकि एक-एक व्यक्ति को कितनी सैलरी मिलेगी, यह एजेंसी तय करेगी—खबरों में अलग से रकम नहीं बताई गई है।

क्यों जरूरी था ये कदम?

बीते सालों में कई बार बंदर विधानसभा के कामकाज में बाधा बने हैं। 2017 में एक बंदर विधानसभा में घुसा था और उसने कार्यवाही को बाधित किया था — जिससे यह समस्या और गंभीर रूप से सामने आई थी। इसलिए अब सरकार चाहती है कि बिना हिंसा, बिना तमाशा के समस्या का हल निकाला जाए।

निष्कर्ष

दिल्ली सरकार ने बंदरों से निपटने के लिए जुगाड़ नहीं, समझदारी वाला देसी उपाय चुना है—ना जानवर को नुकसान, ना इंसानों को परेशानी। अब देखना है कि लंगूर की आवाज़ कितनी असरदार साबित होती है। यह भी देखना होगा की इस नौकरी के लिए कितने लोग अपनी दिलचस्पी दिखाते है। चूँकि ये नौकरी Contractual आधारित है, तो जरुरी नहीं है की इस नौकरी में बढ़-चढ़ कर दिलचस्पी दिखाए। दिल्ली एनसीआर के बंदर इतने हिंसक हैं की इससे अपनी सुरक्षा पर भी खतरा है। अब देखना है की दिल्ली लोक विभाग द्वारा उठाया गया यह कदम कितना प्रभावपर्ण रहेगा ?

इस इमेज में बंदर को देखा जा सकता है।
भिवंडी : फैक्ट्री में लगी भीषण आग, सिलेंडर ब्लास्ट होने से दमकल विभाग का कर्मचारी घायल

Related Stories

No stories found.
logo
hindi.newsgram.com